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CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026 लागू, भर्ती व प्रतिनियुक्ति के नियम तय

केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 ने ग्रुप‑ए अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों के लिए एक समान ढांचा स्थापित किया है, जिसमें इंस्पेक्टर जनरल और अतिरिक्त महानिदेशक स्तर पर क्रमशः 50 % और 67 % पद आयपीएस प्रतिनियुक्ति से भरने का प्रावधान है। इस अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाओं की सुनवाई जारी है।

8 अक्टूबर 2026 को 07:04 pm बजे
CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026 लागू, भर्ती व प्रतिनियुक्ति के नियम तय

सौजन्य से:- Jagran

CAPF अफसरों की भर्ती, सेवा शर्तों और प्रतिनियुक्ति पर नया कानून लागू

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 लागू हो गया है, जो सीएपीएफ में ग्रुप-ए अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों के लिए एक साझा ढांचा प्रदान करता है।

HighLights

- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 लागू

- आइपीएस प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे वरिष्ठ पद, कैडर अधिकारी चिंतित

- सुप्रीम कोर्ट में कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएं लंबित

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 गुरुवार को लागू हो गया। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, यह कानून सीएपीएफ में ग्रुप-ए के सामान्य ड्यूटी अधिकारियों और अन्य अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों के लिए साझा रूपरेखा तय करता है।

नए कानून के तहत इंस्पेक्टर जनरल के स्तर पर 50 प्रतिशत पद आइपीएस से प्रतिनियुक्ति के जरिये भरे जाने हैं। अतिरिक्त महानिदेशक के स्तर पर कम-से-कम 67 प्रतिशत पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे। विशेष महानिदेशक और महानिदेशक के पद केवल प्रतिनियुक्ति के जरिए भरे जाएंगे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की यह अधिसूचना ऐसे समय जारी हुई है, जब सुप्रीम कोर्ट में हजारों सीएपीएफ अधिकारियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इन याचिकाओं में संसद द्वारा अप्रैल में पारित कानून की वैधता को चुनौती दी गई है।

इस अधिसूचना में कहा गया है, 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 की धारा एक की उपधारा (2) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार आठ अक्टूबर, 2026 से इस अधिनियम के प्रविधान लागू कर रही है।'

यह अधिनियम सीएपीएफ में आइपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट के मई, 2025 के फैसले की पृष्ठभूमि में आया है। पिछले साल अक्टूबर में शीर्ष अदालत ने 2025 के फैसले पर पुनर्विचार की मांग करने वाली केंद्र की याचिका खारिज कर दी थी।

अधिनियम केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल

(सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और सेवा की अन्य शर्तों को नियंत्रित करता है।

केंद्र ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि संबंधित सीएपीएफ में ग्रुप-ए के सामान्य ड्यूटी अधिकारियों की नियुक्ति अब सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम के तहत नियंत्रित होती है।

केंद्र ने कहा था कि यह कानून पांचों सीएपीएफ—सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआइएसएफ, आइटीबीपी और एसएसबी—में अधिकारियों की भर्ती का तरीका तय करने के साथ-साथ प्रतिनियुक्ति के जरिये भर्ती और सेवा शर्तों को निर्धारित करने का अधिकार स्पष्ट रूप से केंद्र सरकार को देता है।

इन बलों के कैडर अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कर आरोप लगाया कि यह कानून प्रतिनियुक्ति पर आने वाले आइपीएस अफसरों की तुलना में उनके करियर में आगे बढ़ने के अवसर सीमित करता है।

इन अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को मई, 2025 के फैसले को लागू करने का निर्देश देने की मांग भी की है। फैसले में कहा गया था कि सीएपीएफ में इंस्पेक्टर जनरल के पद तक आइपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति दो साल की अवधि में 'धीरे-धीरे कम' की जानी चाहिए।

अदालत ने कहा था कि इससे कैडर अधिकारियों को अधिक अवसर मिलेंगे और उनकी पदोन्नति में देरी से बलों का मनोबल प्रभावित हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था-प्रतिनियुक्ति पर तय पदों की संख्या घटाएं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) स्तर तक सीएपीएफ कैडर में प्रतिनियुक्ति के लिए तय पदों की संख्या समय के साथ घटाई जानी चाहिए और इसके लिए अधिकतम दो साल की समयसीमा रखी थी। अदालत ने कैडर समीक्षा का निर्देश भी दिया था।

सीएपीएफ के लिए साझा विधायी ढांचा

यह कानून पांचों सीएपीएफ के ग्रुप-ए सामान्य ड्यूटी अधिकारियों व अन्य अधिकारियों की सेवा से जुड़े मामलों की अलग व्यवस्थाओं की जगह साझा विधायी ढांचा लेकर आया है।

सेवानिवृत्त सीएपीएफ अधिकारियों के समूह ने सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर, 2025 के आदेश को लागू नहीं करने के मामले में तत्कालीन गृह सचिव गोविंद मोहन पर याचिका दायर की थी।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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