सुप्रीम कोर्ट ने योग्यता‑बिना शिक्षकों की नियुक्ति पर अंतरिम रोक, RTE‑NCTE‑UGC मानकों को अनिवार्य किया
अदालत ने असम के स्कूलों‑कॉलेजों में प्रांतीयकरण योजना के तहत नई नियुक्तियों या समायोजन पर रोक लगाते हुए कहा कि केवल RTE, NCTE और UGC के निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले ही शिक्षक को पद दिया जा सकता है। यह आदेश जनहित याचिका के आधार पर जारी किया गया है, जिससे वैध योग्यता के बिना नियुक्तियों को रोका गया है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने देश के स्कूलों और कॉलेजों में निर्धारित योग्यता के बिना शिक्षकों की नियुक्ति या समायोजन पर अंतरिम रोक लगा दी है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा है कि निर्धारित वैधानिक योग्यता पूरी किए बिना किसी शिक्षक की नियुक्ति या सेवा जारी नहीं रखी जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों के पास संबंधित कानूनों के तहत निर्धारित आवश्यक योग्यता होना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को असम सरकार को बड़ा निर्देश देते हुए राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में प्रांतीयकरण योजना के तहत शिक्षकों की नई नियुक्ति या समायोजन पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि मामले पर आगे विचार होने तक इस वैधानिक व्यवस्था के तहत किसी शिक्षक को नियुक्त या सरकारी सेवा में समायोजित नहीं किया जाए।
बेंच ने आदेश में कही ये बात
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने अंतरिम आदेश में कहा कि राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) एक्ट और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) एक्ट के तहत निर्धारित योग्यता रखने वाले व्यक्ति को ही स्कूल या कॉलेज में शिक्षक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।
अदालत ने दिया आदेश
अदालत ने आदेश दिया कि अंतरिम उपाय के तौर पर, RTE Act/NCTE Act/UGC Act के तहत निर्धारित आवश्यक योग्यता रखने वाले व्यक्ति के अलावा किसी शिक्षक की स्कूलों/कॉलेजों में नियुक्ति या समायोजन नहीं किया जाएगा। यह अंतरिम निर्देश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिका में उन वैधानिक योजनाओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है, जिनके तहत शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवाओं का प्रांतीयकरण ( provincialisation ) किया जाता है।
सिद्धांतों के विपरीत ये व्यवस्था
याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क है कि इन योजनाओं के जरिए ऐसे शिक्षकों और कर्मचारियों को नियमित सरकारी सेवा में प्रवेश मिल सकता है, जिन्हें निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता। याचिका में इस व्यवस्था को संविधान के समानता और सरकारी रोजगार में समान अवसर के सिद्धांतों के विपरीत बताया गया है।
SC ने संबंधित पक्षों को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए मामले की आगे सुनवाई तय की है। अदालत का अंतरिम आदेश फिलहाल शिक्षकों की नियुक्ति और सेवा में बने रहने के लिए निर्धारित वैधानिक योग्यताओं को अनिवार्य करता है।
लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी, नवभारत टाइम्स में लीगल एडिटर हैं। वह 22 साल से भी ज्यादा वर्षों से लीगल रिपोर्टिंग कर रहे हैं। शुरुआत में वह दिल्ली की निचली अदालत और सीबीआई कवर करते थे और बाद में वह दिल्ली हाई कोर्ट और फिर लगातार डेढ़ दशक से सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे हैं। इस दौरान राजेश ने देश के तमाम हाई प्रोफाइल केस नीतीश कटारा मर्डर केस, जेसिक लाल केस, बोफोर्स केस, उपहार केस, पार्लियामेंट अटैक केस, प्रिय दर्शनी मट्टू केस से लेकर तमाम संवैधानिक मसले कवर किए जिनमें अनुच्छेद-370, तीन तलाक, निजता का अधिकार, होमो सेक्सुअलिटी को अपराध से बाहर करने का मामला और राम मंदिर मसले अहम है। राजेश ने इस 22 साल के करियर के दौरान दो साल 2006 से लेकर 2007 के सितंबर तक सहारा समय टीवी चैनल में भी बतौर लीगल संवावददाता काम किया। इसके बाद दोबारा वह नवभारत टाइम्स आए और उसके बाद लगातार कानूनी अफेयर्स को कवर करते रहे। नेशनल ब्यूरो में रहते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्रालय को कवर करने के साथ साथ कानून के विषय पर लगातार एडिट पेज पर लिख रहे हैं। साथ ही लगातार ऑनलाइन माध्यम के लिए भी सक्रिय रिपोर्टिंग करते रहे हैं और ..कोर्ट रूम..नाम के एक साप्ताहिक विडियो इंटरव्यू भी लगातार देते हैं जिनमें सप्ताह भर के मुख्य कानूनी मसले पर उनका साक्षात्कार प्रसारित होता है। इसके अलावा वह लगातार लीगल मसले पर लीगल फोरम नामक कॉलम भी लिखते रहे हैं। उन्होंने दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी किया है। साथ ही उन्होंने जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया और एलएलबी भी कर रखा है।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Legalकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने रेणुका हत्या मामले में 'प्रक्रियात्मक विपथन' के कारण क्षमादान को रद्द किया

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को दी सख़्त चेतावनी: यौन उत्पीड़न पीड़िता की पहचान उजागर करना दंडनीय

सत्य निकेतन ध्वंस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भवन सुरक्षा की सम्पूर्ण समीक्षा और केस को दिल्ली HC से स्थानांतरण पर विचार किया

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शरिया संस्थान के तलाक आदेश को रद्द, कहा धर्मिक निकाय नहीं बन सकते अदालत

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कोडा इंडिया के ₹100 करोड़ फ्रीज को निरस्त किया

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक मानवाधिकार न्यायालय नियम 6 को वैध बताया, आयोग की स्वीकृति अनिवार्य नहीं

सुप्रीम कोर्ट में याचिका ने उजागर किया, पुलिस ने छात्र विरोध में हिंसक व्यक्तियों को घुसपैठ की अनुमति

गौहाटी हाई कोर्ट ने बेगम के पति को 2 लाख की अंतरिम रियायत देने का आदेश दिया
ताज़ा ख़बरें
- सत्य निकेतन इमारत दुर्घटना: 10 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, संभव है दिल्ली HC से केस का ट्रांसफ़र
- केंद्र ने अनिल अंबानी के आरकॉम ऋण धोखाधड़ी के मामलों को दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने हेतु सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
- हाईकोर्ट ने निजी धार्मिक संगठनों को शरिया कोर्ट का दर्जा नहीं मान्यता दी
- इल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने इत्तेहाद‑ए‑मिल्लत काउंसिल अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज, 'सर‑तन‑से‑जुदा' नारे को राष्ट्रीय एकता की चुनौती माना
- सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद पर डॉक्टर‑हिंसा केस में जमानत पर कड़ी चेतावनी दी
- सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा को कड़ा संदेश: नेताओं को जवाबदेह ठहराया
- सुप्रीम कोर्ट ने 3‑महीने की सीमा तय की, फिर फैसला देने में दो साल लगाए
- SCBA अध्यक्ष प्रदीप राय ने सुप्रीम कोर्ट को दिया पूर्ण सहयोग का आश्वासन, CJI सूर्यकांत ने बार‑बेंच को ‘सह‑उत्तराधिकारी’ कहा

