सोनपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जागरूकता शिविर, सुलहनीय मामलों के त्वरित निपटारे की अपील
शिविर का उद्देश्य आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक सुलहनीय मामलों को प्रस्तुत करना और अधिवक्ताओं, पुलिस व न्यायालय कर्मियों से समझौता योग्य मामलों की पहचान कर सूचीबद्ध करने का अनुरोध करना था। अतिरिक्त बेंच के गठन से आपराधिक मामलों का शीघ्र निष्पादन संभव होगा, जिससे कानूनी प्रक्रिया तेज, खर्च कम और पक्षकारों के आपसी संबंध बेहतर रहेंगे।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
- Hindi News
- Local
- Bihar
- Saran
- Chhapra
- Awareness Camp On National Lok Adalat
राष्ट्रीय लोक अदालत को ले जागरूकता शिविर
- कॉपी लिंक
सोनपुर के अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय परिसर में बुधवार को राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर का उद्देश्य आगामी शनिवार को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक सुलहनीय मामलों को भेजना और त्वरित निपटारे के ल
कार्यक्रम का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सारण के अध्यक्ष अनंत कुमार के निर्देश पर किया गया। अध्यक्षता प्राधिकार के सचिव राजीव कुमार ने की। शिविर में अधिवक्ताओं, पुलिस पदाधिकारियों और न्यायालय कर्मियों से अपील की गई कि वे समझौता योग्य मामलों की पहचान कर उन्हें लोक अदालत में सूचीबद्ध कराएं।राजीव कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का प्रभावी मंच है। उन्होंने सुलहनीय आपराधिक मामलों, दीवानी विवाद, बैंक ऋण, मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक और वैवाहिक विवाद, बिजली तथा माप-तौल से जुड़े मामलों को लोक अदालत में लाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस बार समझौता योग्य आपराधिक मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए एक अतिरिक्त बेंच का गठन किया गया है।
इससे अधिक मामलों की सुनवाई और तेजी से निपटारा संभव होगा।शिविर में मौजूद न्यायिक पदाधिकारियों ने कहा कि लोक अदालत में निपटारे से लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है। पक्षकारों का समय और खर्च कम होता है। सहमति से विवाद खत्म होने पर आपसी संबंध भी बेहतर रहते हैं। लोक अदालत का फैसला अंतिम माना जाता है और सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता।
कार्यक्रम में अनुराग मिश्रा, गजाला तंजीम और डॉ. नवल कुमार सिंह सहित न्यायालय से जुड़े अधिकारी, अधिवक्ता और अन्य हितधारक उपस्थित रहे। अंत में सभी से अपील की गई कि अधिक से अधिक सुलहनीय मामलों को शनिवार की राष्ट्रीय लोक अदालत में भेजा जाए।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
12 सितंबर को जशपुर में लोक अदालत का आयोजन, राजीनामे से निपटारा

सुप्रीम कोर्ट ने मां के पैर छूकर माफी मांगे: बेटे ने माता‑पिता की संपत्ति हड़पने की कोशिश की

दिल्ली हाई कोर्ट ने अदालतों में कमजोर वाई‑फाई पर सख्त कार्रवाई: 4 हफ्ते में रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई पर राष्ट्रीय खेल गवर्नेंस एक्ट लागू करने का सवाल उठाया

कनिष्ठ वकीलों का संघर्ष और बीसीआई में नियामक खामी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सभी को समान न्याय – राहुल गांधी के मानहानि मामले में सुनवाई में देरी पर टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: सीट‑बेल्ट नियमों का पालन एजेंसियों की ज़िम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने BCCI को राष्ट्रीय खेल अधिनियम 2025 के दायरे में न आने की वजह मांगी
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने पुष्टि की, सीट बेल्ट अनिवार्यता का कानून पर्याप्त, प्रवर्तन पर है ज़िम्मेदारी
- विनेश फोगाट का कुश्ती महासंघ पर मुकदमा, महिला ट्रायल में भाग लेने की माँग
- नेशनल लोक अदालत: मिनटों में केस निपटेंगे, दिल्ली में 10 अक्टूबर, बाकी राज्यों में 12 सितंबर
- नैनीताल हाईकोर्ट में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा: सीट‑बेल्ट पहनना अनिवार्य, प्रवर्तन एजेंसियों की है मुख्य जिम्मेदारी
- विदेशी ड्राइविंग लाइसेंस को भारतीय प्राधिकरण की स्वीकृति बिना नहीं मान्य – पी एंड एच हाई कोर्ट का फ़ैसला
- सेट‑बेल्ट उपयोग को अनिवार्य बनाना, सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन एजेंसियों पर जिम्मेदारी थोपी
- सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार के अपवाद पर फैसला सुनने की दिशा में कदम बढ़ाया, पति के खिलाफ अभियोजन की कानूनी जाँच

