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दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को दी सख़्त चेतावनी: यौन उत्पीड़न पीड़िता की पहचान उजागर करना दंडनीय

दिल्ली हाई कोर्ट ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा जारी पोश हैंडबुक में यौन उत्पीड़न पीड़िता का नाम प्रकाशित करने पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने बताया कि कानून ऐसी पहचान प्रकट करने को प्रतिबंधित करता है और सरकार को इसका पालन करना अनिवार्य है। केस से जुड़े अधिकारियों के नाम सामने लाते हुए सुनवाई स्थगित कर दी गई।

8 सितंबर 2026 को 03:32 pm बजे
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को दी सख़्त चेतावनी: यौन उत्पीड़न पीड़िता की पहचान उजागर करना दंडनीय

सौजन्य से:- Jagran

'सरकार को भी कानून का पालन करना होगा', यौन उत्पीड़न पीड़िता का नाम उजागर होने पर दिल्ली HC ने लगाई फटकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकार महिला की पहचान उजागर करने पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई है।

HighLights

- कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न पीड़िता की पहचान उजागर।

- दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकारा।

- कानून का पालन करने की सख्त हिदायत दी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकार महिला की पहचान उजागर करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को फटकार लगाई।

मामला महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से जारी पोश हैंडबुक में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकार महिला की पहचान उजागर करने से जुड़ा था।

अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार को भी कानून का पालन करना होगा। कानून यौन अपराध की शिकार महिला की पहचान उजागर करने पर रोक लगाता है और ऐसा करना दंडनीय अपराध है।

अदालत ने उठाए ये सवाल

अदालत ने सवाल उठाया कि हैंडबुक में पीड़िता का नाम कैसे उजागर किया गया? और सरकार ऐसा कैसे कर सकती है? अदालत ने कहा कि सरकार खुद पीड़िता का नाम उजागर करने वाली हैंडबुक प्रकाशित कर रही है और उसे प्रसारित कर रहे हैं।

अदालत ने प्रकाशित सामग्री से जुड़े अधिकारियों का नाम पेश करते हुए सुनवाई स्थगित कर दी। अदालत ने उक्त टिप्पणी आरोपित की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। जिसने कहा था कि मामला अब सुलझ गया है इसलिए हैंडबुक से उसका नाम हटाने का निर्देश दिया जाए।

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