सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा को कड़ा संदेश: नेताओं को जवाबदेह ठहराया
महाराष्ट्र में डॉक्टरों पर हुए हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे कृत्य बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। अदालत ने राजनीतिक नेताओं को चेतावनी दी कि उन्हें इस तरह के आक्रामक व्यवहार को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

सौजन्य से:- Navbharat Times
Supreme Court on Doctor Beaten Issue: महाराष्ट्र में डॉक्टर की पिटाई से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। शीर्ष कोर्ट ने दो टूक कहा कि नेताओं को बताना होगा कि डॉक्टरों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। जान लीजिए पूरा मामला।
अमित आनंद चौधरी, नई दिल्ली: महाराष्ट्र में शिवसेना के एक नेता पर डॉक्टरों के ऊपर हमले के आरोप लगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए कहा कि राज्य में हालात खराब हो गए हैं। शीर्ष अदालत ने नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई का समर्थन किया ताकि यह संदेश दिया जा सके कि मेडिकल प्रैक्टिशनर के साथ ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले में क्या कहा
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा करने वाले लोगों को बिना किसी देरी के गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पालघर में शिवसेना कार्यकर्ताओं की ओर से डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों पर हमले की हालिया घटना सामने आई थी। इसका जिक्र करते हुए बेंच ने कहा कि उन्हें खुलेआम घूमने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
डॉक्टरों की पिटाई से जुड़ा मामला क्या है
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी शिवसेना के कॉर्पोरेटर रमेश सुक्रिया म्हात्रे की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। उन पर जुलाई में डोंबिवली में डॉक्टरों के साथ मारपीट करने का आरोप है। उन्होंने पिछले महीने जमानत देते समय हाई कोर्ट की ओर से उन पर लगाई गई सख्त शर्तों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
मुकुल रोहतगी ने पूरे मामले में दी ये दलील
वहीं अदालत का रुख भांपते हुए सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया। कोर्ट ने याचिका वापस लेने की उनकी अपील मान ली, लेकिन उससे पहले नेताओं की ओर से डॉक्टरों पर हमले की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और कहा कि इसे सही नहीं ठहराया जा सकता। मुकुल रोहतगी ने कहा कि पालघर में हमले के लिए जिम्मेदार लोगों का समूह अलग था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे एक ही पार्टी के थे।
बेंच ने कहा- इसे कैसे सही ठहराया जा सकता है
बेंच ने कहा कि एक ही विचारधारा है। इसे कैसे सही ठहराया जा सकता है कि आप उनके चैंबर में जाकर उन पर हमला करें और बेरहमी से पीटें? यह कानून और व्यवस्था का मामला है। म्हात्रे को 6 जुलाई को डोंबिवली के एक नगर निगम अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट करने के आरोप में जुलाई में गिरफ्तार किया गया था।
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लेखक के बारे मेंरुचिर शुक्लारुचिर शुक्ला, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। फरवरी 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े हैं। वह होमपेज टीम के सदस्य हैं। शिफ्ट देखने के साथ न्यूज स्टोरी लिखने और संपादन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। खबरों के अलग-अलग एंगल से डेवलप करने में माहिर है। करियर की शुरुआत 2011 में न्यूज एजेंसी से की, इस दौरान डेस्क के साथ-साथ रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया। कई अहम खबरों को ब्रेक किया। राजनीतिक, सामाजिक, क्राइम, पॉजिटिव न्यूज में विशेषज्ञता रखते हैं। न्यूज एजेंसी से शुरुआत के बाद टीवी फिर डिजिटल न्यूज टीम का हिस्सा बने। करीब 13 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं।
विशेषज्ञता : रुचिर शुक्ला की पॉलिटिकल खबरों में खास रुचि है। ब्रेकिंग पर नजर रहती है। बड़ी खबरों से जुड़ी इनसाइड स्टोरी, एनालिसिस में भी महारत रखते हैं। क्राइम, पॉजिटिव, सक्सेस स्टोरी के साथ ग्लोबल पॉलिटिकल मुद्दों पर भी निगाहें रहती हैं।
पत्रकारिता का अनुभव : रुचिर शुक्ला ने 2011 में News Point न्यूज एजेंसी से करियर की शुरुआत की, जहां डेस्क के साथ रिपोर्टिंग में हाथ आजमाया। इस दौरान बीजेपी और कांग्रेस बीट को कवर किया। कई खबरें ब्रेक की। इस दौरान पंजाब पुलिस से जुड़ी एक डॉक्यूमेंट्री में भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की। 2012 में मैजिक टीवी न्यूज चैनल से जुड़े। 2013 में इंडिया न्यूज के बिहार-झारखंड चैनल से जुड़े। अप्रैल 2014 में अमर उजाला डिजिटल से जुड़े। इस दौरान होम टीम में कई अहम जिम्मेदारी संभाली। करीब ढाई साल तक अमर उजाला डिजिटल में रहने के बाद अगस्त 2016 में वनइंडिया हिंदी से जुड़े। यहां उन्होंने होम टीम और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान यूपी असेंबली इलेक्शन 2017 को लेकर अहम जिम्मेदारी मिली। वनइंडिया हिंदी में रहते हुए लोकसभा चुनाव 2019 कवर किया। जिसमें कई खास विश्लेषण और स्पेशल स्टोरी की। इसके बाद 2011 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी खास रोल निभाया। फरवरी 2020 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़ने के बाद कई अहम जिम्मेदारियों को संभाला। फिलहाल रुचिर होम पेज और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रुचिर शुक्ला ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से हिंदी ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया है।... और पढ़ें
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