होम›मुकदमे›सुप्रीम कोर्ट के आदेश से गन्ना किसानों को बकाया भुगतान पर 15% ब्याज मिलने की संभावना
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से गन्ना किसानों को बकाया भुगतान पर 15% ब्याज मिलने की संभावना

उत्त प्रदेश में 1990 के दशक से चली आ रही गन्ना बकाया राशि पर 15% ब्याज का प्रावधान लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की चुनौती खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि 14 दिनों के भीतर भुगतान न होने पर ब्याज देना किसानों के कर्ज से बचाव के लिये आवश्यक है, जबकि अब तक ₹1,936 करोड़ के बकाया में ब्याज की कोई वसूली नहीं हुई। किसानों ने पूर्ण ब्याज की सालाना सूची और गन्ना मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल की मांग भी रखी है।

9 अक्टूबर 2026 को 10:04 am बजे
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से गन्ना किसानों को बकाया भुगतान पर 15% ब्याज मिलने की संभावना

सौजन्य से:- ChiniMandi

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में चीनी मिलें करीब 20 अक्टूबर से अपना संचालन शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। इस बीच, गन्ना किसान दशकों से लंबित गन्ना भुगतान पर ब्याज मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। द टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित के अनुसार, कुछ बकाया मामले 1990 के दशक तक पुराने हैं। इस मामले ने 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश और 31 अगस्त को इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद फिर से ध्यान खींचा है। अदालत के सामने रखे गए विवरण के मुताबिक, चीनी मिलों से बकाया वसूली प्रमाणपत्रों (Recovery Certificates) के तहत कुल ₹1,936 करोड़ की वसूली बाकी थी। इसमें ₹1,087 करोड़ गन्ने का मूल बकाया और ₹849.5 करोड़ ब्याज शामिल था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि ब्याज के मद में अब तक “एक पैसा भी वसूल नहीं किया गया है।” अदालत ने अधिकारियों की भी आलोचना की, क्योंकि पहले 15% ब्याज दर का निर्देश दिए जाने के बावजूद वसूली प्रमाणपत्रों में 12% ब्याज की गणना की गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की उस चुनौती का निपटारा कर दिया, जो उसने हाई कोर्ट की कार्यवाही के खिलाफ दी थी। राज्य सरकार का तर्क था कि आर्थिक संकट से जूझ रही चीनी मिलों पर 15% ब्याज चुकाने का दबाव डालने से वे दिवालिया हो सकती हैं। इससे मिलें बंद होने और किसानों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई गई थी।

सरकार ने उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम, 1953 की धारा 17(3) का भी हवाला दिया था, जिसके तहत ब्याज कम करने या माफ करने का प्रावधान है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने दोहराया कि गन्ने की आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर भुगतान और देरी होने पर 15% ब्याज का प्रावधान किसानों को कर्ज के जाल से बचाने के लिए अनिवार्य सुरक्षा उपाय हैं।

14 दिन में भुगतान और देरी पर ब्याज का नियम

इस विवाद के केंद्र में वह कानूनी प्रावधान है, जिसके तहत चीनी मिलों को किसानों से खरीदे गए गन्ने का भुगतान 14 दिनों के भीतर करना होता है। तय समयसीमा में भुगतान नहीं होने पर ब्याज देय हो जाता है। जनता दल के पूर्व विधायक और राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन (RKMS) के प्रमुख वी.एम. सिंह के लिए यह घटनाक्रम लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है। सिंह ने वर्ष 2006 में गन्ने के विलंबित भुगतान और ब्याज के मुद्दे पर कार्रवाई की मांग करते हुए जनहित याचिका (PIL) दायर की थी।सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, “यह आदेश एक बड़ी उपलब्धि है। सोचिए, किसी किसान के लिए 30 साल तक इंतजार करने का क्या मतलब होता है।”

किसानों ने मांगा सालवार ब्याज का पूरा हिसाब

बिजनौर में किसान धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कैलाश लांबा ने कहा कि किसानों की तत्काल मांग है कि प्रत्येक किसान को मिलने वाले ब्याज का सालवार और व्यक्तिगत विवरण उपलब्ध कराया जाए।लांबा ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा कि, अदालत ने ब्याज देय होने की बात कही है और किसानों का मानना है कि वास्तविक बकाया राशि दिखाई जा रही रकम से कहीं अधिक है।उनके अनुसार, भुगतान में लंबे समय तक हुई देरी ने छोटे किसानों पर भारी आर्थिक बोझ डाला है। किसानों को खाद, मशीनरी और किराए पर लिए गए संसाधनों का खर्च अपनी जेब से उठाना पड़ा, जबकि गन्ने का पैसा समय पर नहीं मिला। इसके अलावा, उन्हें शादी-ब्याह जैसे बड़े घरेलू खर्च भी संभालने पड़े।

₹600 प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग

किसान महंगाई और सीएनजी तथा डीजल की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए गन्ने का मूल्य करीब ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग भी कर रहे हैं। कैलाश लांबा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से किसानों की उम्मीदें बढ़ी हैं। यह मामला इतना पुराना हो चुका है कि पहले के वर्षों में गन्ना आपूर्ति करने वाले कुछ किसानों की मृत्यु भी हो चुकी है। इसके बावजूद, कई किसानों ने उन वर्षों की गन्ना तौल पर्चियां अब तक संभालकर रखी हैं।

2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ सकता है मुद्दे का महत्व

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गन्ना भुगतान का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। गन्ना किसानों के लिए समय पर भुगतान और बकाया ब्याज एक बार फिर प्रमुख चिंता बनकर उभरे हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव किसानों और खाप प्रतिनिधियों के साथ समयबद्ध गन्ना भुगतान के मुद्दे पर संवाद कर चुके हैं। वहीं, राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी भी गन्ना अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं। अब किसानों की नजर इस बात पर है कि अदालत के आदेश के बाद बकाया ब्याज की वास्तविक राशि का पूरा हिसाब कब सामने आता है और वसूली की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने सीजीपी विरोध के दौरान मेट्रो और रेल सेवाओं पर पूर्ण रोक न लगाने का निर्देश दिया
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने सीजीपी विरोध के दौरान मेट्रो और रेल सेवाओं पर पूर्ण रोक न लगाने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने अंध्रप्रदेश सरकार के अपील को खारिज कर 34% BC कोटा को अस्वीकार किया
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने अंध्रप्रदेश सरकार के अपील को खारिज कर 34% BC कोटा को अस्वीकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने तय किया: पीड़ित को भी मिले तेज़ी से न्याय का अधिकार
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने तय किया: पीड़ित को भी मिले तेज़ी से न्याय का अधिकार

केरल हाई कोर्ट ने निलम्बुर‑नंजंगुड रेल परियोजना के DPR को 14 अक्टूबर तक पूरा करने का आदेश दिया
मुकदमे

केरल हाई कोर्ट ने निलम्बुर‑नंजंगुड रेल परियोजना के DPR को 14 अक्टूबर तक पूरा करने का आदेश दिया

CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026 लागू, भर्ती व प्रतिनियुक्ति के नियम तय
मुकदमे

CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026 लागू, भर्ती व प्रतिनियुक्ति के नियम तय

अलाहाबाद हाई कोर्ट ने फेंसिडिल कोडिन केस में PITNDPS हिरासत को रद्द किया
मुकदमे

अलाहाबाद हाई कोर्ट ने फेंसिडिल कोडिन केस में PITNDPS हिरासत को रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं के मूल्य पर सीमा लगाने के आह्वान से व्यापारिक मार्जिन पर नई चर्चा शुरू की
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं के मूल्य पर सीमा लगाने के आह्वान से व्यापारिक मार्जिन पर नई चर्चा शुरू की

CAPF में नया सेवा नियम: IPS अफसरों का डेपुटेशन बढ़ा, कैडर अफसरों ने करियर अवसरों पर सवाल उठाए
मुकदमे

CAPF में नया सेवा नियम: IPS अफसरों का डेपुटेशन बढ़ा, कैडर अफसरों ने करियर अवसरों पर सवाल उठाए

ताज़ा ख़बरें