सुप्रॉम कोर्ट ने याचिका के आधार पर सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका के आधार पर केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और सीबीआई को नोटिस जारी किया है. याचिका में सीजीपी की गतिविधियों की जांच की मांग की गई है और साथ ही जजों और वकीलों की मौखिक टिप्पणियों के दुरुपयोग को लेकर भी शिकायतें उठाई गई हैं.

सौजन्य से:- ABP News
CJP के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का अहम कदम, सरकार और CBI को नोटिस
सीजेपी की गतिविधियों की जांच की मांग और कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों के दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सीबीआई को नोटिस जारी किया है.
सुनवाई के दौरान जजों और वकीलों की मौखिक टिप्पणियों के दुरुपयोग के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. याचिका में खास तौर पर चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया की एक टिप्पणी को आधार बना कर 'कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी)' नाम का अभियान शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है. याचिकाकर्ता ने सीजेपी की गतिविधियों की जांच की मांग की है. इसके साथ ही याचिका में फर्जी वकीलों की पहचान और उन पर कार्रवाई की मांग भी की गई है.
राजा चौधरी नाम के वकील ने यह याचिका 26 मई को दाखिल की थी. याचिकाकर्ता ने 15 मई 2026 को एक सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत की टिप्पणी में ‘कॉकरोच’ शब्द के इस्तेमाल का ज़िक्र किया. याचिका में बताया गया था कि इस टिप्पणी को सुनवाई के संदर्भ से अलग कर सोशल मीडिया पर पेश किया गया. इसका इस्तेमाल राजनीतिक और व्यावसायिक कारणों से किया गया.
टिप्पणियों को काट छांटकर पेश करना गलत- याचिकाकर्ता
ध्यान रहे कि जिस समय यह याचिका दाखिल हुई थी तब तक सीजेपी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और उपद्रव जैसी घटनाएं नहीं हुई थीं. इस याचिका में यह कहा गया था कि जिस तरह चीफ जस्टिस की एक टिप्पणी को आधार बनाकर रातों-रात एक अभियान शुरू कर दिया गया, यह संदिग्ध लगता है. जजों और वकीलों की मौखिक टिप्पणियों को सोशल मीडिया पर काट छांटकर पेश करना गलत है. जो लोग अपने फायदे के लिए ऐसा कर रहे हैं, उनकी गतिविधियों की जांच होनी चाहिए.
गुरुवार, 11 अगस्त को या मामला पहली बार सुनवाई के लिए आया. याचिकाकर्ता ने सबसे पहले फर्जी वकीलों का मसला उठाया और बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट उत्तर प्रदेश में ऐसे वकीलों की जांच करवा रहा है. ऐसा पूरे देश में होना चाहिए. जो लोग नकली डिग्री के जरिए इस पेशे में घुस आए हैं, उनकी पहचान कर उन्हें बाहर करना जरूरी है.
युवाओं को 'कॉकरोच' कहा गया- याचिकाकर्ता
इसके बाद क्या याचिकाकर्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मई के महीने में फर्जी वकीलों की तरह इशारा करते हुए एक टिप्पणी की थी. उसे सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया. यह बताया गया कि देश के युवाओं को 'कॉकरोच' कहा गया है. सोशल मीडिया पर मीम और वायरल कंटेंट बनाए गए. एक अभियान शुरू किया गया. यह साफ तौर पर व्यवसायिक इस्तेमाल और राजनीतिक ब्रांडिंग का मामला लगता है. इसकी जांच होनी चाहिए.
थोड़ी देर चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और सीबीआई को नोटिस जारी कर दिया. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को तय की है. उस दिन कोर्ट की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर पेश किए जाने के खिलाफ दाखिल एक और याचिका पर सुनवाई होनी है. कोर्ट दोनों मामलों को साथ सुनेगा.
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