कृष्ण जन्मभूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में वापस भेजने का संकेत दिया
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामला वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज सकता है, क्योंकि हाईकोर्ट ने एक अलग मुकदमे में दूसरे हिंदू पक्ष की एक अलग मुकदमे को मानने से इनकार कर दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि दूसरे केस में एक अलग हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि माना गया था, लेकिन दूसरे केस के पक्षकारों को नोटिस जारी नहीं किए गए थे.

सौजन्य से:- ETV Bharat
कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद: सभी भक्तों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा, सुप्रीम कोर्ट ने मामला हाईकोर्ट भेजने के संकेत दिए
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह मामले को वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज सकता है.
By Sumit Saxena
Published : August 12, 2026 at 5:08 PM IST
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को संकेत दिया कि वह कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में किसका मुकदमा मुख्य मामला होगा, इस बारे में याचिका को वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने पर विचार कर रहा है.
यह मामला जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ के सामने आया. पीठ एक हिंदू पक्ष की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें एक अलग मुकदमे में दूसरे हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि माना गया था.
पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट ने दूसरे केस करने वालों को नोटिस जारी नहीं किए, जबकि दूसरे केस में एक दूसरे हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि माना गया था. पीठ ने कहा कि आवेदन किसी और चीज के लिए थी और सभी अभियोगी को नोटिस जारी नहीं किए गए थे.
पीठ ने कहा, "हम किसी भी हालत में मामले को वापस हाई कोर्ट में भेजना चाहते हैं." पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई 2 सितंबर को तय की है."
पिछली सुनवाई का जिक्र करते हुए, पीठ ने कहा कि कुछ वकीलों ने बार में यह बयान दिया था कि अभियोगी (हिंदू पक्ष) के बीच इस बारे में ऑफ-द-रिकॉर्ड बातचीत चल रही थी कि इस मामले में किसका केस लीड केस होगा.
कुछ हिंदू पार्टियों की ओर से पेश हुए एक वकील ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले को वापस हाई कोर्ट को भेज दिया जाए ताकि इस मुद्दे पर नए सिरे से फैसला किया जा सके.
सुप्रीम कोर्ट में मस्जिद कमेटी और हिंदू पक्षों की तरफ से अलग-अलग आदेश के खिलाफ कई याचिका दायर की गई हैं, जिसमें हाई कोर्ट के 26 मई, 2023 के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका भी शामिल है, जिसमें मथुरा कोर्ट में पेंडिंग विवाद से जुड़े सभी मामलों को कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया गया था.
पिछले साल जुलाई में हाई कोर्ट ने एक और हिंदू पार्टी को, जिसने मथुरा में विवादित जगह से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने के लिए एक अलग केस किया था, सभी भक्तों का प्रतिनिधि माना जाने की इजाजत दी थी.
ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को स्पेशल UAPA कोर्ट के लिए बुनियादी सुविधा देने का निर्देश दिया
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आरोपी को जेल में रखने के बाद मुकदमा खींचने की छूट नहीं

शहरी विकास कानून के लिए प्रस्तावों का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू

अमेरिकी अदालत के फैसले से ट्रंप प्रशासन को बड़ी राहत, सीमा पर दीवार का निर्माण जारी

70 की आयु में भी हासिल की स्नातकोत्तर की उपाधि, ज्योतिरादित्य स्कारिया की कहानी

अस्थाई लोक अदालत से मिलेगी सुविधाएं, लेकिन क्या?

कार्नाटक उच्च न्यायालय ने लोकायुक्त पुलिस को बेहद महत्वपूर्ण संकेत दिया

राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी: नागौर में तीन समझौतों पर सियासत

लोकसभा जांच समिति ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को दोषी ठहराया, कहा- घर में भारी नकदी बंडलों के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं था
ताज़ा ख़बरें
- प्रशासनिक अधिकारियों ने लोक अदालत की तैयारी के लिए बैठक में दिए निर्देश
- पक्षकारों के बीच समझौता कराना लोक अदालत का मूल कर्तव्य
- न्यायमूर्ति पी.वी. कानून में संजय कुमार का करियर और महत्वपूर्ण फैसले
- क्या बी. सी. आई. कानूनी छात्रों को वकालत की जिंदगी से वंचित कर सकती है?
- राजस्थान हाई कोर्ट की इमारत में सुरक्षा का संकट, क्या न्यायपालिका अपने घर को सुरक्षित रख सकती है?
- न्यायिक निश्चितता का संकट: भारत में न्यायपालिका के उलटफेर की आवृत्ति
- सुप्रीम कोर्ट ने बी. सी. आई. के आदेश की आलोचना की, कहा कोई लेना-देना नहीं
- राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, वीर सावरकर मामले में केस रद्द

