सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी ज़ोन में वाणिज्यिक कार्यवाही पर सील लगाने का कड़ा आदेश
कोर्ट ने सभी राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहाँ ज़मीं या इमारतें विशेष रूप से आवासीय उपयोग के लिये निर्धारित हैं, वहाँ कोई भी व्यावसायिक गतिविधि मिलने पर तुरंत उस स्थल को सील किया जाए। यह आदेश इस बात को स्पष्ट करता है कि मालिकाना अधिकार या चल रहे मुकदमों से सीलिंग की प्रक्रिया में कोई रुकावट नहीं आएगी, और चयनात्मक कार्रवाई को भी कड़ी नज़र से देखा जाएगा।

सौजन्य से:- Live Law Hindi
BREAKING| सुप्रीम कोर्ट का कमर्शियल एक्टिविटी के लिए इस्तेमाल हो रही रिहायशी जगहों को सील करने का आदेश
Shahadat
26 Sept 2026 11:49 AM IST
एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे खास तौर पर रिहायशी इस्तेमाल के लिए तय इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी को रोकने को प्राथमिकता दें। कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर कोई जगह मंज़ूरशुदा ज़मीन-इस्तेमाल की इजाज़त के खिलाफ कमर्शियल मकसद से इस्तेमाल होती पाई जाती है तो उसे सबसे पहले सील किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि जहां कोई इलाका खास तौर पर रिहायशी घोषित किया गया और सिर्फ़ रिहायशी इस्तेमाल की इजाज़त दी गई, वहां पाई जाने वाली किसी भी कमर्शियल एक्टिविटी के मामले में, "सबसे पहले उस जगह को सील किया जाना चाहिए।"
कोर्ट ने कहा,
"अगर ऐसे इलाकों में कोई कमर्शियल एक्टिविटी होती पाई जाती है तो उस जगह को सबसे पहले सील किया जाएगा।"
कोर्ट ने साफ़ किया कि भले ही प्रॉपर्टी के मालिकाना हक या दूसरे अधिकारों को लेकर कोई कानूनी मामला चल रहा हो, लेकिन ऐसा मामला सीलिंग की कार्रवाई को नहीं रोक सकता, अगर असल इस्तेमाल उस मकसद के खिलाफ है जिसके लिए ज़मीन या बिल्डिंग अलॉट और मंज़ूर की गई।
कोर्ट ने कहा,
"...अगर ज़मीन/बिल्डिंग का इस्तेमाल उस मकसद के खिलाफ हो रहा है, जिसके लिए उसे अलॉट किया गया तो ऐसे कानूनी मामले के लंबित होने से अधिकारियों को उस जगह को सील करने से नहीं रोका जा सकता..."
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह निर्देश बिल्डिंग बाय-लॉज़ और ज़मीन-इस्तेमाल से जुड़ी पाबंदियों को लागू करने के मामले की सुनवाई के दौरान दिया। इस मामले में कोर्ट उस मुद्दे की जांच कर रही है जिसमें ज़मीन या बिल्डिंग प्लान जिस मकसद के लिए अलॉट या मंज़ूर किए गए थे, उसके उलट जगह का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कोर्ट ने अधिकारियों को "चुनिंदा कार्रवाई" (pick-and-choose) का तरीका अपनाने के खिलाफ भी चेतावनी दी और कहा कि किसी भी तरह की भेदभावपूर्ण कार्रवाई को सख्ती से देखा जाएगा।
22 सितंबर को जारी एक नए आदेश में ये निर्देश दिए गए:
"(i) फिलहाल, अधिकारी यह पक्का करने को प्राथमिकता देंगे कि जिन इलाकों को खास तौर पर रिहायशी (Residential) दिखाया गया है और जहाँ राज्य सरकार ने सिर्फ़ रिहायशी इस्तेमाल की मंज़ूरी दी है, वहाँ कोई कमर्शियल गतिविधि न हो। अगर ऐसे इलाकों में कोई कमर्शियल गतिविधि होती पाई जाती है, तो उस जगह को सबसे पहले सील कर दिया जाएगा।
(ii) जिन इलाकों का इस्तेमाल साफ़ तौर पर तय नहीं है (जैसे कमर्शियल या रिहायशी), वहाँ 'मिक्स्ड यूज़' (मिली-जुली गतिविधि) के सवाल पर भी विचार करना पड़ सकता है। हालाँकि, अभी के लिए, मौजूदा स्थिति (Status quo) में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। कागज़ी कार्रवाई जारी रह सकती है।
(iii) किसी ऐसी बिल्डिंग/ज़मीन/इलाके के मामले में जिस पर कोई कानूनी विवाद (lis) चल रहा हो—चाहे वह मालिकाना हक या किसी और बात को लेकर निजी व्यक्तियों के बीच हो, या सरकार और संबंधित पक्ष के बीच—अधिकारियों द्वारा उस जगह को सील करने में इस विवाद के लंबित होने से कोई रुकावट नहीं आएगी, बशर्ते उसका इस्तेमाल उस मक़सद के खिलाफ़ हो रहा हो जिसके लिए ज़मीन/बिल्डिंग अलॉट की गई थी और जिसके लिए सक्षम अधिकारी ने प्लान को मंज़ूरी दी थी।"
इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर, 2026 को होगी।
Cause Title: Loganathan v. The State of Tamil Nadu & Ors.
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