सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सभी को समान न्याय – राहुल गांधी के मानहानि मामले में सुनवाई में देरी पर टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के मानहानि मामले की सुनवाई में देरी की शिकायत पर कहा कि सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है। कोर्ट ने इस याचिका को अन्य दो मानहानि मामलों के साथ जोड़ते हुए जल्द सुनवाई की व्यवस्था की और अप्रैल 22 को सूचीबद्ध किया था। शिकायतकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता ने इसे अलग सुनवाई की मांग की।

सौजन्य से:- jagran.com
'सभी के साथ समान व्यवहार होता है', राहुल के खिलाफ मामले की सुनवाई में देरी पर बोला सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई में देरी की शिकायत पर कहा कि सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है।
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई में देरी की शिकायत पर कहा कि ‘सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है।'
न्यायालय ने यह टिप्पणी तब की जब मानहानि मामले में शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि राहुल गांधी के खिलाफ दायर मामले को लंबे समय से शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट राहुल गांधी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के पिछले साल 29 मई के आदेश को चुनौती दी है।
हाई कोर्ट ने राहुल गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अधीनस्थ अदालत के समन आदेश को चुनौती दी थी। यह मामला 2022 की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान भारतीय सेना के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से संबंधित है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल चार अगस्त को लखनऊ की अदालत में इस मामले की आगे की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी थी।
चार दिसंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की अपील को स्वीकार करते हुए कहा था कि वह मामले पर विस्तार से सुनवाई करेगा। इसके बाद मामले को 22 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
बुधवार को एक अन्य मानहानि मामले से जुड़ी दो अलग-अलग लंबित याचिकाओं में जल्द सुनवाई की मांग वाली अर्जियां प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थीं। इन दोनों याचिकाओं को इसके पहले गांधी की याचिका के साथ जोड़ दिया गया था।
शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि मामले पर सुनवाई की जाए और इसे उन दो अलग-अलग याचिकाओं से अलग किया जाए।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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