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SCBA अध्यक्ष प्रदीप राय ने सुप्रीम कोर्ट को दिया पूर्ण सहयोग का आश्वासन, CJI सूर्यकांत ने बार‑बेंच को ‘सह‑उत्तराधिकारी’ कहा

SCBA के नए अध्यक्ष प्रदीप राय ने सुप्रीम कोर्ट को सहयोग का आश्वासन दिया, जबकि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बार‑बेंच को सह‑उत्तराधिकारी कह कर साझा जिम्मेदारी पर बल दिया।

8 सितंबर 2026 को 06:24 pm बजे
SCBA अध्यक्ष प्रदीप राय ने सुप्रीम कोर्ट को दिया पूर्ण सहयोग का आश्वासन, CJI सूर्यकांत ने बार‑बेंच को ‘सह‑उत्तराधिकारी’ कहा

SCBA (Supreme Court Bar Association) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष तथा वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने सुप्रीम कोर्ट को बार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। इस घोषणा के दौरान उन्होंने कहा कि वकालत समुदाय न्यायपालिका के सुचारु कार्य में हरसंभव मदद करेगा और अदालत के साथ संवाद को मजबूत करेगा।
सूत्र: SCBA अध्यक्ष के बयान के अनुसार, यह सहयोग न केवल केस‑फाइलिंग और सुनवाई की प्रक्रिया को तेज़ करेगा बल्कि न्यायिक आदेशों की कार्यान्वयन में भी सहायक रहेगा।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने इस अवसर पर बार‑बेंच संबंधों को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया, "हम सभी सह‑उत्तराधिकारी हैं" कहकर दोनों संस्थानों की साझा भूमिका को रेखांकित किया। यह टिप्पणी भारतीय न्यायिक प्रणाली में बार के संवैधानिक स्थान को उजागर करती है, जहाँ वकील संविधान के अनुच्छेद 145(1) के तहत न्यायालयों के सामने पेश होते हैं और उनका स्वतंत्र पेशा संविधान द्वारा संरक्षित है।
बार‑बेंच समन्वय का महत्व पहले भी कई बार सामने आया है, जैसे 2018 में उच्च न्यायालयों ने वकालत समुदाय के साथ मिलकर केस‑डिस्पोज़ल प्रणाली को सुधारने के लिए कार्यशालाएँ आयोजित की थीं।

SCBA का कानूनी आधार बार काउंसिल ऑफ इंडिया एक्ट, 1995 के धारा 35 के तहत है, जो अधिवक्ताओं को अपने पेशेवर हितों की रक्षा के साथ न्यायपालिका के साथ सहयोग करने का दायित्व देता है। इस दायित्व का पालन करने से कोर्ट की कार्यक्षमता में वृद्धि तथा न्याय की तेज़ी से प्राप्ति संभव हो सकती है। साथ ही, CJI का "सह‑उत्तराधिकारी" बयान यह संकेत देता है कि न्यायिक निर्णयों के कार्यान्वयन में वकीलों की भूमिका को सिर्फ प्रतिनिधि नहीं बल्कि सक्रिय साझेदार माना जा रहा है।
यह समन्वय भविष्य में न्यायालय के प्रशासनिक सुधार, केस‑मैनेजमेंट सिस्टम के डिजिटलकरण, और वकालत समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

बार‑बेंच सहयोग का महत्व

बार‑बेंच के बीच इस नए सहयोगी माहौल से न केवल कोर्ट की कार्यप्रणाली में सुधार की उम्मीद है, बल्कि अधिवक्ताओं के पेशेवर अधिकारों की भी मजबूती होगी। न्यायिक प्रक्रिया में तेज़ी और पारदर्शिता लाने के लिए वकीलों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है; इसलिए यह आश्वासन भारतीय न्याय व्यवस्था के भविष्य को अधिक सुगम और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है।

#SCBA#सुप्रीम कोर्ट#बार‑बेंच संबंध#जस्टिस सूर्यकांत#कानूनी सहयोग

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