हवाएँ अब रौशनी का फ़ैसला करेंगी: कवियों के गहरे अर्थ
महाशर बदायूंनी, नफ़स अम्बालवी, जौन एलिया, अमीर मीनाई, फ़िराक़ गोरखपुरी और बशीर बद्र जैसे कवि अपनी प्रतिभाशाली पoesis के माध्यम से जीवन, मृत्यु और समय के अस्तित्व विषयों पर विश्लेषण करते हैं।

सौजन्य से:- Amar Ujala
अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
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अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला
जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा
- महशर बदायूंनी
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उसे गुमाँ है कि मेरी उड़ान कुछ कम है
मुझे यक़ीं है कि ये आसमान कुछ कम है
- नफ़स अम्बालवी
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हम कहाँ और तुम कहाँ जानाँ
हैं कई हिज्र दरमियाँ जानाँ
- जौन एलिया
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'अमीर' अब हिचकियाँ आने लगी हैं
कहीं मैं याद फ़रमाया गया हूँ
- अमीर मीनाई
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अगर बदल न दिया आदमी ने दुनिया को
तो जान लो कि यहाँ आदमी की ख़ैर नहीं
- फ़िराक़ गोरखपुरी
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तुम अभी शहर में क्या नए आए हो
रुक गए राह में हादसा देख कर
- बशीर बद्र
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Urdu Poetry: ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का
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