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सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: BCI 'गैराज में चल रहे कॉलेजों' को मान्यता देता है, दोषियों को वकील बनाता है

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की आलोचना करते हुए कहा कि वह 'गैराज में चल रहे कॉलेजों' को मान्यता देता है और दोषियों को वकील के रूप में पंजीकृत करता है। यह टिप्पणी एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई थी, जिसे एक आपराधिक मामले के चलते वकील के रूप में पंजीकृत करने से इनकार कर दिया गया था।

21 जुलाई 2026 को 07:13 am बजे
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: BCI 'गैराज में चल रहे कॉलेजों' को मान्यता देता है, दोषियों को वकील बनाता है

सौजन्य से:- Navbharat Times

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, एक 50 साल के चार्टर्ड अकाउंटेंट केआर सुदर्शन ने तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। केआर सुदर्शन ने सीए करने के बाद, लॉ की डिग्री हासिल की थी। लेकिन उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित होने के चलते तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल ने उन्हें वकील के रूप में रजिस्टर्ड करने से साफ इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ता सुदर्शन पर आरोप है कि उन्होंने ऐसी कंपनी के लिए कंसल्टेंट का काम किया था जो वित्तीय अनियमितताओं में शामिल थी।पांच जजों की बेंच कर रही सुनवाई

सुदर्शन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट निखिल गोयल ने बताया कि मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले को पांच जजों की बेंच के पास भेज दिया है। पता नहीं कि पांच जजों की बेंच इस मामले पर कब फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट की फुल बेंच के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और वकील के तौर पर एनरोलमेंट के लिए रिट याचिका भी दायर की थी।हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच ने 2015 में BCI को निर्देश दिया था कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जिन लॉ ग्रेजुएट्स के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं, उन्हें वकील के तौर पर एनरोल न किया जाए। बाद में, हाईकोर्ट की एक फुल बेंच ने एक दूसरे मामले में इस निर्देश को एक अस्थायी उपाय के तौर पर सही ठहराया, जो संसद द्वारा कानून में संशोधन किए जाने तक लागू रहना था।सुप्रीम कोर्ट ने BCI पर की तीखी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच चार्टर्ड अकाउंटेंट के.आर. सुदर्शन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। बेंच ने BCI की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एस. गुरुकृष्णकुमार से कहा, 'हम अभी इस पर आदेश दे सकते हैं। यह आदेश पूरी तरह से कानून के खिलाफ है।' जब सीनियर वकील ने कहा कि इसमें 'एक बड़ी चिंता' शामिल है, तो जस्टिस मेहता ने जवाब दिया कि असल बड़ी चिंता तो यह है कि BCI गैराज में चल रहे कॉलेजों को मान्यता दे रहा है। उन्होंने आगे कहा कि BCI पूरे देश में दोषियों को धड़ल्ले से एनरोल कर रहा है।पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या का जिक्र क्यों हुआ?

तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल ने याचिकाकर्ता के खिलाफ पेडिंग क्रिमिनल केस के चलते वकील के तौर पर एनरोल करने से इनकार कर दिया है। इसे लेकर याचिकाकर्ता के वकील निखिल गोयल ने बेंच से अंतरिम राहत की मांग की और पूर्व पीएम की हत्या का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के दोषियों में से एक, 31 साल की सजा काटने के बावजूद, अप्रैल 2026 में वकील के तौर पर एनरोल हुआ था।क्या है नियम?

जस्टिस मेहता ने कहा कि ऐसी पाबंदी 'एडवोकेट्स एक्ट, 1961' की धारा 24A के दायरे से बाहर है, जिसमें अयोग्यता का प्रावधान है। उन्होंने बार काउंसिल के रुख पर सवाल उठाते हुए गुरुकृष्णकुमार से पूछा कि याचिकाकर्ता को एनरोलमेंट से क्यों मना किया गया। गुरुकृष्णकुमार ने हाई कोर्ट के निर्देश का जिक्र किया, साथ ही यह भी माना कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत किसी के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होने पर उसे अयोग्य ठहराया जा सके।बता दें कि साल 2026 की शुरुआत में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 2015 के नजरिए की सही-गलत जांच के लिए मामला एक बड़ी बेंच को भेजा। बेंच ने पाया कि 'एडवोकेट्स एक्ट, 1961' हाई कोर्ट को एनरोलमेंट के लिए धारा 24A में बताई गई अयोग्यताओं के अलावा कोई अतिरिक्त अयोग्यता तय करने का अधिकार नहीं देता है।

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