सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार की 34% पिछड़ा वर्ग आरक्षण चुनौती को खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राज्य की अपील को नकारते हुए हाईकोर्ट के आदेश को मान्य किया, जिसके अनुसार स्थानीय निकाय चुनावों में 34% आरक्षण 50% कुल आरक्षण सीमा का उल्लंघन था। इस निर्णय के बाद सरकार को छह सप्ताह के भीतर चुनाव प्रक्रिया आरंभ करने का निर्देश दिया गया है।

सौजन्य से:- Jagran
आंध्र प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने वाली याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों के लिए 34% आरक्षण को चुनौती दी गई थी।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार की आरक्षण संबंधी अपील खारिज की।
- स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्ग के 34% आरक्षण को चुनौती।
- हाईकोर्ट ने 50% आरक्षण सीमा उल्लंघन पर आदेश दिया था।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली अपील को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण देने वाले दो सरकारी आदेशों को रद कर दिया गया था। जिसको राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट का आदेश बताया उचित
सुप्रीम कोर्ट में दो जज जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा कि आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का आदेश उचित था। हाईकोर्ट ने 1 अक्टूबर को दो सरकारी आदेशों को रद किया था और कहा था कि यह कोटा सुप्रीम कोर्ट के उन दिशा निर्देशों के खिलाफ है जिनके अनुसार कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को छह सप्ताह के अंदर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था।
मुख्यमंत्री ने पिछले चुनाव में की थी घोषणा
18 अगस्त को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों के लिए 34 प्रतिशत कोटे की घोषणा की थी। नाडयू ने कहा था, 'हमने यह फैसला गठबंधन सरकार के राजनीतिक सिद्धांत और NDA के वादे के तहत लिया है। हमने चुनावों के दौरान नामिक पदों पर पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने का वादा किया था और हमने उसे पूरा किया है।'
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