दिल्ली हाईकोर्ट ने इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट की अनिवार्यता पर मांगी स्पष्टता
कोर्ट ने जनहित याचिका के बाद यह जांच शुरू की है कि दिल्ली में सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों पर स्ट्रक्चरल ऑडिट कराना मौजूदा बिल्डिंग‑प्लानिंग कानूनों के तहत अनिवार्य है या नहीं। यह सवाल एक 50 साल पुरानी इमारत के ढहने से उठे, जिसमें सात लोगों की मौत हुई। अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी, जहाँ सुरक्षा नीति और जिम्मेदारी तय करने के उपायों पर चर्चा होगी।

सौजन्य से:- Aaj Tak
Sign In
Advertisement
X
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट को लेकर मौजूदा कानूनी व्यवस्था पर स्पष्टता मांगी है. कोर्ट यह देख रहा है कि क्या दिल्ली में सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराना मौजूदा कानून के तहत अनिवार्य है या नहीं. कोर्ट ने इस मामले में संबंधित बिल्डिंग और प्लानिंग कानूनों पर सहायता भी मांगी है.
यह मामला 6 सितंबर को सत्य निकेतन में एक इमारत गिरने के बाद दायर जनहित याचिका पर चल रही सुनवाई के दौरान सामने आया है. इस हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी. हादसे वाली इमारत करीब 50 साल पुरानी और पांच मंजिला थी. इसका इस्तेमाल लड़कों के PG के तौर पर किया जा रहा था.
ियह भी पढ़ें: आरोपी छूटा तो क्या? पीड़ित को मिलेगा मुआवजा... दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
जनहित याचिका में दिल्ली में सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों की संरचनात्मक और फायर सेफ्टी को लेकर एक व्यापक और समयबद्ध नीति बनाने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि ऐसी इमारतों की सुरक्षा जांच को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए और इसे तय समय के भीतर लागू किया जाना चाहिए.
याचिका में सत्य निकेतन हादसे की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है. इसमें इमारत के निर्माण, जरूरी मंजूरियों, उसकी संरचनात्मक हालत, पहले हुई जांच और निरीक्षण की जानकारी के साथ फायर सेफ्टी नियमों के पालन की भी जांच करने की मांग है.
Advertisement
यह भी पढ़ें: JEE छात्रा की याचिका खारिज, IIT में दाखिले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- सहानुभूति के आधार पर नियमों में छूट नहीं
इसके अलावा याचिका में किसी भी तरह की नियामकीय लापरवाही या बिना अनुमति किए गए निर्माण के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता यह भी चाहते हैं कि अगर किसी स्तर पर नियमों का पालन नहीं हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों या संबंधित पक्षों की जवाबदेही तय हो.
दिल्ली हाईकोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को करेगा. तब तक कोर्ट के सामने यह साफ करने की कोशिश होगी कि मौजूदा कानून इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट को लेकर क्या प्रावधान करते हैं और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं.
---- समाप्त ----
TOPICS:
Latest News in Hindi »
Advertisement
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
दिल्ली हाई कोर्ट ने CBI के छह अधिकारियों पर झूठी गवाही के लिये धारा 340 के तहत कार्रवाई का आदेश दिया

हिमाचल में अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता व वित्तीय लाभ देने का हाईकोर्ट आदेश, 1 दिसंबर तक लागू

दिल्ली हाई कोर्ट ने सलमान खान को नोटिस भेजा, 'काला हिरण' फिल्म की रिलीज़ पर रोक की याचिका पर जवाब माँगा

सरकारी कर्मचारी पर बॉम्बे हाई कोर्ट में अवैध रिकॉर्डिंग के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी में सहायक प्रोफेसर भर्ती को मंज़ूरी दी, हाईकोर्ट की रोक को खारिज

हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को डीए विवाद में आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की माँग की

MP हाईकोर्ट ने निचली अदालत के लैंगिक पक्षपात भरे तर्क को कड़ी निंदा की, मामला नया सुनवाई के लिए वापस भेजा

दिल्ली हाईकोर्ट ने रिलायंस को कैंपा एनर्जी ड्रिंक टैग पर मिली अस्थायी मंजूरी
ताज़ा ख़बरें
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने ईसीआई से पूछा: यदि मतदाता सूची से नागरिकों को हटाया जा रहा है तो SIR का क्या उद्देश्य?
- पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, हाईकोर्ट के सीबीआई जांच आदेश को चुनौती
- कांग्रेस ने ओबीसी के लिए एससी‑एसटि मॉडल सुरक्षा कानून की माँग की, लखनऊ में प्रदर्शन
- पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के CBI जांच आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
- दिल्ली हाई कोर्ट ने MCD‑NDMC को कुत्ता नियंत्रण कर्मियों के प्रशिक्षण शिविर और तेज़ निवारण का आदेश दिया
- 20 लाख की संपत्ति विवाद में निचली अदालत का आदेश रद्द, नई सुनवाई को निर्देश
- साफ इरादे से न्यायालय में आएँ, तथ्य छुपाने पर अंतरिम राहत रद्द – शिमला के निजी होटल के लीजधारक को नहीं मिला समर्थन
- राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में 1.15 करोड़ जमा किए, बाकी भुगतान का भरोसा दिया

