सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद पर डॉक्टर‑हिंसा केस में जमानत पर कड़ी चेतावनी दी
सुप्रीम कोर्ट ने डोंबिवली में डॉक्टरों और स्टाफ पर मारपीट के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत पर सुनवाई की, जहाँ बेंच ने ऐसे हमलों को कानून‑व्यवस्था के लिए गंभीर मुद्दा कह कर आरोपी को सड़कों पर घूमने से रोकने की बात कही। कोर्ट ने उन्हें तीन हफ्ते में जवाब देने का नोटिस जारी किया और बॉम्बे हाईकोर्ट की कड़ी शर्तों को चुनौती देते हुए तेज़ ट्रायल की आवश्यकता पर जोर दिया।

सौजन्य से:- bhaskar.com
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डॉक्टर को मारने वाले शिवसेना पार्षद की जमानत पर सुनवाई:सुप्रीम कोर्ट बोला- हालात बदतर हुए, ऐसे लोग सड़कों पर नहीं घूमना चाहिए
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों से मारपीट के एक केस में सुनवाई की। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा- ऐसे हमले कानून-व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर मुद्दा बन रहे हैं। इन लोगों को सड़कों पर घूमने का हक नहीं है।
मामला डोंबिवली के नगर निगम अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों से शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की मारपीट से जुड़ा है।
अस्पताल में कोई बेड खाली नहीं था। इसलिए डॉक्टरों ने मरीज को दूसरे अस्पताल जाने का। नाराज लोगों ने शिवसेना पार्षद रमेश को अस्पताल बुला लिया, जहां उन्होंने मारपीट की।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें म्हात्रे और अन्य आरोपियों को जमानत देने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।
बेंच ने म्हात्रे और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया है। उन्हें जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई बाद में होगी।
पहले देखें जुलाई में हुई घटना की 4 तस्वीरें…
कोर्ट ने पार्षद के वकील से पूछा- इसे सही कैसे ठहरा सकते हैं
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पालघर में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों पर हुए एक नए हमले का भी जिक्र लिया। बेंच ने कहा, “कल एक और घटना हुई। वही लोग फिर डॉक्टरों पर हमला कर रहे हैं।”
म्हात्रे के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि उन्होंने मामले की जांच की है और पालघर की घटना में शामिल लोग वही नहीं थे। इस पर बेंच ने साफ किया कि वह “विचारधारा” की बात कर रही थी।
बेंच ने सवाल किया कि ऐसे हमलों को सही कैसे ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने कहा, “आप अस्पताल के अंदर जाकर डॉक्टरों और कर्मचारियों पर हमला कैसे कर सकते हैं? उन्हें बेरहमी से कैसे पीट सकते हैं?”
बॉम्बे हाईकोर्ट की शर्तों को चुनौती
सुप्रीम कोर्ट डोंबिवली हमले के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से म्हात्रे को राहत देते समय लगाई गई कड़ी शर्तों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि जांच और ट्रायल जल्दी पूरा करने के हाईकोर्ट के निर्देशों से ऐसा लगता है कि मामले में पहले ही फैसला मान लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि जल्दी ट्रायल पर आपत्ति को लेकर सवाल किया और कहा, “एक संदेश जाना जरूरी है।”
बेंच ने इससे पहले संकेत दिया था कि वह डोंबिवली में 6 जुलाई को हुए हमले के मामले में म्हात्रे की जमानत रद्द करने पर विचार कर रही है। इसके बाद म्हात्रे ने कड़ी जमानत शर्तों को चुनौती देने वाली अपनी अपील वापस ले ली।
डॉक्टर बोले- गुंडे नजर रख रहे हैं, अब कभी नहीं लौटूंगा
पीड़ित डॉक्टर ने मीडिया से कहा, ‘ मैं घटना के बाद खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा हूं। इसलिए मैंने इस्तीफा दे दिया है और ठाणे छोड़ दिया है।’
डॉक्टर ने कहा, ‘यहां बहुत डर का माहौल है। गुंडे नजर रख रहे हैं। दूसरे डॉक्टर काम करना चाहें तो करें, लेकिन मैं अब कभी ठाणे वापस नहीं लौटूंगा।’
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