सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध कॉलोनियों पर सख्त कदम, न्यायिक आयोग बनाकर ध्वस्तीकरण का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अनगिनत अवैध कॉलोनियों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग गठित किया है, जिसका मुख्य काम उल्देपुर सहित अन्य कॉलोनियों की जाँच करना है। कोर्ट ने अवैध निर्माण को ध्वस्त करने और आयोग की स्थापना हेतु राज्य सरकार को एक सप्ताह में 35 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। आयोग की रिपोर्ट को आगे सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।

सौजन्य से:- Amar Ujala
सीलिंग का खौफ: सुप्रीम कोर्ट सख्त, न्यायिक आयोग गठित, मेडा की भूमिका-उल्देपुर समेत अन्य कॉलोनियों की होगी जांच
मेरठ में अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित किया है। उल्देपुर में अवैध निर्माण ध्वस्त करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
विस्तार
मेरठ महानगर में बिना मानचित्र अनगिनत अवैध कॉलोनियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट नाराज है। बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से आदेश जारी किया गया है कि अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन होगा।
खासतौर पर उल्देपुर गांव में अवैध कॉलोनियों के लिए किसने जमीन दी, खरीद-फरोख्त कैसे हुई, पांच साल से विकसित होने के दौरान कॉलोनियों पर मेरठ विकास प्राधिकरण की क्या भूमिका रही है, इसकी पड़ताल होगी।
न्यायिक आयोग के गठन के लिए राज्य सरकार को पहले चरण में 35 लाख रुपये एक सप्ताह के अंदर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने होंगे। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस सुधांशु धूलिया को आवश्यकतानुसार अन्य सदस्यों को शामिल करने का अधिकार भी दिया गया है। नोडल के रूप में प्रमुख सचिव रहेंगे।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 21 सितंबर 2026 को सुनवाई हुई थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने शहर के जोन-ए में चिह्नित 16.726 हजार अवैध भवन को जब्त करने और सोफीपुर-लावड़ मार्ग स्थित उल्देपुर गांव में अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे।
कोर्ट के आदेश का ऑर्डर बृहस्पतिवार को जारी हो गया। इसमें अवैध निर्माण को लेकर कोर्ट का रुख सख्त है और मेरठ में अवैध कॉलोनियों की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया है। अब कोर्ट में विचाराधीन उल्देपुर में बसी अवैध सभी कॉलोनियां ध्वस्त होंगी। इसके बाद न्यायिक आयोग का दायरा बढ़ सकता है। यह आयोग शहर और उसके आसपास इलाके में अवैध कॉलोनियों की जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंप सकता है। इसके अलावा शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्किट सहित विकास प्राधिकरण के चारों जोन में आवासीय और व्यावसायिक भवनों का सर्वे कर अवैध निर्माण पर कार्रवाई की बात सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दी।
सुप्रीम कोर्ट ने मेडा के अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि उल्देपुर में मौजूद प्रत्येक अवैध ढांचे को जल्द से जल्द ध्वस्त किया जाए। मलबे को रोजाना तेजी से हटाने को कहा गया है ताकि आम लोगों को परेशानी न हो। न्यायिक आयोग को राज्य सरकार की ओर से सचिवालय और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कोर्ट ने आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के पारिश्रमिक के लिए राज्य सरकार को पहले चरण में 35 लाख रुपये एक सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने का निर्देश भी दिया है।
जोन-ए में 16.726 हजार निर्माण अवैध बताए :
मेरठ विकास प्राधिकरण द्वारा मेरठ को जोन-ए, जोन-बी, जोन-सी, जोन-डी चार हिस्सों में बांटकर अवैध निर्माण का सर्वे कराया गया। प्राधिकरण द्वारा जोन-ए में 16 टीम लगाकर सर्वे किया गया। इसमें 16.726 हजार निर्माणों को अवैध चिह्नित करने की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दी है। जिनमें 12.907 हजार आवासीय, 874 आवासीय-सह-गैर आवासीय और 2.945 हजार गैर आवासीय निर्माण शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी 16.726 निर्माणों के खिलाफ जल्द कार्रवाई करने और प्रथम चरण में कब्जाधारियों से परिसर खाली कराने के बाद सबको सील करने का आदेश दिया है।
सील संपत्तियों पर कार्रवाई और सेटबैक क्षेत्र में निर्माण
सुप्रीम कोर्ट में मेडा की ओर से शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्किट की स्टेटस रिपोर्ट सौंपी गई है। इसके अनुसार 44 सील की गई संपत्तियों में से 20 को ध्वस्त कर दिया गया है और उनका अवैध व्यावसायिक इस्तेमाल बंद करा दिया गया। इन 44 संपत्तियों में से 38 के भवन मानचित्र स्वीकृत थे लेकिन उनमें स्वीकृत निर्माण से अतिरिक्त निर्माण कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
छह संपत्तियां प्लॉट के रूप में बेची गई थीं और वहां बिना स्वीकृत नक्शे के आवासीय तथा व्यावसायिक निर्माण किए गए थे। इनमें छह भवन ध्वस्त कर दिए। कोर्ट ने बाकी संपत्तियों को भी जल्द ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त सुप्रीम कोर्ट के आदेश में 201 ऐसी संपत्तियों का भी उल्लेख है, जहां अनिवार्य सेटबैक क्षेत्र में अवैध निर्माण किया गया।
इनमें से 63 संपत्तियों के सेटबैक से अवैध निर्माण पूरी तरह हटा दिया गया है, जबकि 138 संपत्तियों में कार्रवाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने शेष 138 संपत्तियों के सेटबैक क्षेत्र से भी अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कार्रवाई केवल जोन-ए तक सीमित नहीं रहेगी। जोन-बी, सी और डी में कितने अवैध निर्माण हैं। इसकी रिपोर्ट भी अगली सुनवाई में पेश करनी होगी। चारों जोन में तेजी से कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि किसी जर्जर अवैध निर्माण के कारण भविष्य में कोई हादसा होता है और जनहानि होती है, तो संबंधित सरकारी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
ईडब्ल्यूएस-एलआईजी मकानों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में मेरठ में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी की 486 संपत्तियों में आवासीय उपयोग के बजाय व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने का भी उल्लेख है।
अधिकारियों ने इन सभी संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियां बंद कराने की कार्रवाई की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उसका सरोकार मेरठ शहर में प्रत्येक अवैध भवन, ढांचे और दुकान के ध्वस्तीकरण से है। हालांकि, ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के पात्र लोगों के पुनर्वास पर सरकार विचार कर सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होगी।
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