सज़ा की घोषणा के बाद भी विधायक ने किया सोशल मीडिया पर जो कुछ हुआ होगा कुछ नहीं...!
न्यायालय ने दिल्ली के एक विधायक को चार साल की सज़ा दे दी है। अदालत का कहना है कि कानून के शासन में 'सिंघम' की जरूरत नहीं है। नेताओं की दबंगई पर सख्त टिप्पणी की गई है।

सौजन्य से:- Live Hindustan
कानून के शासन में न तो ‘सिंघम’ की जरूरत है और न ही ‘पुष्पा’ की, नेताओं की दबंगई पर कोर्ट की टिप्पणी
दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा हथियार का प्रदर्शन करने से समाज को गलत संदेश जाता है। कानून के शासन में न तो किसी ‘सिंघम’ की जरूरत है और न ही किसी ‘पुष्पा’ की। कोर्ट ने कहा कि बंदूक चमकाकर रसूख का प्रदर्शन करना कानून की धज्जियां उड़ाना है।
दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने सत्ता के मद में चूर नेताओं की दबंगई पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि कानून के शासन में न तो किसी ‘सिंघम’ की जरूरत है और न ही किसी ‘पुष्पा’ की। कोर्ट ने कहा कि जनप्रतिनिधि का हथियार का प्रदर्शन करना समाज को गलत संदेश देता है। कोई भी जनप्रतिनिधि कानून से ऊपर नहीं होता है।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की कोर्ट ने यह टिप्पणी वर्ष 2018 के हर्ष फायरिंग में डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत से जुड़े मामले में बिहार के साहेबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को चार वर्ष की सजा सुनाते हुए की। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि फिल्मी किरदारों की तरह बंदूक चमकाना और रसूख का प्रदर्शन करना बहादुरी नहीं, बल्कि कानून की धज्जियां उड़ाना है।
कोर्ट के फैसले से पहले दोनों पक्षों के बीच जोरदार कानूनी बहस हुई। विधायक की ओर से वरिष्ठ वकील ने कोर्ट से रहम की मांग करते हुए दलील दी कि राजू वर्ष 2005 से राजनीति में हैं। बिहार सरकार में पर्यटन मंत्री रह चुके हैं और उनका पिछला कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
गलत मंशा या इरादा नहीं था
बचाव पक्ष ने कहा कि चूंकि घटना के वक्त खुद विधायक का परिवार भी वहीं मौजूद था, इसलिए उनकी कोई गलत मंशा या इरादा नहीं था। वकीलों ने यह तर्क भी दिया कि विधायक ने खुद अपनी गाड़ी से घायल महिला को अस्पताल भिजवाया था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विधायक को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है तो उनकी विधायकी चली जाएगी। इससे उनके क्षेत्र का विकास कार्य प्रभावित होगा, इसलिए उन्हें प्रोबेशन पर रिहा कर दिया जाए या कम से कम सजा दी जाए।
जनप्रतिनिधि होने के नाते जिम्मेदारी बड़ी थी
वहीं, अतिरिक्त लोक अभियोजक चिरंजीत सिंह ने इन दलीलों का कड़ा विरोध करते हुए कहा जनप्रतिनिधि होने के नाते विधायक की जिम्मेदारी बड़ी थी, लेकिन उन्होंने डीजे पर जश्न के नाम पर जानलेवा खेल खेला। अभियोजन ने विधायक को अधिकतम सजा देने की मांग की। कोर्ट ने आरोपी पक्ष की दलीलें खारिज कर दीं।
नेपाल बॉर्डर से हुई थी गिरफ्तारी
फायरिंग व गोली लगने के साक्ष्य मिटाने का भी राजू सिंह ने प्रयास किया। डांस फ्लोर पर बिखरे खून को साफ कराया, ताकि वहां गोली चलने का साक्ष्य पुलिस को नहीं मिले। दिल्ली से भागकर राजू सिंह नेपाल छिपने जा रहा था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने कुशीनगर के निकट दबोच लिया।
लोगों से संयम बनाए रखने की अपील
सजा सुनाए जाने के बाद विधायक ने सोशल मीडिया पर क्षेत्रवासियों के नाम शनिवार की शाम एक भावनात्मक संदेश जारी किया है। विधायक ने लिखा है- ‘मैं आप सभी की पीड़ा और स्नेह को भली-भांति समझता हूं। मेरा आप सभी से एक ही आग्रह है कि हिम्मत बनाए रखें।’
पुलिस के पुख्ता सबूतों से मिला इंसाफ
दिल्ली पुलिस ने पुख्ता साक्ष्य एकत्रित किए थे। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने .22 बोर के दो इस्तेमाल किए गए कारतूस जब्त किए थे। राजू सिंह के घर से कुछ जिंदा व इस्तेमाल किए गए कारतूस बरामद किए गए थे। साथ ही हरि सिंह के घर से एक .315 कैलिबर की राइफल बरामद की थी।
नए साल के जश्न में खेला गया था खूनी खेल
शिकायतकर्ता विकास गुप्ता के अनुसार, 31 दिसंबर 2018 की रात वह अपनी पत्नी डॉ. अर्चना गुप्ता और बेटी के साथ मांडी गांव स्थित अंबेडकर कॉलोनी में बने रोज फार्म में नववर्ष की पार्टी में शामिल होने पहुंचे थे। रात करीब 12 बजे उन्होंने ड्राइवर हरि सिंह और विधायक राजू सिंह को अपने-अपने हथियारों से हवा में फायरिंग करते हुए देखा। करीब पांच मिनट बाद राजू सिंह ने दोबारा गोली चलाई। गोली चलने के तुरंत बाद उन्होंने देखा कि उनकी पत्नी जमीन पर गिर गई हैं। बाद में उन्हें अस्पताल ले गए। 3 जनवरी को उनकी मौत हो गई।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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