होमवकीलसुप्रीम कोर्ट ने BCCI और राज्य क्रिकेट संघों से पूछा: राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम के दायरे में क्यों नहीं?
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सुप्रीम कोर्ट ने BCCI और राज्य क्रिकेट संघों से पूछा: राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम के दायरे में क्यों नहीं?

न्यायिक पीठ ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और सभी राज्य क्रिकेट संघों को इस बात का जवाब माँगा है कि उन्हें 2025 के राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम के अंतर्गत क्यों नहीं लाया जाना चाहिए। साथ ही पदाधिकारियों के कार्यकाल और सेवा शर्तों को भी इस कानून के तहत लाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया। यह मामला 2014 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

9 सितंबर 2026 को 10:05 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने BCCI और राज्य क्रिकेट संघों से पूछा: राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम के दायरे में क्यों नहीं?

सौजन्य से:- Amar Ujala

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राष्ट्रीय खेल शासन कानून: बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघ इसके दायरे से बाहर क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा सवाल

Wed, 09 Sep 2026 01:59 PM IST

पवन पांडेय

पीटीआई, नई दिल्ली

पीटीआई, नई दिल्ली

Published by: पवन पांडेय

Updated Wed, 09 Sep 2026 01:59 PM IST

सार

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों से पूछा है कि उन्हें राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए। अदालत ने पदाधिकारियों के कार्यकाल और सेवा शर्तों को भी नए कानून के तहत लाने पर जवाब मांगा है। बीसीसीआई से जुड़े सुधारों का मामला 2014 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

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विस्तार

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सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और सभी राज्य क्रिकेट संघों से पूछा है कि उन्हें राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए। अदालत ने बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों के पदाधिकारियों की सेवा शर्तों को भी इस कानून के तहत लाने को लेकर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को बीसीसीआई से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। यह मामला 2014 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और समय-समय पर इससे जुड़े अलग-अलग आवेदन अदालत के सामने आते रहे हैं।

यह भी पढ़ें- ब्रिक्स 2026: जब दुनिया संकट में थी, भारत ने दिखाया रास्ता; अब यूपीआई-एनडीबी से ग्लोबल सिस्टम बदलने की तैयारी

बीसीसीआई और राज्य संघों से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों की ओर से पेश वकीलों से निर्देश लेकर यह बताने को कहा कि उनके पदाधिकारियों के कार्यकाल और सेवा की शर्तें 2025 में लागू हुए राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम के तहत क्यों नहीं होनी चाहिए। अदालत के इस सवाल से यह मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है कि देश में क्रिकेट का संचालन करने वाली संस्था बीसीसीआई और उसके राज्य संघों पर नए खेल शासन कानून के प्रावधान किस तरह लागू होंगे।

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2014 से चल रहा है मामला

सुप्रीम कोर्ट में बीसीसीआई के कामकाज और उसमें सुधार से जुड़ी याचिका वर्ष 2014 से चल रही है। इस मामले में अदालत ने क्रिकेट प्रशासन में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। समिति को बीसीसीआई में सुधार के उपाय सुझाने और क्रिकेट बोर्ड के लिए नए संविधान का प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए बीसीसीआई की संरचना, संगठन और कामकाज में सुधार के लिए कई प्रावधान लागू किए।

पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर भी नियम

बीसीसीआई के पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2022 में अपने पहले के आदेश में बदलाव की अनुमति दी थी। इसके तहत किसी पदाधिकारी को राज्य क्रिकेट संघ और बीसीसीआई में लगातार कुल 12 साल तक पद पर रहने की अनुमति दी गई थी। इस व्यवस्था में पदाधिकारी राज्य क्रिकेट संघ में छह साल और बीसीसीआई में छह साल तक लगातार कार्य कर सकता है। इसके बाद तीन साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड यानी पद से बाहर रहने की अवधि लागू होती है। अदालत ने यह भी कहा था कि कोई पदाधिकारी बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघ, दोनों स्तरों पर किसी विशेष पद पर लगातार दो कार्यकाल पूरा कर सकता है। इसके बाद उसे तीन साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड पूरा करना होगा।

यह भी पढ़ें- गुजरात: सूरत के बहुमंजिला कपड़ा बाजार में भीषण आग, 12 से ज्यादा दुकानें क्षतिग्रस्त; दमकलकर्मी घायल

पहले क्या था नियम?

बीसीसीआई के उस संविधान में, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पहले मंजूरी दी थी, लगातार दो तीन-तीन साल के कार्यकाल पूरे करने वाले पदाधिकारी के लिए तीन साल का अनिवार्य कूलिंग-ऑफ पीरियड रखा गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के सामने यह सवाल है कि 2025 में लागू राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम के प्रावधान बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों पर किस हद तक लागू होंगे। अदालत ने संबंधित पक्षों से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब मांगा है।

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बीसीसीआई और राज्य संघों से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों की ओर से पेश वकीलों से निर्देश लेकर यह बताने को कहा कि उनके पदाधिकारियों के कार्यकाल और सेवा की शर्तें 2025 में लागू हुए राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम के तहत क्यों नहीं होनी चाहिए। अदालत के इस सवाल से यह मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है कि देश में क्रिकेट का संचालन करने वाली संस्था बीसीसीआई और उसके राज्य संघों पर नए खेल शासन कानून के प्रावधान किस तरह लागू होंगे।

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2014 से चल रहा है मामला

सुप्रीम कोर्ट में बीसीसीआई के कामकाज और उसमें सुधार से जुड़ी याचिका वर्ष 2014 से चल रही है। इस मामले में अदालत ने क्रिकेट प्रशासन में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। समिति को बीसीसीआई में सुधार के उपाय सुझाने और क्रिकेट बोर्ड के लिए नए संविधान का प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए बीसीसीआई की संरचना, संगठन और कामकाज में सुधार के लिए कई प्रावधान लागू किए।

पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर भी नियम

बीसीसीआई के पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2022 में अपने पहले के आदेश में बदलाव की अनुमति दी थी। इसके तहत किसी पदाधिकारी को राज्य क्रिकेट संघ और बीसीसीआई में लगातार कुल 12 साल तक पद पर रहने की अनुमति दी गई थी। इस व्यवस्था में पदाधिकारी राज्य क्रिकेट संघ में छह साल और बीसीसीआई में छह साल तक लगातार कार्य कर सकता है। इसके बाद तीन साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड यानी पद से बाहर रहने की अवधि लागू होती है। अदालत ने यह भी कहा था कि कोई पदाधिकारी बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघ, दोनों स्तरों पर किसी विशेष पद पर लगातार दो कार्यकाल पूरा कर सकता है। इसके बाद उसे तीन साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड पूरा करना होगा।

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पहले क्या था नियम?

बीसीसीआई के उस संविधान में, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पहले मंजूरी दी थी, लगातार दो तीन-तीन साल के कार्यकाल पूरे करने वाले पदाधिकारी के लिए तीन साल का अनिवार्य कूलिंग-ऑफ पीरियड रखा गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के सामने यह सवाल है कि 2025 में लागू राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम के प्रावधान बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों पर किस हद तक लागू होंगे। अदालत ने संबंधित पक्षों से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब मांगा है।

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