मृत महिला के 5 वारिसों को अदालत में पक्षकार बनाने का आदेश, अब वे मुआवजा समझौता करा सकेंगे
नाहन में अदालत ने भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामले में दिवंगत सुमोती देवी के कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाया है। वे अब मुआवजा संबंधी कार्यवाही को आगे बढ़ा सकेंगे।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a49050fab41e4ff1e0ac275","slug":"court-news-2-nahan-news-c-177-1-nhn1017-182530-2026-07-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: अदालत 2","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: अदालत 2
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मृत महिला दावेदार के 5 वारिसों को अदालत ने बनाया पक्षकार
नाहन। अदालत ने भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए दिवंगत सुमोती देवी के पांच कानूनी वारिसों को वाद में पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि वारिस अब मुआवजा संबंधी कार्यवाही को आगे बढ़ा सकेंगे।
अदालत में दायर आवेदन में बताया गया कि याचिकाकर्ता सुमोती देवी का 26 फरवरी 2019 को निधन हो गया था। उनके पुत्र रोहितास सिंह सहित अन्य कानूनी वारिसों ने मृत्यु प्रमाणपत्र और विधिक वारिस प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर उन्हें मामले में शामिल करने की मांग की। प्रतिवादी पक्ष ने भी इस आवेदन पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
अदालत ने प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण मामलों में मृत दावेदारों के कानूनी वारिसों को न्यायहित में रिकॉर्ड पर लाया जा सकता है, ताकि वे मुआवजे के अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित न रहें। अदालत ने मुआवजा राशि जारी करने से संबंधित आवेदन पर अगली सुनवाई 31 जुलाई 2026 निर्धारित की है।-- -- -- -- -- --
विज्ञापन
विज्ञापन
नाहन। अदालत ने भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए दिवंगत सुमोती देवी के पांच कानूनी वारिसों को वाद में पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि वारिस अब मुआवजा संबंधी कार्यवाही को आगे बढ़ा सकेंगे।
अदालत में दायर आवेदन में बताया गया कि याचिकाकर्ता सुमोती देवी का 26 फरवरी 2019 को निधन हो गया था। उनके पुत्र रोहितास सिंह सहित अन्य कानूनी वारिसों ने मृत्यु प्रमाणपत्र और विधिक वारिस प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर उन्हें मामले में शामिल करने की मांग की। प्रतिवादी पक्ष ने भी इस आवेदन पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
विज्ञापन
अदालत ने प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण मामलों में मृत दावेदारों के कानूनी वारिसों को न्यायहित में रिकॉर्ड पर लाया जा सकता है, ताकि वे मुआवजे के अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित न रहें। अदालत ने मुआवजा राशि जारी करने से संबंधित आवेदन पर अगली सुनवाई 31 जुलाई 2026 निर्धारित की है।
विज्ञापन
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने TNPSC मोटर वाहन निरीक्षक भर्ती के नए चयन अभ्यास को भी बरकरार रखा

चेक बाउंस मामले में दोषी की सजा पर रोक

दिल्ली जिमखाना के प्रति केंद्र के नोटिस पर उच्च न्यायालय का रुख

व्यभिचार का आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, होटल और कॉल रिकॉर्ड चेक करना निजता उल्लंघन नहीं

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कहा, सरकारी स्कूल छात्रों को हिंदू प्रार्थना नहीं पढ़नी होगी

23 विपक्षी दल एक साथ आये भारत के चुनावी लोकतंत्र की सेहत पर चिंता जताते हुए पत्र, भाजपा ने उनके आरोपों को खारिज किया

लखनऊ हाईकोर्ट का आदेश: एलडीए को मुआवजा नई दरों के अनुसार, पुराने कानून के तहत कार्रवाई अवैध

रायपुर एयरपोर्ट जमीन विवाद: किसान ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई 3500 करोड़ की मुआवजा मांग
ताज़ा ख़बरें
- पैन, मतदाता पहचान पत्र भी नागरिकता का सबूत नहीं: गौहाटी उच्च न्यायालय का आदेश
- हाई कोर्ट ने फिर से किया वादा विरोधी निर्णय, पैन कार्ड और वोटर आईडी को नहीं माना नागरिकता का सबूत
- लोकतंत्र खतरे में: विपक्ष के 24 नेताओं ने सीजेआई को पत्र में मतदाता सूची परेशानी और चुनाव आयोग के पक्षपात का आरोप लगाया
- डोंग नाई ट्रेड यूनियन ने 31 श्रमिकों को अदालत में अपना मुकदमा जीतने में प्रदान की सहायता
- पैन, वोटर आईडी नागरिकता का सबूत नहीं: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया
- अगर तलाक-ए-हसन मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार वैध है, तो फैमिली कोर्ट तलाकशुदा वैवाहिक स्थिति घोषित करने से इनकार नहीं कर सकता : हाई कोर्ट
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बिजली वितरण कंपनियों के सीएजी ऑडिट पर लगाई रोक
- सुप्रीम कोर्ट ने एआई के अनियंत्रित उपयोग के खतरे की चेतावनी दी

