सुप्रीम कोर्ट का कर्नाटक सरकार को निर्देश: यूएपीए मामलों के लिए विशेष अदालत गठित करें
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को यूएपीए मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत स्थापित करने का आदेश दिया है, जो रोजाना सुनवाई करेगी और तीन महीने में महत्वपूर्ण सबूत दर्ज करेगी। यह निर्देश पीएफआई साजिश मामले में आरोपी शाहिद खान की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया है।

सौजन्य से:- Hindustan
यूएपीए के लिए विशेष अदालत बनाएं कर्नाटक सरकार
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को आदेश दिया कि वह यूएपीए के तहत मामलों की रोजाना सुनवाई के लिए एक अतिरिक्त विशेष अदालत तैयार करे। कोर्ट ने कहा कि सभी मंजूरियां दो हफ्ते में दी जानी चाहिए और विशेष अदालत एक सुरक्षित गवाह सहित महत्वपूर्ण गवाहों की सुनवाई करेगी। यह प्रक्रिया तीन महीने के भीतर महत्वपूर्ण सबूत दर्ज करेगी।
यह देखते हुए कि राज्य सालों तक ट्रायल लंबा खींचने की छूट नहीं ले सकता, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया कि वह यूएपीए के तहत मामलों की रोजाना सुनवाई के लिए एक अतिरिक्त विशेष अदालत तैयार करे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने शाहिद खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। शाहिद खान पीएफआई साजिश मामले में आरोपी है, जिसमें अभियोजन पक्ष 707 गवाहों से पूछताछ करने का प्रस्ताव रखता है, जिनमें कुछ सुरक्षित गवाह भी शामिल हैं। सीजेआई ने अपने आदेश में कर्नाटक को निर्देश दिया कि वह तुरंत विशेष अदालत के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराए।
जिसमें कर्नाटक हायर ज्यूडिशियल सर्विस में एक अतिरिक्त पद का सृजन और हाईकोर्ट द्वारा तय नियमों के अनुसार जरूरी स्टाफ और अन्य संबंधित सुविधाएं शामिल हों। सभी मंज़ूरी दो हफ्ते में दी जानी चाहिए। इसके बाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एक न्यायिक अधिकारी को स्पेशल कोर्ट की अध्यक्षता करने के लिए नियुक्त करेंगे, जो विशेष रूप से यूएपीए मामलों की रोजाना सुनवाई करेगा। पीठ ने आदेश दिया कि मौजूदा मामला भी विशेष अदालत को सौंपा जाएगा। पहले पीठासीन अधिकारी तीन सुरक्षित गवाहों से पूछताछ करेगा, उसके बाद अन्य महत्वपूर्ण गवाहों से, ताकि अभियोजन पक्ष के लिए महत्वपूर्ण सबूत अधिकतम तीन महीने में दर्ज किए जाएं। इसके बाद याचिकाकर्ता जमानत पर रिहाई के लिए नए सिरे से आवेदन करने को स्वतंत्र होगा।
लेखक के बारे में
Hindustan | Bureauहिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में 'हिन्दुस्तान' विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्यों सहित देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्करण प्रकाशित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपरि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद विस्तार से न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।
और पढ़ें
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सोनीपत में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, आपसी समझौते से होगा मामलों का निपटारा

रांची के मधुकम वाले महादेव उरांव को सुप्रीम कोर्ट से भी लगा करारा झटका, आदिवासी जमीन मामले में एसएलपी खारिज

मेरठ सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट से व्यापारियों को भीषण झटका

सुनिश्चित करेंगे कि प्रदूषण का नियंन हो: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शोर प्रदूषण के पालन में कोई भी ढिलाई न हो

हाई कोर्ट ने कर्मचारी की 1996 से क्लर्क पद पर पदोन्नति की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट की 'दोहरी जिम्मेदारी' की धुन पर निर्णय, अवैध ढांचों का ध्वंस होगा, लेकिन कहां जाएंगे बेघर, यह सवाल तो रहेगा

SC ने सभी राज्यों से कहा है कि वे कैंसर को एक उल्लेखनीय बीमारी घोषित करें, सुनिश्चित करें कि कैंसर के मामलों की रिपोर्टिंग एक समान हो

भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की 5 याचिकाओं परtoday सुनवाई
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी: बंगाल ट्रिब्यूनल को अपीलों का निपटारा तेजी से करना चाहिए
- सुप्रीम कोर्ट में भोजशाला विवाद पर आज होगी सुनवाई, मंदिर और मस्जिद पक्ष रखेंगे अपनी बात
- 12 सितंबर को होने वाली लोक अदालत के लिए तैयारियाँ जोरों पर
- नियुक्तियों में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए ट्रिब्यूनल सुधार
- ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर: केंद्र सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा
- महाराष्ट्र FDA की कार्यशैली पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
- SIR डिलीशन: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अपीलों की जानकारी मांगी
- मधुकम दखल-दिहानी मामला: महादेव उरांव को सुप्रीम कोर्ट से झटका, याचिका खारिज

