शिवसेना के 6 सांसदों के विलय पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, स्पीकर के फैसले पर उठे सवाल
लोकसभा स्पीकर द्वारा शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मंजूरी देने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. याचिका में स्पीकर के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं और इसे गैर-कानूनी बताया गया है. मामले की जल्द सुनवाई की मांग की गई है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
शिवसेना UBT के 6 सांसदों के विलय का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, याचिका में स्पीकर के फैसले पर उठाए सवाल
लोकसभा स्पीकर द्वारा शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मंजूरी देने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर.
Published : July 21, 2026 at 1:21 PM IST
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्होंने शिव सेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट वाली शिव सेना में विलय को मंजूरी दी गयी थी. मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ के सामने वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने इस मामले पर जल्द से जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया.
कामत ने पीठ के सामने तर्क दिया कि यह एक बेहद जरूरी और महत्वपूर्ण मामला है. उन्होंने कहा कि स्पीकर ने गैर-कानूनी तरीके से हमारे 6 सांसदों को विरोधी दल में शामिल होने की मंजूरी दे दी है. उन्होंने आगे तर्क दिया कि यह घटना एक संवैधानिक पद की अहमियत को दर्शाती है. उन्होंने अदालत को बताया कि स्पीकर ने शनिवार की देर रात इस विलय को मंजूरी दी, जिससे पार्टी के लिए संसद का काम पूरी तरह से ठप हो गया है.
वकील की संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद, अदालत की पीठ इस मामले की जांच करने के लिए तैयार हो गई. पीठ ने कहा, "हम कल के बारे में तो नहीं कह सकते, लेकिन हम इसे सुनवाई के लिए जल्द ही सूचीबद्ध करेंगे."
लोकसभा स्पीकर ने 18 जून को उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट वाली शिव सेना में विलय को मान्यता दी थी. इस विलय के बाद लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई.
वकील निशांत पाटिल द्वारा दायर की गई इस याचिका में लोकसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव द्वारा 18 जुलाई को जारी किए गए सर्कुलर का कड़ा विरोध किया गया है. इस सर्कुलर में छह सांसदों- भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमप्रकाश राजे निम्बालकर, संजय बंडू जाधव, संजय देशमुख और संजय दीना पाटिल द्वारा शिंदे गुट के साथ किए गए एकतरफा "विलय" को कानूनी मान्यता दी गई थी.
याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता (शिवसेना UBT संसदीय दल के नेता) संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मिले विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर हुए हैं. वे लोकसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव द्वारा 18 जून को जारी किए गए उस सर्कुलर को चुनौती दे रहे हैं जो स्पष्ट रूप से असंवैधानिक, अवैध और नियमों के खिलाफ है.
याचिका के अनुसार, "विवादित सर्कुलर संसद के उन छह सदस्यों के कदमों को मान्यता या मंजूरी देता है, जिन्होंने अपनी मूल राजनीतिक पार्टी (शिवसेना- उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की सहमति, मंजूरी या अनुमति के बिना एकतरफा फैसला लिया. उन्होंने खुद को एक विरोधी राजनीतिक दल, यानी एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में 'विलय' करने की कोशिश की है."
याचिका में यह भी बताया गया कि शिवसेना (यूबीटी) राजनीतिक दल के पास 20 विधायक, 6 विधान परिषद सदस्य, 9 लोकसभा सांसद और 1 राज्यसभा सांसद हैं. इसमें आगे कहा गया कि इस विवादित सर्कुलर के कारण शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसदों की संख्या छह कम हो जाती है, जबकि एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के सांसदों की संख्या छह बढ़ जाती है.
याचिका में कहा गया है, "असल में, मौजूदा मामला पार्लियामेंट और राज्य विधानसभाओं में राजनीतिक पार्टियों के कामकाज को लेकर मौजूदा संवैधानिक संकट का एक बड़ा उदाहरण है. इस कोर्ट के लिए, संविधान के गार्डियन के तौर पर अपनी भूमिका निभाते हुए, उस सर्कुलर को रद्द करने के लिए असरदार निर्देश जारी करना और सदन में विरोधी राजनीतिक पार्टियों के साथ मिलीभगत करके डेमोक्रेटिक ढांचे को कमजोर करने की रेस्पोंडेंट नंबर 3 से 8 की कोशिशों को बेअसर करना बहुत ज़रूरी है."
याचिका में कहा गया है कि ऐसा बदलाव गैर-कानूनी, गैर-संवैधानिक है, और लोकसभा स्पीकर और लोकसभा सेक्रेटेरिएट की शक्तियों, जिम्मेदारियों और कामों से बाहर है.
याचिका में कहा गया है, "दसवीं अनुसूची का पैरा 4 विलय की अवधारणा को केवल दलबदल विरोधी कार्यवाही के दौरान बचाव के रूप में मान्यता देता है. इस मामले में, मूल राजनीतिक दल यानी शिवसेना (UBT) द्वारा प्रतिवादी सांसदों के खिलाफ अभी तक दलबदल की कोई कार्यवाही शुरू नहीं की गई है. इसलिए, यदि विवादित सर्कुलर माननीय स्पीकर के किसी फैसले पर आधारित है, तो वह संसद के एक अधिकारी के रूप में स्पीकर के अधिकारों और कार्यों के दायरे से बाहर है."
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से लोकसभा सचिवालय द्वारा 18 जून को जारी सर्कुलर को रद्द करने की मांग की गई है, जिसके तहत "लोकसभा में शिवसेना के 6 सदस्यों की पार्टी बदलने" और इसके परिणामस्वरूप "अठारहवीं लोकसभा में पार्टी की संशोधित स्थिति" को मान्यता दी गई है.
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