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परिवारिक विवादों में न्यायालय‑एडीआर का सहयोगी मॉडल

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि पारिवारिक मामलों में अदालतों को एडीआर के साथ मिलकर काम करना चाहिए; एडीआर अदालतों की जगह नहीं लेता बल्कि उन्हें गति, गोपनीयता और आपसी सहमति के साथ समाधान देने में मदद करता है। देर से निर्णय रिश्तों में तनाव बढ़ा देते हैं, जबकि सही समय पर मध्यस्थता जैसे एडीआर उपाय लंबित मामलों को कम कर सकते हैं, जैसा कि बिहार, ओडिशा, असम और सिक्किम में दर्शाए गए आंकड़ों से स्पष्ट है।

26 सितंबर 2026 को 02:04 pm बजे
परिवारिक विवादों में न्यायालय‑एडीआर का सहयोगी मॉडल

सौजन्य से:- Hindustan

‘परिवारिक विवादों में अदालत-एडीआर मिलकर काम करें’

सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने गुवाहाटी में आयोजित 'पारिवारिक झगड़ों में एडीआर बनाम एडज्यूडिकेशन' सम्मेलन में कहा कि पारिवारिक विवादों के लिए अदालत और वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) को साथ मिलकर काम करना चाहिए। एडीआर का मकसद अदालतों की जगह लेना नहीं है, बल्कि उन्हें सहायता प्रदान करना है।

सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि परिवारिक विवादों का समाधान करने के लिए अदालत और वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) दोनों को मिलकर काम करना चाहिए। उनका कहना है कि जल्दी फैसला ज़रूरी है, लेकिन न्याय और सही समाधान की कीमत पर नहीं। जस्टिस नागरत्ना ने गुवाहाटी में परिवारिक विवादों पर आयोजित ‘पारिवारिक झगड़ों में एडीआर बनाम एडज्यूडिकेशन: चुनौतियां और आगे का रास्ता’ विषय पर दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एडीआर का मकसद अदालतों की जगह लेना नहीं है। यह अदालतों की मदद करने वाला तरीका है, जिससे परिवारिक मामलों में तेजी, गोपनीयता और आपसी सहमति से समाधान मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि परिवारिक मामलों में फैसलों में देरी होने से रिश्तों में पहले से मौजूद तनाव बढ़ बढ़ जाते हैं। ऐसे मामलों में मध्यस्थता जैसे एडीआर के तरीकों का सही समय पर इस्तेमाल देरी कम करने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि एडीआर मैकेनिज्म का सही इस्तेमाल लंबित मामला कम करने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि अक्तूबर 2024 तक बिहार में 70,365, ओडिशा में 36,792, असम में 7,399 और सिक्किम में 149 मामले लंबित हैं। मुकदमों को हथियार बनाने का जिक्र करते हुए, जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यह एक ऐसी घटना है जहां मुकदमे की प्रक्रिया ही दूसरे पक्ष के लिए सजा और एक पक्ष के लिए बदला लेने का हथियार है।

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