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शरजील इमाम और उमर खालिद को मिली जमानत की उम्मीद नहीं, दिल्ली कोर्ट ने खारिज की अर्जियां

दिल्ली कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत की अर्जियां खारिज कर दी हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण कोर्ट ने इन अर्जियों पर राहत नहीं देने का फैसला किया है।

4 जुलाई 2026 को 06:24 pm बजे
शरजील इमाम और उमर खालिद को मिली जमानत की उम्मीद नहीं, दिल्ली कोर्ट ने खारिज की अर्जियां

सौजन्य से:- Jagran

जेल में ही रहेंगे शरजील इमाम और उमर खालिद, दिल्ली कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

कड़कड़डूमा अदालत ने 2020 दिल्ली दंगों के साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश के कारण क ...और पढ़ें

HighLights

- उमर खालिद, शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज।

- कड़कड़डूमा अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया।

- दोनों 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी।

जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं शनिवार को खारिज कर दी गईं। कड़कड़डूमा अदालत ने आदेश देते हुए साफ कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पहले से दिए गए आदेश के चलते वह इन अर्जियों पर न तो विचार कर सकती है और न ही कोई राहत दे सकती है।

उस आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने यह राय दी थी कि अभियोजन पक्ष द्वारा जिन सुरक्षित गवाहों पर भरोसा किया गया है, उनकी गवाही पूरी होने या इस आदेश की तारीख से एक साल बीतने पर ही याचिकाकर्ता दोबारा जमानत के लिए अर्जी दे सकते हैं। ऐसे में अब शरजील इमाम और उमर खालिद को जेल में ही रहना पड़ेगा।

कोई ठोस परिस्थितिजन्य बदलाव नहीं दिखा - कोर्ट

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने अपने आदेश में कहा कि यह अदालत पांच जनवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रखती। वह स्वयं सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बंधी हुई है। आवेदकों द्वारा बताए गए तथ्यों के आधार पर कोई ठोस परिस्थितिजन्य बदलाव नहीं दिखता जिससे जमानत पर पुनर्विचार का प्रश्न उठे।

उमर खालिद के अधिवक्ता ने सैयद इफ्तिखार अंद्राबी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि लंबी अवधि की हिरासत के सिद्धांत को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि गुलफिशा फातिमा मामले में अपनाई गई व्याख्या पर स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं।

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शरजील इमाम के वकील ने सह-आरोपित तसलीम अहमद और खालिद सैफी को मिली अंतरिम जमानत तथा अन्य मामलों के आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों आरोपित छह वर्ष से अधिक समय से हिरासत में हैं। ट्रायल की प्रगति धीमी है।

अभियोजन पक्ष ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही दोनों आरोपितों की जमानत याचिका व समीक्षा याचिका निरस्त कर चुका है। ट्रायल कोर्ट इन आदेशों से बंधा है और तब तक कोई राहत नहीं दे सकता जब तक शीर्ष अदालत की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश न आए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अंद्राबी मामले और गुलफिशा फातिमा बनाम राज्य मामले में दिए गए निर्णयों के बीच हुए मतभेद पहले ही सुप्रीम कोर्ट की उच्च पीठ को संदर्भित किया जा चुके हैं। जब तक अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक निचली अदालत इन आधारों पर राहत देने की स्थिति में नहीं है।

बता दें कि पांच जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ प्रथमदृष्टया मामला बनता है और भूमिका के आधार पर सभी आरोपितों को समान रूप से नहीं देखा जा सकता। उसी आदेश में सह-आरोपित गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी गई थी।

छह साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं दोनों

फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। इसकी साजिश रचने के मामले में आरोपितों पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है।

उमर खालिद सितंबर 2020 में गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि शरजील इमाम जनवरी 2020 में गिरफ्तारी के बाद से जेल में हैं। इस मामले में उमर खालिद ने पांच बार और शरजील ने तीन बार जमानत याचिकाएं दाखिल कीं, लेकिन अब तक राहत नहीं मिली।

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