अपने आप पर भरोसा करने का जादू! दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद से मिली बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के दोषी रिक्शा चालक की सजा को उम्रकैद से घटाकर 20 साल कर दिया। जस्टिस संजय करोल और आगस्टीन जार्ज मसीह की पीठ ने युवावस्था की संभावना को देखते हुए फैसला सुनाया।

सौजन्य से:- Jagran
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सुधार की संभावना देख सामूहिक दुष्कर्म के दोषी की सजा घटाई
जस्टिस संजय करोल और आगस्टीन जार्ज मसीह की पीठ ने कहा कि उसने जब यह अपराध किया था, उस समय 25 साल का था। युवावस्था को देखते हुए उसमें सुधार की संभावना ह ...और पढ़ें
HighLights
- सामूहिक दुष्कर्म मामले में रिक्शा चालक को सुनाई गई थी उम्रकैद
- कोर्ट ने कहा युवावस्था को देखते हुए उसमें सुधार की संभावना है
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए एक रिक्शा चालक की सजा को उम्रकैद से घटाकर 20 साल का कारावास कर दिया।
जस्टिस संजय करोल और आगस्टीन जार्ज मसीह की पीठ ने कहा कि उसने जब यह अपराध किया था, उस समय 25 साल का था। युवावस्था को देखते हुए उसमें सुधार की संभावना है। उस व्यक्ति का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और जेल में उसका आचरण अच्छा रहा है।
पीठ ने कहा-सरकार ने न तो कोई ऐसा रिकॉर्ड प्रस्तुत किया है, जिससे पता चले कि उसमें सुधार मुमकिन नहीं है। न ही उसने याचिकाकर्ता के इस बयान का विरोध किया है कि दोषी ठहराए जाने के बाद से उसका आचरण अच्छा रहा है।
उल्लेखनीय है कि ट्रायल कोर्ट ने रिक्शा चालक को उसकी बची हुई जिंदगी के लिए कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और उसे पीड़िता को 25 हजार रुपये जुर्माना देने का भी आदेश दिया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा था।
इस मामले में पीड़िता ने रात के समय दिल्ली रेलवे स्टेशन से एक रिक्शा लिया। रिक्शा चालक ने भरोसा दिया कि वह उसे उसके घर छोड़ देगा। लेकिन, वह उसे सुनसान जगह ले गया, जहां पहले से एक और व्यक्ति मौजूद था।
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वहां दोनों ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। नई दिल्ली के आइपी एस्टेट पुलिस स्टेशन को किसी ने फोन कर घटना की जानकारी दी। सात सितंबर, 2016 को घटना की प्राथमिकी दर्ज की गई।
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