मोदी सरकार पर कांग्रेस ने 'रोजगार चोरी' का आरोप, गिनाए आंकड़े
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार का नया ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम, जिसे वीबी-जी रैम जी एक्ट कहा जाता है, असल में रोजगार 'चोरी' है। पार्टी का कहना है कि इस कार्यक्रम के पहले ही महीने में रोजगार सृजन में भारी गिरावट आई है।

सौजन्य से:- अमर उजाला
‘रोजगार गारंटी’ से ‘रोजगार चोरी’ तक?: वीबी-जी रैम जी कानून को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, गिनाए आंकड़े
कांग्रेस ने सोमवार को वीबी-जी रैम जी एक्ट को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि यह नया कानून असल में 'रोजगार चोरी है। पार्टी ने कहा कि मनरेगा को 'खत्म' करने के फैसले का नुकसान अब सामने आने लगा है।
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विस्तार
कांग्रेस ने वीबी-जी रैम जी एक्ट को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए दावा किया है कि नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम के पहले ही महीने में रोजगार सृजन में भारी गिरावट आई है। जयराम रमेश ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए जुलाई में ‘पर्सन-डेज’ में 49.94 प्रतिशत और रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या में 51.45 प्रतिशत की गिरावट का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नए कानून ने मनरेगा की रोजगार गारंटी को कमजोर किया है और इसे केंद्रीकृत करने से मजदूरों के अधिकार प्रभावित होंगे। वीबी-जी रैम जी एक्ट 1 जुलाई से लागू हुआ है और इसने मनरेगा की जगह ली है।
कांग्रेस ने वीबी-जी रैम जी को लेकर क्या दावा किया?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की। इस रिपोर्ट में सरकारी आंकड़ों के हवाले से दावा किया गया है कि सरकार के नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम के तहत रोजगार सृजन में भारी गिरावट आई है। जुलाई में साल-दर-साल आधार पर इसमें 49.94 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। रमेश ने एक्स पर कहा, 'मोदी सरकार के वीबी-जी रैम जी का पहला महीना ही मनरेगा को खत्म करने की कीमत दिखा रहा है।' पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि जुलाई 2026, यानी नए कानून के लागू होने के बाद पहले महीने में, ग्रामीण रोजगार सृजन में जुलाई 2025 की तुलना में भारी गिरावट दर्ज की गई। जुलाई 2025 में मनरेगा लागू था।
रोजगार के आंकड़ों में कितनी गिरावट का दावा किया गया?
रिपोर्ट का हवाला देते हुए जयराम रमेश ने कहा कि काम के ‘पर्सन-डेज’ यानी कुल मानव-दिवसों में 49.94 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा 51.45 प्रतिशत कम परिवारों को रोजगार मिला और रोजगार के तौर पर पैदा किए गए कुल ‘पर्सन-डेज’ में भी करीब 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
कांग्रेस ने पहले क्या भविष्यवाणी की थी?
रमेश ने कहा कि कांग्रेस और पूरे विपक्ष ने उस समय ही इस स्थिति की भविष्यवाणी की थी, जब मोदी सरकार ने मनरेगा को 'जबरदस्ती खत्म' किया था।
जयराम रमेश ने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की कानूनी गारंटी दी थी और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों को अधिकार दिए गए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को उस समय की सरकार की राजनीतिक इच्छा पर निर्भरता से मुक्त करना था।
वीबी-जी रैम जी को लेकर कांग्रेस ने क्या-क्या आरोप लगाए?
रमेश ने कहा कि इसके बजाय, मोदी सरकार ने इस योजना को केंद्रीकृत कर दिया है, राज्य सरकारों पर भारी वित्तीय बोझ डाल दिया है, इसे तकनीक और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पर बहुत अधिक निर्भर बना दिया है, रोजगार की गारंटी खत्म कर दी है और मजदूरों के लिए अपने अधिकारों का दावा करना मुश्किल बना दिया है। वीबी-जी रैम जी असल में रोजगार चोरी है।
ये भी पढ़ें: पीएम मोदी से मिले एनसीपी-एसपी सांसद: महाराष्ट्र के सूखे-प्याज से नदी प्रदूषण तक मुद्दे उठे; क्या हुई अहम चर्चा?
वीबी-जी रैम जी एक्ट ने किस कानून की जगह ली?
‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट’ (वीबी-जी रैम जी एक्ट) 1 जुलाई से पूरे देश में लागू हो गया है। इसने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा शुरू किए गए करीब दो दशक पुराने ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट’ (मनरेगा) की जगह ली है।
न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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