उपजिला में 69,000 सहायक शिक्षकों की नौकरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नई सुनवाई, अनारक्षित वर्ग ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी
सुप्रीम कोर्ट ने 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले की नई सुनवाई शुरू की, जहाँ अनारक्षित वर्ग के शिक्षक, जिन्होंने छह साल तक नौकरी निभाई है, हाई कोर्ट के आदेश से नौकरी छीनने की आशंका जताते हैं। राज्य सरकार ने बताया कि 9,500 उम्मीदवारों को समायोजित किया जा सकता है, जिसमें 4,946 मेरिट सूची के अभ्यर्थी शामिल हैं, पर आरक्षण नियमों को लेकर बहस जारी है।

सौजन्य से:- Jagran
यूपी 69000 शिक्षक भर्ती मामला: 6 साल से नौकरी कर रहे टीचर्स की सुप्रीम कोर्ट से गुहार, कहा- आदेश लागू हुआ तो चली जाएगी जॉब
सुप्रीम कोर्ट में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले की नए सिरे से सुनवाई शुरू हुई, जहां अनारक्षित वर्ग ने नौकरी जाने का डर जताया।
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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में मंगलवार को नये सिरे से लंबित अपीलों पर बहस शुरू हुई।
अनारक्षित वर्ग की ओर से हाई कोर्ट की खंडपीठ के फैसले का विरोध करते हुए अपनी छह साल से जारी नौकरी की दुहाई देते हुए कहा गया कि अगर हाई कोर्ट का आदेश लागू किया जाएगा तो वे लोग नौकरी से बाहर हो जाएंगे।
हाई कोर्ट ने इस आदेश में चयन सूची रद कर दी थी और राज्य सरकार को मूल चयन सूची में आरक्षण के सभी नियमों को ध्यान में रखते हुए तीन महीने के भीतर नये सिरे से चयन सूची बनाने का आदेश दिया था।
उधर आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल कर रखी हैं।बहस कल भी जारी रहेगी।
69000 सहायक शिक्षकों की नौकरी का मामला
सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं जिनमें अनारक्षित वर्ग ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश को चुनौती दी गई है। मंगलवार को न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी व एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले में नये सिरे से अपीलों पर सुनवाई शुरू की।
सुनवाई की शुरूआत में पक्षकारों ने कोर्ट को बताया कि इससे पहले मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने पक्षकारों की सहमति पर राज्य सरकार से सुझाव मांगा था कि क्या जो लोग नौकरी कर रहे हैं उन्हें हटाए बगैर प्रदेश सरकार आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नौकरी में समायोजित कर सकती है।
9500 लोगों का क्या होगा?
कोर्ट ने संकेत दिया था कि अगर ऐसा हो सकता है तो कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आदेश पारित कर सकता है।
कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर कहा था कि वह 9500 लोगों को समायोजित कर सकती है।
राज्य सरकार ने इसकी सूची भी दी थी जिसमें 4946 ऐसे उम्मीदवार शामिल थे जो चयन की मेरिट सूची में शामिल थे और जिन्होंने पूर्व में नियुक्ति का विकल्प अपनाया नहीं था।
उसी वक्त उन 4946 लोगों को चयन सूची में शामिल करने पर कुछ पक्षकारों और आरक्षित वर्ग ने सवाल उठाया था क्योंकि इससे आरक्षित वर्ग का नौकरी पाने का अवसर कम हो रहा था। मंगलवार को फिर से ये मुद्दा उठा।
सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से सुनवाई
पीठ ने कहा कि वह इस मामले की नये सिरे से सुनवाई करेगा और सभी पक्षों को बहस का मौका दिया जाएगा। तीन दिन लगातार मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान बीएड योग्यता रखने वालों को योग्य माने जाने पर भी बहस हुई। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का मुद्दा भी उठा।
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