सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जजों की सुविधाओं पर कसा बड़ा दांव, संसद को मांगा एक कानून
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को दो सप्ताह के भीतर समिति गठित करने का निर्देश दिया है, जो रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों के लिए पूरे देश में एक समान सुविधाओं के दिशा-निर्देश तैयार करेंगे। कोर्ट ने राज्यों में मिलने वाली सुविधाओं में असमानता पर चिंता जताई है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दो हफ्तों में समिति बनाकर रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों के लिए पूरे देश में एक समान सुविधाओं के दिशा निर्देश तैयार करने का आदेश दिया। कोर्ट ने राज्यों में मिलने वाली सुविधाओं में असमानता पर चिंता भी जताई।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर एक समिति का गठन करे, जो हाई कोर्ट के रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाओं के लिए पूरे देश में एक समान दिशा-निर्देश तैयार करे।
कोर्ट ने सवाल उठाया कि कुछ राज्यों की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के लिए दी जाने वाली 45,000 से 50,000 रुपये की राशि में क्या एक ड्राइवर और सुरक्षा कर्मी की व्यवस्था संभव है?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच हाई कोर्ट के रिटायर्ड जजों को मिलने वाली सुरक्षा और अन्य सेवानिवृत्ति सुविधाओं से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में रिटायर्ड जजों को मिलने वाली सुविधाओं में काफी असमानता है।
मुख्य न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि राज्यों के बीच सुविधाओं को लेकर एकरूपता का अभाव है।
उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार एक समिति बनाकर समान मानक तय करे और जरूरत पड़ने पर राज्यों को वित्तीय सहायता भी दे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो अदालत को ही समिति गठित करनी पड़ेगी।
इस पर सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार को समिति गठित करने में कोई आपत्ति नहीं है।
एक समान दिशानिर्देश तैयार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अलग-अलग राज्यों में मिलने वाली सुविधाओं में काफी असमानता है।
SC ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर एक समिति का गठन करे।
लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी, नवभारत टाइम्स में लीगल एडिटर हैं। वह 22 साल से भी ज्यादा वर्षों से लीगल रिपोर्टिंग कर रहे हैं। शुरुआत में वह दिल्ली की निचली अदालत और सीबीआई कवर करते थे और बाद में वह दिल्ली हाई कोर्ट और फिर लगातार डेढ़ दशक से सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे हैं। इस दौरान राजेश ने देश के तमाम हाई प्रोफाइल केस नीतीश कटारा मर्डर केस, जेसिक लाल केस, बोफोर्स केस, उपहार केस, पार्लियामेंट अटैक केस, प्रिय दर्शनी मट्टू केस से लेकर तमाम संवैधानिक मसले कवर किए जिनमें अनुच्छेद-370, तीन तलाक, निजता का अधिकार, होमो सेक्सुअलिटी को अपराध से बाहर करने का मामला और राम मंदिर मसले अहम है। राजेश ने इस 22 साल के करियर के दौरान दो साल 2006 से लेकर 2007 के सितंबर तक सहारा समय टीवी चैनल में भी बतौर लीगल संवावददाता काम किया। इसके बाद दोबारा वह नवभारत टाइम्स आए और उसके बाद लगातार कानूनी अफेयर्स को कवर करते रहे। नेशनल ब्यूरो में रहते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्रालय को कवर करने के साथ साथ कानून के विषय पर लगातार एडिट पेज पर लिख रहे हैं। साथ ही लगातार ऑनलाइन माध्यम के लिए भी सक्रिय रिपोर्टिंग करते रहे हैं और ..कोर्ट रूम..नाम के एक साप्ताहिक विडियो इंटरव्यू भी लगातार देते हैं जिनमें सप्ताह भर के मुख्य कानूनी मसले पर उनका साक्षात्कार प्रसारित होता है। इसके अलावा वह लगातार लीगल मसले पर लीगल फोरम नामक कॉलम भी लिखते रहे हैं। उन्होंने दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी किया है। साथ ही उन्होंने जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया और एलएलबी भी कर रखा है।... और पढ़ें
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