सुप्रीम कोर्ट ने आईसीयू स्टाफ की भर्ती को 6 महीनों, बुनियादी ढांचा 9 महीनों में पूरा करने का आदेश दिया
कोर्ट ने केंद्र‑राज्य सरकारों को 2026 की गाइडलाइंस के तहत आईसीयू कर्मियों की भर्ती छह महीने में और इन्फ्रास्ट्रक्चर नौ महीने में समाप्त करने का निर्देश दिया है। सभी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों को 5 नवंबर तक प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी, तथा अगले सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित है।

सौजन्य से:- Jagran
'ICU के लिए 6 महीने में हो स्वास्थकर्मियों की भर्ती', सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को 2026 की गाइडलाइंस का पालन करते हुए 6 महीने में स्टाफ भर्ती और 9 महीने में इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा करने का निर्देश दिया है।
HighLights
- आईसीयू स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया 6 महीने में पूरी करने का निर्देश।
- आईसीयू इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों को 9 महीने में पूरा किया जाए।
- केंद्र और राज्यों को 5 नवंबर तक स्थिति रिपोर्ट देनी होगी।
माला दीक्षित, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश में गहन चिकित्सा कक्षों (आईसीयू) की सुविधाओं और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इंटेंसिव केयर सर्विसेज के ऑर्गनाइजेशन और डिलीवरी के लिए 2026 की गाइडलाइंस का समयबद्ध तरीके से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
इसमें आईसीयू इंफ्रास्ट्रक्टर की खास जरूरतों के लिए ज्यादा से ज्यादा नौ महीने और क्रिटिकल-केयर स्टाफ की भर्ती के लिए छह महीने का समय तय किया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि आईसीयू के संचालन के लिए जरूरी पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए और हर हाल में छह महीने के भीतर पूरी की जाए।
यह निर्देश न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर महादेवन की पीठ ने आईसीयू और क्रिटिकल केयर सर्विसेज से संबधित मामले में सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने समिति की ओर से पेश गहन चिकित्सा सेवाओं के संगठन और संचालन के लिए दिशा निर्देश-अनुपालन की समय -सीमा संबंधी प्रस्ताव पर विचार किया।
कोर्ट ने व्यापक रूप से समिति द्वारा सुझाई गई समय सीमाओं से सहमति जताई, लेकिन जहां 12 महीने की अवधि प्रस्तावित थी, उसे घटाकर नौ महीने कर दिया है। लेबल वन आईसीयू इन्फ्रास्ट्रक्टर के लिए कमेटी ने कुछ बड़ी जरूरतों के लिए 12 महीने तक का समय तय किया था लेकिन कोर्ट ने उसे कम कर नौ माह कर दिया है।
कोर्ट ने लेबल वन आईसीयू के लिए बुनियादी ढांचे से जुड़े अलग-अलग मानकों के अनुपालन की समय-सीमा तय की है। आईसीयू के स्थान, आकार, बुनियादी ढांचे और नर्सिंग स्टेशन से जुड़े प्रविधानों के लिए नौ महीने की अवधि होगी।
आपातकालीन उपकरणों की खरीद प्रक्रिया तीन महीने में पूरी करनी होगी। उपकरणों की स्थापना के लिए डिलीवरी की स्थिति के आधार पर अधिकतम तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। इमेजिंग सेवाओं के लिए भी खरीद प्रक्रिया तीन महीने में पूरी करने का निर्देश हैं।
गैर आपातकालीन उपकरण और प्रयोगशाला सेवाओं के लिए अधिकतम तीन महीने जबकि अतिरिक्त सेवाओं के लिए एक महीने की समय सीमा तय की है। संक्रमण नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़े प्रविधानों का अनुपालन तत्काल करना होगा। दस्तावेजीकरण और ऑडिट के मामले में भी तत्काल अनुपालन के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आईसीयू के दिशा निर्देश किसी सुविधा को आईसीयू कहे जाने के लिए अनिवार्य हैं। वहीं स्तर दो और स्तर तीन आईसीयू होना किसी अस्पताल के लिए अनिवार्य नहीं है लेकिन जो अस्पताल स्तर दो या स्तर तीन आईसीयू का दावा करते हैं, उन्हें संबंधित सभी निर्धारित मानकों का पूरा पालन करना होगा।
उत्कृष्टता या विशेषज्ञता वाले अस्पतालों के लिए कोर्ट ने कहा है कि यदि उन्हें स्तर तीन की आईसीयू सुविधाएं रखना आवश्यक है तो उन्हें केंद्र सरकार के स्वास्थ्य सेवा निदेशालय द्वारा 2026 में जारी संबंधित दिशा निर्देशों का अनुपालन करना होगा।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पांच नवंबर तक देनी होगी स्थिति रिपोर्ट
पीठ ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पांच नवंबर तक स्थिति रिपोर्ट देने को कहा है। समिति रिपोर्टों की जांच कर अपनी टिप्पणियां कोर्ट के समक्ष रखेंगी। अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
पहाड़ी और दूर-दराज इलाकों को सीमित राहत है। ऐसे क्षेत्र में अतिरिक्त समय की जरूरत पर राज्य स्थिति रिपोर्ट में काम की प्रगति और जरूरी अतिरिक्त समय का ब्योरा देंगे। कोर्ट ने चेतावनी दी कि दिशा निर्देशों और तय सीमा के पालन में लापरवाही या चूक पर सख्त रुख अपनाया जा सकता है।
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