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मोदी सरकार ने OBC ‘क्रीमी लेयर’ नियम लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दो साल की रियायत माँगी

सुप्रीम कोर्ट ने 2012 से OBC आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने का आदेश दिया था, पर केंद्र ने मौजूदा नियुक्तियों और प्रमाणपत्रों पर असर को देखते हुए इसे भविष्य से लागू करने के लिए दो साल का अतिरिक्त समय माँगा है। सरकार ने कहा कि सभी हितधारकों से सलाह‑मशवरा करके समान नीति तैयार करने के बाद ही यह बदलाव संभव होगा।

25 सितंबर 2026 को 04:04 am बजे
मोदी सरकार ने OBC ‘क्रीमी लेयर’ नियम लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दो साल की रियायत माँगी

सौजन्य से:- Navbharat Times

ओबीसी आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर के नियम लागू करने को लेकर नया अपडेट सामने आया है। इसके तहत सरकार ने नई नीति को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 2 साल का और समय मांगा है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे 2012 से लागू करने के लिए कहा था। केंद्र सरकार ने अपनी मजबूरी बताई है।

अमितानंद चौधरी, नई दिल्ली: OBC आरक्षण के लिए 'क्रीमी लेयर' के नियम को 2012 से लागू करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने की चुनौती का सामना करते हुए, केंद्र सरकार ने कोर्ट से गुजारिश की कि इस फैसले को भविष्य से लागू किया जाए और इसे लागू करने के लिए दो साल का समय दिया जाए। कोर्ट ने मार्च में कहा था कि किसी उम्मीदवार को OBC आरक्षण से बाहर करने के लिए 'क्रीमी लेयर' तय करने का एकमात्र आधार माता-पिता की आय नहीं हो सकती; इसके लिए 'आय/संपत्ति टेस्ट' के साथ-साथ माता-पिता की नौकरी का दर्जा और श्रेणी को भी एक अतिरिक्त आधार के तौर पर देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने इस फैसले को 2012 से लागू करने का आदेश दिया था, जब यह मामला पहली बार दायर किया गया था।

सरकार ने बताई मजबूरी

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की ओर से दाखिल एक लिखित नोट में सरकार ने कहा कि योग्यता के बदले हुए नियमों को पिछली तारीख से लागू करने पर, उस समय के नियमों और सर्टिफिकेट के आधार पर हुई नियुक्तियों और एडमिशन पर असर पड़ सकता है। इससे OBC-NCL स्टेटस, सीनियरिटी, सर्विस की शर्तों और करियर में आगे बढ़ने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो सकती है।

नोट में कहा गया है कि इस फैसले को पिछली तारीख से लागू करने पर उम्मीदवारों की सर्विस और कैडर अलॉटमेंट में बदलाव हो सकते हैं। क्योंकि इससे CSE-2012 और उसके बाद नियुक्त लोगों की सर्विस पर असर पड़ेगा और सिविल सर्वेंट्स के बीच इसका व्यापक असर (कैस्केडिंग इफेक्ट) देखने को मिलेगा। इस असर का सामना न सिर्फ OBC उम्मीदवार करेंगे, बल्कि सिविल सर्विस की सभी कैटेगरी (जिनमें अनरिजर्व्ड कैटेगरी भी शामिल है) पर भी इसका असर पड़ेगा।

सरकार ने मांगा 2 साल का समय

सरकार ने कहा कि सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत करने और OBC क्रीमी लेयर स्टेटस तय करने के लिए एक समान पॉलिसी या तरीका बनाने के बाद, पदों की बराबरी (इक्विवेलेंस) तय करने की जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसे दो साल का उचित समय दिया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि भारत सरकार सिर्फ इस माननीय अदालत द्वारा तय किए गए कानून को लागू करने में दो साल की सीमित देरी की मांग कर रही है, ताकि प्रशासनिक जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग अधिकारों में तालमेल बिठाया जा सके और बराबरी लाने की एक असरदार प्रक्रिया पूरी की जा सके।

लेखक के बारे मेंSanjeev Kumarसंजीव कुमार (सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर)

संजीव कुमार वर्तमान में नवभारत टाइम्स में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वे मई 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। पत्रकारिता में ऑनलाइन न्यूज डेस्क पर उन्हें काम करने का 6 साल का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह अमर उजाला, वन इंडिया हिंदी और दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में सेवा दे चुके हैं। वह वर्तमान में नवभारत टाइम्स में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए स्रोतों की जांच के साथ तथ्यों की पुष्टि अनिवार्य रूप से करते हैं।

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संजीव कुमार ने पत्रकारिता में स्नातक और मास्टर की डिग्री हासिल करने के बाद अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया, यहां उन्होंने हेडलाइन, ब्रेकिंग न्यूज, लाइव कवरेज, स्पेशल खबरों को यूजर के इंटरेस्ट के अनुसार बनाने के तरीके को बारीकी से समझा। इसके बाद उन्होंने वन इंडिया हिंदी में नेशनल डेस्क पर काम किया। फिर दैनिक जागरण में बिहार-झारखंड की लोकल खबरों पर 1 साल 6 महीने तक काम किया है। इसके बाद नवभारत टाइम्स में पारी की शुरुआत की।

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मूल रूप से बिहार के बेगूसराय के रहने वाले संजीव कुमार ने वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से बैचेलर इन मीडिया साइंस में स्नातक किया। फिर आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी से मास्टर इन मीडिया बिजनेस मैनेजमेंट की भी डिग्री ली। इसके अलावा उन्होंने मीडिया से संबंधित कई ऑनलाइन कोर्स भी किए हैं।... और पढ़ें

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