सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ जमीन घोटाला केस रद्द, राजनीतिक लड़ाइयां अदालत में नहीं लड़ी जानी चाहिए: SC
सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक लड़ाइयों को अदालत में दखल न देने के मामले में एक मायने रखता फैसला किया है. SC ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश में दखल से इनकार कर दिया.

सौजन्य से:- ETV Bharat
चंद्रबाबू नायडू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, अमरावती जमीन घोटाला केस बंद!
सुप्रीम कोर्ट ने अमरावती लैंड पूलिंग योजना में चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ केस रद्द करने के हाई कोर्ट के फैसले में दखल से इनकार किया.
By Sumit Saxena
Published : August 14, 2026 at 6:59 PM IST
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि राजनीतिक लड़ाइयां अदालत में नहीं लड़ी जानी चाहिए. इसके साथ ही कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसके तहत राजधानी अमरावती में लैंड पूलिंग योजना (भूमि एकत्रीकरण योजना) में कथित अनियमितताओं के मामले में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और मंत्री पी. नारायण के खिलाफ दर्ज केस को रद्द कर दिया गया था.
इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की. पीठ ने याचिकाकर्ता अल्ला रामकृष्ण रेड्डी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार से कहा, 'राजनीतिक लड़ाइयां अदालत में नहीं लड़ी जानी चाहिए.' सुनवाई के दौरान पीठ ने साफ कर दिया कि वह हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने की इच्छुक नहीं है.
वकील रंजीत कुमार ने दलील दी कि इस मामले में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, जिसमें 25,000 से अधिक किसानों की लगभग 30,000 एकड़ जमीन शामिल थी. पीठ ने कहा कि इस याचिका के नतीजे का अन्य मामलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, और उन मामलों का फैसला उनके अपने गुण-दोष के आधार पर किया जाना चाहिए.
पीठ ने वकील रंजीत कुमार से कहा, 'किसानों के व्यापक मुद्दे पर, हम आपके साथ हैं. वे जिसके भी हकदार हैं, हम उसकी रक्षा करेंगे.' हालांकि, पीठ ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि वर्तमान आपराधिक कार्यवाही एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के कहने पर शुरू की गई थी और कोई भी किसान खुद आगे नहीं आया था. दलीलों को सुनने के बाद, पीठ ने अमरावती में हाई कोर्ट के 15 जुलाई के आदेश को चुनौती देने वाली रेड्डी की याचिका का निष्पादन कर दिया.
मार्च 2021 में, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी. यह मामला तत्कालीन विधायक अल्ला रामकृष्ण रेड्डी की शिकायत के बाद दर्ज किया गया था, जो 2016 के एक सरकारी आदेश के अनुसार घोषित लैंड पूलिंग योजना से जुड़ा था.
इस मामले की जांच करने वाली सीआईडी ने चंद्रबाबू नायडू, पी. नारायण और अन्य लोगों को आरोपी बनाया था. उन पर आईपीसी (IPC), एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) और असाइंड लैंड्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे. इससे पहले, हाई कोर्ट ने मामले को रद्द करने के लिए चंद्रबाबू नायडू और नारायण द्वारा दायर याचिकाओं के बाद इस केस की आगे की सभी कार्यवाहियों पर रोक लगा दी थी.
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