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दिल्ली हाई कोर्ट ने अदालतों में कमजोर वाई‑फाई पर सख्त कार्रवाई: 4 हफ्ते में रिपोर्ट मांगी

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय की पीठ ने अदालत प्रशासन से चार सप्ताह के भीतर वाई‑फाई और मोबाइल नेटवर्क की स्थिति पर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। ई‑फाइलिंग, हाइब्रिड सुनवाई के लिए विश्वसनीय कनेक्टिविटी अनिवार्य होने के बावजूद कई कोर्ट में सुविधा कमजोर है, और न्यायिक कार्यवाही प्रभावित हो रही है।

9 सितंबर 2026 को 10:04 pm बजे
दिल्ली हाई कोर्ट ने अदालतों में कमजोर वाई‑फाई पर सख्त कार्रवाई: 4 हफ्ते में रिपोर्ट मांगी

सौजन्य से:- Jagran

अदालत परिसर में कमजोर Wi-Fi और मोबाइल नेटवर्क पर दिल्ली HC सख्त, 4 हफ्ते में कोर्ट प्रशासन से रिपोर्ट तलब

दिल्ली हाई कोर्ट ने कोर्ट परिसर में कमजोर वाई-फाई और मोबाइल नेटवर्क सुविधाओं पर अपने प्रशासन से चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।

HighLights

- हाई कोर्ट ने कमजोर वाई-फाई, मोबाइल नेटवर्क पर रिपोर्ट मांगी।

- चार सप्ताह में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

- ई-फाइलिंग, हाइब्रिड सुनवाई के लिए कनेक्टिविटी आवश्यक।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। हाई कोर्ट परिसर से लेकर विभिन्न जिला अदालतों में वाई-फाई और मोबाइल नेटवर्क सुविधाओं पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने प्रशासन से जवाब मांगा।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने हाई कोर्ट प्रशासन को चार सप्ताह के अंदर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

पीठ ने उक्त निर्देश हाई कोर्ट व ट्रायल कोर्ट के अंदर और कोर्ट परिसर में बिना रुकावट वाले मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट या वाई-फाई कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर दिया।

अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी

अदालत ने हाई कोर्ट प्रशासन की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता को स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने को कहा कि ट्रायल कोर्ट में वाई-फाई और मोबाइल नेटवर्क सुविधाएं सुनिश्चित करने में आ रही कमियों और उन्हें कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। मामले में अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी।

प्रत्येक अदालत का टेक्निकल ऑडिट

याचिकाकर्ता शानू बघेल ने याचिका में कहा कि ई-फाइलिंग, इलेक्ट्रानिक रिकार्ड, वीडियो-कान्फ्रेंसिंग और हाइब्रिड सुनवाई के मौजूदा दौर में इंटरनेट कनेक्टिविटी सिर्फ सुविधा की बात नहीं, बल्कि न्याय के बुनियादी ढांचे का एक जरूरी हिस्सा बन गई है।

उन्होंने कहा कि ऐसे में प्रत्येक अदालत का टेक्निकल ऑडिट कराया जाए, ताकि उन जगहों की पहचान की जा सके जहां मोबाइल नेटवर्क या वाई-फाई कनेक्टिविटी नहीं है या कमजोर है।

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