पुलिस की लापरवाही: गंभीर अपराध के आरोपी को मिली डिफॉल्ट बेल
पॉक्सो कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है और तत्कालीन SHO के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. अदालत ने माना है कि आरोप पत्र समय पर पेश नहीं होने से आरोपी को डिफॉल्ट बेल मिली.

सौजन्य से:- ETV Bharat
90 दिन में चार्जशीट नहीं पेश कर पाई पुलिस, बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी को मिली डिफॉल्ट बेल, SHO पर होगी कार्रवाई
पॉक्सो कोर्ट ने मामले में तत्कालीन जेएनवी कॉलोनी थानाधिकारी विक्रम तिवाड़ी के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
Published : August 15, 2026 at 7:23 AM IST
बीकानेर: बच्ची से दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध के मामले में पुलिस की समयबद्ध कार्रवाई पर नहीं होने पर सवाल खड़े हुए हैं. बीकानेर की पॉक्सो कोर्ट में सामने आया कि मामले में निर्धारित 90 दिन की अवधि के भीतर पुलिस आरोप पत्र अदालत में पेश नहीं कर सकी. इसका सीधा फायदा आरोपी को मिला और अदालत को डिफॉल्ट बेल का कानूनी लाभ मिल गया. मामले की सुनवाई पॉक्सो कोर्ट की जज डॉ. मनीषा चौधरी की अदालत में हुई. अदालत ने आरोप पत्र समय पर पेश नहीं किए जाने को पुलिस की गंभीर लापरवाही माना. कोर्ट ने इस मामले में तत्कालीन जेएनवी कॉलोनी थानाधिकारी विक्रम तिवाड़ी की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी टिप्पणी की है.
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 90 दिन की अवधि में आरोप पत्र पेश नहीं होने के परिणामस्वरूप अभियुक्त को डिफॉल्ट बेल मिली. कोर्ट ने इस स्थिति को तत्कालीन थानाधिकारी के कार्य के प्रति घोर लापरवाही, अकर्मण्यता और कर्तव्य के प्रति उदासीनता का परिचायक माना.
गंभीर अपराध में कानूनी प्रावधानों की पालना नहीं: कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गंभीर अपराध के मामले में बाध्यकारी कानूनी प्रावधानों की पालना नहीं की गई. अदालत ने माना कि तत्कालीन SHO की लापरवाही के कारण गंभीर अपराध का आरोपी डिफॉल्ट बेल का हकदार बना. कोर्ट ने जांच और उसके परिणामों की गंभीरता के प्रति इस तरह की लापरवाही को गंभीर माना है.
विभागीय कार्रवाई के दिए निर्देश: पॉक्सो कोर्ट ने मामले में तत्कालीन जेएनवी कॉलोनी थानाधिकारी विक्रम तिवाड़ी के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है. साथ ही विभागीय कार्रवाई की रिपोर्ट दो महीने के भीतर न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अपने आदेश की एक प्रति राजस्थान सरकार के गृह सचिव को भी भेजने के निर्देश दिए हैं. अब कोर्ट के आदेश के बाद तत्कालीन थानाधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होगी.
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