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सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार के अपवाद पर फैसला सुनने की दिशा में कदम बढ़ाया, पति के खिलाफ अभियोजन की कानूनी जाँच

न्यायपीठ ने प्रश्न उठाए कि जब तक वैवाहिक बलात्कार अपवाद की संवैधानिक वैधता तय नहीं होती, तब तक पति पर बलात्कार का मुकदमा कैसे चलाया जा सकता है। यह मुद्दा IPC धारा 375 के अपवाद-2 और 2023 के नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों से जुड़ा है। केंद्र ने 2024 में इस अपवाद को हटाने के विरोध में हलफनामे दाखिल किए थे।

10 सितंबर 2026 को 04:05 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार के अपवाद पर फैसला सुनने की दिशा में कदम बढ़ाया, पति के खिलाफ अभियोजन की कानूनी जाँच

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com

मैरिटल रेप का मुद्दा एक बार फिर से छिड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट में एक मामला पहुंचा है, जिसमें पत्नी ने पति पर वैवाहिक बलात्कार का आरोप लगाया है। इस पर कोर्ट में सवाल उठा है कि क्या पति पर रेप का केस चलाया जा सकता है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वैवाहिक बलात्कार (मैरिटल रेप) से जुड़े कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई 3 हफ्ते बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब कानून में वैवाहिक बलात्कार का अपवाद मौजूद है तो पत्नी के साथ बलात्कार के आरोप में पति पर मुकदमा कैसे चलाया जा सकता है?

कब चलाया जा सकता है मुकदमा?

पीठ ने पूछा कि जब तक वैवाहिक बलात्कार अपवाद ( Marital Rape Exception) की संवैधानिक वैधता पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक किसी पति के खिलाफ पत्नी के साथ बलात्कार के आरोप में अभियोजन कैसे चलाया जा सकता है। यह सवाल कर्नाटक हाई कोर्ट के उस फैसले के संदर्भ में उठा, जिसमें कहा गया था कि वैवाहिक बलात्कार के मामले में पति को कानून के तहत पूरी छूट हासिल नहीं है। पत्नी की इच्छा के खिलाफ यौन संबंध बनाने पर उसके खिलाफ बलात्कार का मुकदमा चलाया जा सकता है।

किस धारा में मौजूद है अपवाद?

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सवाल किया कि जब तक सुप्रीम कोर्ट अपवाद की संवैधानिक वैधता पर फैसला नहीं करता, तब तक क्या अभियोजन की अनुमति दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि कोर्ट पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या अभियोजक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चला सकता है, जब IPC की धारा 375 में स्पष्ट रूप से अपवाद मौजूद था।

IPC की जगह अब BNS लागू

मामला IPC की धारा 375 के अपवाद- 2 से जुड़ा है। अब IPC की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 लागू है। इसमें भी विवाहित महिला से संबंधित यौन संबंध को लेकर समान प्रावधान है, यदि पत्नी 18 साल से कम उम्र की नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतिम सुनवाई में 2 प्रमुख सवालों पर विचार होगा। पहला, यदि वैवाहिक बलात्कार अपवाद बरकरार रहता है तो क्या पति के खिलाफ अभियोजन जारी रखा जा सकता है। दूसरा, क्या यह अपवाद ही संवैधानिक रूप से कायम रह सकता है।

केंद्र ने अपराध बनाने का किया था विरोध

केंद्र ने 2024 में दाखिल हलफनामे में वैवाहिक बलात्कार को अपराध बनाने का विरोध किया था। उसका कहना था कि विवाहित महिलाओं को यौन हिंसा से बचाने के लिए मौजूदा कानूनों में पर्याप्त वैकल्पिक उपाय है। केंद्र के मुताबिक, विवाह संस्था के भीतर बलात्कार का अपराध लागू करना अत्यधिक कठोर और असंगत हो सकता है। उसने इसे मुख्य रूप से सामाजिक, विधायी नीति का विषय बताया था।

लेखक के बारे मेंअक्षय श्रीवास्तवअक्षय श्रीवास्तव, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मार्च 2025 में उन्होंने टाइम्स समूह का डिजिटल विंग नवभारत टाइम्स (NBT Digital) ज्वाइन किया। यहां अक्षय न्यूज टीम का हिस्सा हैं और राष्ट्रीय खबरों के साथ-साथ दिल्ली और अपराध से जुड़े समाचारों का संपादन और क्यूरेशन करते हैं। समय-समय पर वह फील्ड रिपोर्टिंग में भी उतरते हैं। अक्षय ग्राउंड पर जाकर खबरों के पीछे छिपी कहानी को निकालने में रुचि रखते हैं। अपने 13 साल के पत्रकारिता के अनुभव में अक्षय ने रिपोर्टिंग के साथ-साथ डेस्क पर भी कई जिम्मेदारियां संभाली हैं। अक्षय ने साल 2019 और 2024 की राजनीति के निर्णायक लोकसभा चुनाव भी कवर किए हैं।

करियर के दौरान अक्षय ने प्रिंट मीडिया में एक लंबी पारी खत्म कर साल 2018 में डिजिटल मीडिया में कदम रखा। यहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता का शुरुआती काम सीखा। इसके बाद वह दैनिक भास्कर के डिजिटल सेक्शन में काम करने लगे। यहां उन्होंने जीके सेक्शन की जिम्मेदारी संभाली। आज तक में कार्य के दौरान अक्षय ने कनमैलियों पर एक एक्सक्लूसिव स्टोरी की, जो चर्चा का विषय रही। नवभारत टाइम्स में वह कफ सिरप पीकर अपने बच्चे गंवाने वाले परिवारों तक पहुंचे और उनका दर्द जाना।

पत्रकारिता का अनुभव

अक्षय का पत्रकारिता करियर हिंदी अखबार दैनिक नव भारत भोपाल के साथ साल 2013 में बतौर ट्रेनी शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश से प्रकाशित राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर में 2014 से 2016 तक उप-संपादक के रूप में कार्य किया। 2016 से 2018 तक अक्षय ने दैनिक हरिभूमि समाचार पत्र में बतौर उप-संपादक काम किया। साल 2018 में दैनिक भास्कर के साथ उन्होंने डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद जनवरी 2022 में AajTak डिजिटल के साथ जुड़े और मार्च 2015 तक होम पेज पर अपनी सेवाएं दीं।

अक्षय ने एशिया के पहले पत्रकारिता विश्वविद्यालय माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से बीएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) और एमएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) की पढ़ाई की है। विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान वह कई प्रतियोगताओं में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके हैं।... और पढ़ें

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