सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तरुण तेजपाल, हाईकोर्ट की सजा पर स्टे की मांग
तरुण तेजपाल ने हाईकोर्ट के आदेश पर एक हफ्ते की रोक की मांग की है. सजा पर 2:30 बजे सुनवाई होनी है, उससे पहले ही सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है. उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने और अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की है,

सौजन्य से:- Aaj Tak News
Sign In
Advertisement
X
तेहलका मैगजीन के संस्थापक संपादक तरुण तेजपाल 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में गोवा में बॉम्बे हाईकोर्ट से दोषी ठहराए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं. उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश पर एक हफ्ते की रोक की मांग की है. खास बात यह है कि सजा पर 2:30 बजे सुनवाई होनी है और उससे पहले ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
गोवा में वकील देविदास पांगम ने कहा कि अदालत ने सजा की मात्रा के सवाल पर आरोपी की बात सुन ली है. सजा को लेकर आदेश आज 2:30 बजे दिया जाएगा. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पहले का फैसला और आदेश रद्द किया जाता है और तेजपाल को दोषी ठहराया जाता है. अदालत ने यह भी कहा कि सजा पर दलीलें आज ही सुनी जाएंगी.
यह भी पढ़ें: तरुण तेजपाल को बरी करने का आदेश खारिज, बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेप केस में दिया दोषी करार
तरुण तेजपाल पर कई धाराओं में केस
अदालत ने तेजपाल को आईपीसी की धाराओं 376(2)(f) और (k), 354A, 354B के तहत दोषी ठहराया. कोर्ट ने कहा कि चूंकि सजा पर दलीलें होनी हैं, इसलिए तब तक उनसे सरेंडर का इंतजार कराया जाएगा. बाद में अदालत ने साफ किया कि अभी उन्हें हिरासत में नहीं लिया जा रहा है और सजा दोपहर में सुनाई जाएगी. कोर्ट ने कहा कि वह दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी.
Advertisement
हाईकोर्ट से सजा पर नरमी की मांग
तेजपाल की तरफ से वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने सजा में नरमी की मांग की. उन्होंने कहा कि यह पहला अपराध है, तेजपाल 62 साल के हैं और वरिष्ठ नागरिक हैं, इसलिए कानून के तहत जितनी कम से कम सजा हो सकती है, वही दी जाए. उन्होंने यह भी कहा कि जमानत की कोई गुंजाइश नहीं है, लेकिन ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के अलग-अलग निष्कर्षों के बीच सुप्रीम कोर्ट जाने का कानूनी हक है. पोंडा ने छह महीने की अवधि पर भी ध्यान देने और यह देखने को कहा कि कोई गलत आचरण या खराब व्यवहार का मामला नहीं है.
यह भी पढ़ें: गोवा के होटल में वारदात, ट्रायल कोर्ट से राहत और हाई कोर्ट से दोषी करार... तरुण तेजपाल केस की पूरी टाइम लाइन
कोर्ट ने सजा को लेकर तरुण तेजपाल से भी पूछा
अदालत ने पूछा कि क्या तेजपाल खुद सजा पर कुछ कहना चाहते हैं. इस पर तेजपाल ने कहा कि वे 30 साल से तथ्य सामने रखते रहे हैं, लेकिन जाहिर है उसका कोई मतलब नहीं माना गया. उन्होंने कहा कि वह दो बेटियों के पिता हैं, उनकी पत्नी है, और अब वे अपील कर सकते हैं. पोंडा ने आदेश पर रोक की भी मांग की.
Advertisement
सरकारी पक्ष की तरफ से तुषार मेहता ने कहा कि तेजपाल को हिरासत में भेजा जाए और फिर वह ऊपरी अदालत में जमानत मांग सकते हैं. पोंडा ने जवाब में कहा कि मामला 2013 का है, वह बरी होने के बाद बाहर रहे हैं, आदेश को चुनौती देना चाहते हैं, और अगर अदालत कहेगी तो वह जेल भी जाएंगे. अब नजर 2:30 बजे होने वाली सजा पर सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट में दायर उनकी एक हफ्ते की रोक वाली याचिका पर है.
---- समाप्त ----
Latest News in Hindi »
Advertisement
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
कांगड़ा कोर्ट ने 90 लाख नकदी व गहनों की सुपुर्दगी से इंकार, संपत्ति अधिकार अनिश्चित

बिल गेट्स ने चेतावनी दी: गलत हाथों में एआई से 100 करोड़ जीवन का खतरा, सरकार से कड़े नियमों की माँग

कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा: डिजिटल क्षेत्र में जातिगत गाली पर आपराधिक कार्रवाई संभव

दिल्ली HC: मुस्लिम वैवाहिक शादियों से POCSO का अपवाद नहीं

सुप्रीम कोर्ट में लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी की नई याचिका, यूपी सरकार पर भ्रामक जानकारी का आरोप

चुनाव आयोग का फ़ॉर्म‑६ बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट का समर्थन कथन विवादास्पद

उत्तरी प्रदेश सरकार ने कोर्ट को गुमराह किया, नोटिस देने वाले कार्यकारी मैजिस्ट्रेट को निलंबित नहीं किया: लॉ छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

सुप्रीम कोर्ट ने EC नियुक्ति विधि पर विभाजित रुख अपनाया: क्या बदलेगा चुनावी स्वतंत्रता?
ताज़ा ख़बरें
- संवैधानिक न्यायालय ही लगा सकते हैं संशोधित आजीवन कारावास, ट्रायल कोर्ट नहीं: सुप्रीम कोर्ट
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जमानत में न्यायाधीश नहीं थोप सकते निजी नैतिकता
- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक ऊर्जा मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार शिकायत को खारिज करने वाले हाई कोर्ट आदेश को बरकरार रखा, भाजपा MLA की अपील खारिज
- उच्च न्यायालय ने SGPC कर्मचारियों की बर्खास्तगी को उलट दिया, पाया 'भुकी' की पुनःप्राप्ति का सबूत अप्रमाणित
- बिल गेट्स की चेतावनी: अनियंत्रित AI से हो सकता है 100 करोड़ मौतों का जोखिम
- गोवा में धर्म‑परिवर्तन बिल को मिली आंतरिक विरोध से ठप्पी
- दिल्ली में ट्रैफ़िक चालान निपटाने का सुनहरा मौका: 25 अक्टूबर को लोक अदालत
- कर्नाटक के डीजीपी ने सेक्शन 35 बीएनएसएस के कड़ाई से पालन के लिए निर्देश जारी, पुलिस को व्यक्तिगत जवाबदेही की चेतावनी

