सुप्रीम कोर्ट ने BCCI को राष्ट्रीय खेल अधिनियम 2025 के दायरे में न आने की वजह मांगी
न्यायालय ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड और राज्य संघों से पूछताछ की कि वे राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 के तहत क्यों नहीं आएँगे, तथा उनके पदाधिकारियों की सेवा शर्तों को इस अधिनियम के अनुरूप बनाने की दिशा में निर्देश लेने को कहा। यह सुनवाई 2014 में दाखिल याचिका के तहत चल रही है, जिसमें पहले लोधा समिति द्वारा सुझाए सुधार और 2022 में मंजूर किए गए संविधान संशोधन, जिसमें 12‑साल की कार्यकाल सीमा और तीन साल का अनिवार्य ब्रेक शामिल है, पर भी चर्चा हुई।

सौजन्य से:- Jagran
BCCI पर क्यों नहीं लागू हो सकता खेल कानून? सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेट बोर्ड से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई और प्रदेश क्रिकेट संघों से पूछा है कि वे राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 के दायरे ...और पढ़ें
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पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) और प्रदेश क्रिकेट संघों से पूछा है कि वे राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 के दायरे में क्यो नहीं आ सकते। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और वी मोहना ने मंगलवार को बीसीसीआई के मामले में कुछ क्रिकेट इकाइयों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही।
पीठ ने बीसीसीआई और प्रदेश संघों के वकीलों से यह भी कहा कि वे इस बारे में निर्देश लें कि उनके पदाधिकारियों की सेवा की शर्तें 2025 के उस अधिनियम के तहत क्यो नहीं आनी चाहिए, जो अब लागू हो चुका है। न्यायालय 2014 में दायर बीसीसीआई से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है और समय समय पर इस मामले में कई आवेदन दाखिल हो चुके हैं।
लोढ़ा समिति का किया था गठन
इससे पहले न्यायालय ने सुधार के उपाय सुझाने के लिए पूर्व सीजेआई जस्टिस आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। समिति को दी गई जिम्मेदारियों में बीसीसीआई के लिए संविधान तैयार करना भी शामिल था। न्यायालय ने बीसीसीआई के ढांचे, संगठन और कामकाज में सुधार से जुड़ी समिति की अनुशंसाओं को स्वीकार कर लिया था।
BCCI के संविधान में बदलाव की मिली थी मंजूरी
न्यायालय ने सितंबर 2022 में बीसीसीआई के संविधान में बदलाव की मंजूरी दी थी और कहा था कि कोई पदाधिकारी लगातार 12 साल तक पद पर रह सकता है। इसमें तीन साल के ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ (अनिवार्य ब्रेक) से पहले राज्य संघ में छह साल और बीसीसीआई में छह साल का कार्यकाल शामिल है।
इसमें कहा गया था कि कोई पदाधिकारी किसी पद पर लगातार दो कार्यकाल पूरे कर सकता है जिसमें बीसीसीआई और प्रदेश संघ स्तर पर कार्यकाल शामिल है। इसके बाद उसे तीन साल का अनिवार्य ब्रेक लेना होगा।
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