सुप्रीम कोर्ट ने सड़क निर्माण में पेड़ कटाई के बदले पौधारोपण हेतु पर्याप्त भूमि प्रदान करने का निर्देश दिया
पीठ ने पंजाब के घटते वन क्षेत्र को लेकर चिंता जताते हुए, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की सड़क परियोजनाओं में कटे पेड़ों की भरपाई के लिए राज्य को पाँच किलोमीटर सीमा के भीतर पौधारोपण हेतु जमीन का प्रस्ताव देने को कहा। इस दिशा में सरकार को प्रस्ताव प्रस्तुत करने और उत्तर देने का आदेश दिया गया, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी से बचा जा सके।

सौजन्य से:- Jagran
सड़क निर्माण के लिए पेड़ कटाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पंजाब सरकार से मांगी पौधारोपण के लिए जमीन
सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों के निर्माण के लिए क्षतिपूर्ति वनीकरण हेतु पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराने के लिए पंजाब सरकार से ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में घटते वन क्षेत्र पर चिंता जताई।
- सड़क परियोजनाओं हेतु पेड़ों की कटाई पर क्षतिपूर्ति पौधारोपण अनिवार्य।
- पंजाब सरकार से पौधारोपण के लिए पर्याप्त भूमि का प्रस्ताव मांगा।
डिजिटल डेस्क, अमृतसर। पंजाब में घटते वन क्षेत्र और सड़क परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने पंजाब सरकार से उन क्षेत्रों में भरपाई के मकसद से पौधारोपण के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव मांगा है, जहां नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) को सड़क निर्माण के लिए जमीन की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में वन क्षेत्र लगातार कम होने और पौधारोपण की योजना के प्रभावी नहीं होने पर चिंता जताई। पीठ ने यह भी जानने का प्रयास किया कि जिन क्षेत्रों में सड़क परियोजनाओं के लिए पेड़ काटे जाते हैं, वहां भरपाई के बदले पौधारोपण के लिए जमीन की व्यवस्था की जा रही है या नहीं।
5 किलोमीटर के दायरे पर सवाल
NHAI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर लगातार रोक लगा रखी है। इससे सार्वजनिक सड़क परियोजनाओं के निर्माण में परेशानी आ रही है।
उन्होंने कहा कि पेड़ों की कटाई की भरपाई के लिए पौधारोपण कानूनी रूप से अनिवार्य है। पंजाब सीमावर्ती राज्य है और रणनीतिक दृष्टि से कुछ सड़कों का निर्माण आवश्यक है। इसलिए सड़क परियोजनाओं को केवल पेड़ों की कटाई के कारण रोका नहीं जा सकता।
पीठ ने पूछा कि क्या पेड़ों की कटाई वाली जगह भरपाई करने को पांच किलोमीटर के दायरे में पौधारोपण के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाती है। इस पर तुषार मेहता ने बताया कि कुछ मामलों में जमीन उपलब्ध कराई जाती है, जबकि कुछ मामलों में पांच किलोमीटर के दायरे में जमीन मिलना संभव नहीं होता। हालांकि, ऐसे मामलों में दूसरी जगह पौधारोपण किया जा रहा है।
परियोजनाएं रुकने पर जताई चिंता
NHAI की ओर से कहा गया कि हाई कोर्ट के निर्देश के कारण सार्वजनिक परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। सड़क निर्माण के कई काम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि वह सड़क निर्माण के लिए आवश्यक जमीन वाले क्षेत्रों में भरपाई करने को पौधारोपण के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव पेश करे।
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को याचिका की प्रति पंजाब सरकार को देने का निर्देश भी दिया। साथ ही राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है।
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पंजाब में 3.67 प्रतिशत ही वन क्षेत्र
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 24 दिसंबर 2025 को पंजाब में घटते वन क्षेत्र पर चिंता जताई थी। हाई कोर्ट ने विभिन्न परियोजनाओं और अन्य गतिविधियों के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी। इसके बाद समय-समय पर इस आदेश में बदलाव भी किया गया।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पंजाब का केवल 3.67 प्रतिशत हिस्सा ही वन क्षेत्र है। यह राजस्थान के मौजूदा वन क्षेत्र 4.87 प्रतिशत से भी कम है। हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी NHAI की उस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की थी, जिसमें जीरकपुर बाईपास परियोजना के लिए करीब 5000 पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया था। यह बाईपास पंजाब के जीरकपुर को हरियाणा में चंडीगढ़-शिमला राजमार्ग पर स्थित टोल प्लाजा से जोड़ने के लिए प्रस्तावित है।
(इनपुट- पीटीआई)
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