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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: टिकट न होने पर भी ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि यदि यात्री के पास ट्रेन टिकट नहीं मिला है तो भी दुर्घटना के पीड़ित या उनके परिवार को मुआवजा मिलने से इनकार नहीं किया जा सकता। इस आदेश के अनुसार, गुजरात हाई कोर्ट के पूर्व निर्देश को रद्द कर 27 सितंबर 2017 को अहमदाबाद से सूरत जाते हुए गिरने वाले यात्री महेशभाई के माता-पिता को 8 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।

26 सितंबर 2026 को 07:04 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: टिकट न होने पर भी ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

सौजन्य से:- Jagran

ट्रेन हादसे में टिकट नहीं मिला फिर भी मिलेगा मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि ट्रेन हादसे में यात्री के पास टिकट न मिलने पर भी मुआवजे का दावा खारिज नहीं होगा।

HighLights

- हादसे में टिकट न मिलने पर भी मुआवजा मिलेगा।

- सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट का आदेश रद्द किया।

- मृतक यात्री के माता-पिता को आठ लाख रुपये मुआवजा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हादसे में जान गंवाने वाले किसी यात्री के पास से ट्रेन टिकट नहीं मिलने से मुआवजे का दावा खारिज नहीं हो जाता है। अदालत ने गुजरात में चलती ट्रेन से गिरकर मरने वाले यात्री के माता-पिता को 30 दिनों के भीतर आठ लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और एएस चंदुरकर की पीठ ने शुक्रवार को गुजरात हाई कोर्ट के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें हादसे के शिकार महेशभाई के माता-पिता को मुआवजा देने से इन्कार कर दिया गया था। महेशभाई 27 सितंबर, 2017 को अहमदाबाद होते हुए सूरत जा रहे थे। रास्ते में झटका लगने से जनरल डिब्बे से गिरकर उनकी मौत हो गई थी।

पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट ने यात्री के पास ट्रेन का टिकट नहीं होने को बहुत ज्यादा महत्व दिया। इसने पीड़ित के पिता द्वारा शपथ लेकर दिए गए बयान पर ध्यान नहीं दिया।

टिकट नहीं मिलना मुआवजे के दावे को कमजोर नहीं करता- सुप्रीम कोर्ट

हाई कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान नहीं दिया कि पीड़ित एक महीने से ज्यादा समय तक अस्पताल में भर्ती रहा था। इस बात की पूरी संभावना है कि वह एक वास्तविक यात्री था। उसके पास से टिकट नहीं मिलना मुआवजे के दावे को कमजोर नहीं करता।

इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने रेलवे दावा ट्रिब्यूनल के आदेश को बहाल कर दिया। 17 जून, 2022 को ट्रिब्यूनल ने माना था कि महेशभाई एक अवांछित घटना का शिकार हुए थे। उनके माता-पिता को दुर्घटना की तारीख से आदेश की तारीख तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ आठ लाख रुपये के मुआवजे का हकदार माना गया।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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