जे. डी. यू. का दो टूक: बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा का कोई सवाल नहीं!
जेडीयू नेता नीरज कुमार ने कहा कि शराबबंदी से बिहार में विभिन्न मानकों पर मानव विकास सूचकांक में सुधार हुआ है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसकी सराहना की थी.

सौजन्य से:- एबीपी न्यूज़
बिहार में शराबबंदी कानून की होगी समीक्षा? जे. डी. यू. का दो टूक जवाब
बिहार शराबबंदी समाचार: जेडीयू नेता नीरज कुमार ने कहा कि शराबबंदी कानून से बिहार में विभिन्न मानकों पर मानव विकास सूचकांक में सुधार हुआ है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसकी सराहना की थी.
बिहार में सत्तारूढ़ एन. डी. ए. में अहम घटक जनता दल यूनाइटेड (जे. डी. यू.) ने मंगलवार (11 अगस्त) को शराबबंदी कानून की समीक्षा की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया. एनडीए का यह खंडन अलायंस में सहयोगी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की ओर से बिहार में शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन को लेकर चिंता जताए जाने और गुजरात मॉडल की तर्ज पर इसे लागू करने की मांग किए जाने के कुछ दिन बाद आया है.
जेडीयू ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में लागू किए गए शराबबंदी कानून की समीक्षा का कोई सवाल ही नहीं है. बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम अप्रैल 2016 में लागू किया गया था. इसके तहत राज्य में शराब के निर्माण, बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध है. जदयू ने कहा कि शराबबंदी कानून से बिहार में विभिन्न मानकों पर मानव विकास सूचकांक में सुधार हुआ है और बीजेपी के शीर्ष नेताओं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल हैं, ने इसकी सराहना की है.
शराबबंदी कानून की समीक्षा का कोई सवाल ही नहीं- नीरज कुमार
जे. डी. यू. के वरिष्ठ नेता एवं विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा, ‘‘हमारे नेता नीतीश कुमार के कार्यकाल में लागू किए गए शराबबंदी कानून की समीक्षा का कोई सवाल ही नहीं है. मैं कहना चाहता हूं कि शराबबंदी कानून से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आया है. इतना ही नहीं, तत्कालीन मुख्यमंत्री कुमार द्वारा राज्य में लागू किए गए शराबबंदी कानून की प्रधानमंत्री मोदी ने भी सराहना की थी.’’
जीतनराम मांझी ने की थी गुजरात मॉडल लागू करने की मांग
केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने हाल में शराबबंदी के क्रियान्वयन में कथित खामियों को उजागर करते हुए कहा था कि इस संबंध में कानून को गुजरात मॉडल की तर्ज पर व्यवस्थित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा था, ‘‘कानून के क्रियान्वयन में खामियों के कारण नैतिक पतन बढ़ रहा है. मैं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू करने पर विचार करने का आग्रह करूंगा.’’
एन. सी. ए. ई. आर. के शोधपत्र में शराबबंदी हटाने की सिफारिश
इस बीच, रिपोर्ट के अनुसार नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) के एक हालिया शोधपत्र में कहा गया है कि शराबबंदी से राज्य के राजकोष को नुकसान होता है और प्रतिबंध हटाने से राज्य के राजस्व में 14 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है.
‘मैक्रो पर्सपेक्टिव ऑफ बिहार्स डेवलपमेंट अचीवमेंट्स : अनफिनिश्ड एजेंडा एंड द वे फॉरवर्ड’ शीर्षक वाले इस शोधपत्र को पिछले सप्ताह इंडिया पॉलिसी फोरम के दौरान जारी किया गया था. इसमें कहा गया है कि बिहार में शराबबंदी कानून के कारण ‘‘शराब के कारोबार, अवैध शराब की तस्करी और वैकल्पिक नशीले पदार्थों के सेवन में वृद्धि हुई है.’’
शराबबंदी कानून के बावजूद राज्य में शराब की बिक्री बढ़ी- राजद
इस बीच, जीतनराम मांझी के रुख का समर्थन करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद राज्य में शराब की बिक्री बढ़ी है और कुछ ‘‘सफेदपोश लोगों तथा खाकी वर्दी वालों’’ ने इससे कमाई कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, हमने शराबबंदी लागू किए जाने के समय इसका समर्थन किया था और आज भी हम शराबबंदी के पक्ष में हैं. इसके क्रियान्वयन को मजबूत किया जाना चाहिए.’’
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न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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