आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने पर बर्खास्तगी हर मामले में नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने लगाए नियम
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नौकरी के दौरान आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने पर कर्मचारी की बर्खास्तगी स्वतः नहीं होगी। नियोक्ता को मामले की गंभीरता, परिस्थितियों और कर्मचारी की जिम्मेदारी को देखते हुए फैसला लेना होगा। शत्रुघ्न यादव को नौकरी बहाल कर 50% बकाया वेतन मिलेगा।

सौजन्य से:- Jagran
आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने पर बर्खास्तगी हर मामले में नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने तय किए नियम
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नौकरी के दौरान आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने पर कर्मचारी की बर्खास्तगी स्वतः नहीं होगी, नियोक्ता को मामले की गंभीरता और परिस्थितियों ...और पढ़ें
HighLights
- बर्खास्तगी से पहले नियोक्ता को परिस्थितियों का आकलन करना होगा।
- कर्मचारी को जानकारी थी या नहीं, यह जांचना जरूरी।
- शत्रुघ्न यादव को बहाल कर 50% बकाया वेतन मिलेगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि नौकरी के दौरान या नियुक्ति के समय आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी नहीं देने पर कर्मचारी को बर्खास्त करना अपने-आप होने वाली कार्रवाई नहीं है। नियोक्ता को फैसला लेने से पहले यह देखना होगा कि जानकारी छिपाने की परिस्थितियां क्या थीं, अपराध कितना गंभीर था और कर्मचारी जिस पद पर था, उसकी प्रकृति क्या थी।
सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
जस्टिस संजय करोल और एजी मसीह की बेंच ने कहा कि आपराधिक रिकॉर्ड का खुलासा न करने के मामले में प्रत्येक कर्मचारी के मामले पर अलग से विचार किया जाना चाहिए। नियोक्ता को पहले यह तय करना होगा कि कर्मचारी ने जानबूझकर जानकारी छिपाई या गलत जानकारी दी थी।
यह फैसला फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर लिमिटेड से बर्खास्त किए गए शत्रुघ्न यादव की याचिका पर आया। यादव को अपने खिलाफ दर्ज एक गैर-संज्ञेय अपराध के मामले की जानकारी नहीं देने के आधार पर नौकरी से निकाल दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी बर्खास्तगी को गलत ठहराते हुए नौकरी बहाल करने का आदेश दिया।
पीठ ने कहा कि नियोक्ता को यह भी जांचना होगा कि घोषणा करते समय कर्मचारी को अपने खिलाफ दर्ज मामले की जानकारी थी या नहीं। इसके अलावा आरोपों की प्रकृति, अपराध की गंभीरता, कर्मचारी की भूमिका, जानकारी छिपाने का तरीका, पद की जिम्मेदारियां और यदि मामला खत्म हो चुका है तो उसके नतीजे पर भी विचार करना होगा।
खबरें और भी
अदालत ने कहा कि यदि यह साबित नहीं होता कि उम्मीदवार को आपराधिक मामले की जानकारी थी, तो यह नहीं माना जा सकता कि उसने जानबूझकर कोई तथ्य छिपाया या गलत जानकारी दी। हालांकि, मामले की जानकारी नहीं होने का दावा साबित करने की जिम्मेदारी कर्मचारी की ही होगी।
पीठ ने कहा कि यादव लगातार यह दावा करते रहे कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों से भी उनका दावा साबित होता है। इसलिए उनकी बर्खास्तगी को कानूनी रूप से सही नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने यादव को तत्काल नौकरी पर बहाल करने और संबंधित सेवा लाभ देने का आदेश दिया। हालांकि, पिछली बकाया सैलरी का भुगतान पूरी तरह नहीं किया जाएगा। अदालत ने अधिकतम 50 प्रतिशत बकाया वेतन आठ सप्ताह के भीतर देने का निर्देश दिया।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
यह भी पढ़ें- UAPA मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, कहा- एक साल में पूरा करें ट्रायल
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट का हरियाणा सरकार को निर्देश: कैदियों की समय पूर्व रिहाई नीतियों का दें ब्योरा

अदालत ने विवेचक को तलब किया, पेंशन खाते पर रोक हटाने के मामले में पूछताछ

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन अपराधों पर दी सख्त नसी, केंद्र को निर्देश दिया जरूरी कदम उठाने के

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, TMC को बैंक खाता सीज मामले में अंतरिम राहत से इनकार

सुशील कुमार को बड़ा झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करने का फैसला

गुजरात उच्च न्यायालय का एक और फैसला, घर पर ताश खेलना नहीं जुए के दायरे में

सुप्रीम कोर्ट ने TMC को भी नहीं दी कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर दखल, फ्रीज बैंक खाते बरकरार

लेबनान ने मौत की सजा समाप्त कर दी, पहला अरब देश बन गया
ताज़ा ख़बरें
- भारत में न्याय की कुर्सी पर बैठने वाली पहली महिला न्यायाधीश की विस्मयकारी कहानी
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुशील कुमार को जमानत देने से इनकार किया
- इस्लाम अपनाने पर बेटियों को कैद करने के लिए पिता और यूपी सरकार पर 25 लाख का जुर्माना
- सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी खातों में फ्रीज़ की कार्रवाई पर हस्तक्षép का इनकार करके उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा
- SC ने कलकत्ता HC के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया
- न्यायपालिका पर हमला या संगठित शोषण? सीजेपी की गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट का सीबीआई को नोटिस
- सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार किया टीएमसी के खातों का फ्रीज आदेश, मनी लॉन्ड्रिंग जांच जारी रहेगी
- राष्ट्रीय लोक अदालत में जल्द निर्णय, अधिकारियों को दी गयी जिम्मेदारी

