होटल के बंद कमरे से गहने चोरी होने पर होटल होगा जिम्मेदार: छत्तीसगढ़ राज्य आयोग का लैंडमार्क डिसिजन
होटल के बंद कमरे से गहने चोरी होने पर होटल होगा जिम्मेदार, छत्तीसगढ़ राज्य आयोग ने सुनवाई के बाद फरियादी को दिलाया ₹2.37 लाख का मुआवजा।

सौजन्य से:- ईटीवी भारत
उपभोक्ता अदालत का लैंडमार्क डिसिजन: होटल के बंद कमरे से गहने चोरी होने पर होटल होगा जिम्मेदार
छत्तीसगढ़ राज्य आयोग ने सुनवाई के बाद फरियादी को दिलाया ₹2.37 लाख का मुआवजा.
ई. टी. वी. भारत छत्तीसगढ़ टीम द्वारा
प्रकाशित : अगस्त 7, 2026 ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. ए. 6:11 अपराह्न भारतीय समय
रायपुर: छत्तीसगढ़ स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन, रायपुर ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि होटल में ठहरने वाला अतिथि केवल आवास सुविधा ही नहीं, बल्कि अपनी और अपनी संपत्ति की सुरक्षा की भी अपेक्षा करता है. यदि होटल के बंद कमरे से अतिथि के बहुमूल्य आभूषण चोरी हो जाता है, तो होटल प्रबंधन केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता कि कमरे में लॉकर उपलब्ध था और अतिथि ने उसका उपयोग नहीं किया.
उपभोक्ता अदालत का लैंडमार्क डिसिजन
छत्तीसगढ़ राज्य आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(7) के अनुसार सेवा का लाभ लेने वाला व्यक्ति भी उपभोक्ता की परिभाषा में आता है. इसलिए केवल भुगतान की रसीद प्रस्तुत न किए जाने के आधार पर किसी व्यक्ति को उपभोक्ता मानने से इंकार नहीं किया जा सकता.
जानिए क्या है विवाद से जुड़ा विषय
अपीलकर्ता नरजत सिंह सेठिया, निवासी बिकानेर (राजस्थान) के रहने वाले हैं, जबकि उत्तरवादी वी.डब्ल्यू. कैन्यन होटल, रायपुर है. शिकायत के मुताबिक शिकायतकर्ता अपने परिवार के साथ उक्त होटल में ठहरे हुए थे. प्रवास के दौरान उनके कमरे से परिवार के आभूषण चोरी हो गए, जिनकी कुल कीमत ₹2,02,500 बताई गई. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि होटल परिसर के भीतर बंद कमरे से चोरी होना होटल की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही का परिणाम है, जो सेवा में कमी की श्रेणी में आता है.
होटल का पक्ष
होटल प्रबंधन ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि प्रत्येक कमरे में लॉकर की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन शिकायतकर्ता ने उसका उपयोग नहीं किया. इसलिए चोरी के लिए होटल को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता. होटल ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस में एफआईआर. घटना के 2 दिन बाद दर्ज कराई गई, जिससे घटना संदेहास्पद मालूम पड़ता है. इसके अतिरिक्त होटल का कहना था कि शिकायतकर्ता होटल में ठहरने के भुगतान की रसीद प्रस्तुत नहीं कर सके, इसलिए वे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ता नहीं हैं.
जिला आयोग का फैसला
छत्तीसगढ़ स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन, रायपुर ने होटल की दलीलों को स्वीकार करते हुए शिकायत खारिज कर दी. आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता भुगतान का प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके तथा उन्होंने कमरे में उपलब्ध लॉकर का उपयोग भी नहीं किया. इन परिस्थितियों में होटल को उत्तरदायी नहीं माना जा सकता.
राज्य आयोग ने की फैसले की व्याख्या
अपील पर सुनवाई करते हुए राज्य आयोग ने जिला आयोग के निष्कर्षों से असहमति व्यक्त की और उसका आदेश निरस्त कर दिया. आयोग ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(7) के अनुसार सेवा का लाभ लेने वाला व्यक्ति भी उपभोक्ता है. लिहाजा केवल भुगतान की रसीद के अभाव में शिकायतकर्ता को उपभोक्ता का दर्जा देने से इंकार करना विधिसम्मत नहीं है.
आयोग ने यह भी कहा कि होटल के बंद कमरे से आभूषण चोरी होना होटल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है. होटल में ठहरने वाला प्रत्येक अतिथि यह अपेक्षा रखता है कि होटल परिसर में उसके व्यक्ति और संपत्ति दोनों की समुचित सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी. इसलिए ऐसी घटना होटल प्रबंधन की लापरवाही और सेवा में कमी का स्पष्ट प्रमाण है.
एफआईआर में देरी पर आयोग की टिप्पणी
राज्य आयोग ने एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी को भी शिकायत के विरुद्ध आधार मानने से इंकार कर दिया. आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता ने सबसे पहले होटल प्रबंधन को घटना की सूचना दी और होटल द्वारा की जा रही आंतरिक जांच का इंतजार किया. जब जांच से कोई परिणाम नहीं निकला, तब पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई. इसलिए एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी का संतोषजनक स्पष्टीकरण उपलब्ध है.
निर्णय में आयोग ने कहा अतिथि केवल आतिथ्य पर ही नहीं, बल्कि प्रतिष्ठान की सुरक्षा पर भी भरोसा करते हैं. वे होटल में शांति और आराम के लिए ठहरते हैं, न कि अपनी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर चिंता में रहने के लिए. आयोग ने माना कि होटल व्यवसाय में सुरक्षा व्यवस्था केवल एक अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि सेवा का अभिन्न और आवश्यक हिस्सा है.
राज्य आयोग ने होटल प्रबंधन को दिए निर्देश
राज्य आयोग ने होटल प्रबंधन को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को चोरी हुए आभूषणों के मूल्य के रूप में ₹2,02,500, मानसिक पीड़ा एवं असुविधा के लिए ₹25,000 तथा वाद व्यय के रूप में ₹10,000 का भुगतान करे. इस प्रकार कुल ₹2,37,500 की राशि 60 दिनों के भीतर अदा करने का आदेश दिया. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है, तो संपूर्ण राशि पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देय होगा.
इस फैसले को उपभोक्ता संरक्षण कानून के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नज़ीर के रूप में देखा जा रहा है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि होटल केवल आवास उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अतिथियों और उनकी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उनकी कानूनी जिम्मेदारी है. यह फैसला होटल उद्योग के लिए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिक जवाबदेही तय करता है. इसके साथ ही उपभोक्ताओं को यह भरोसा देता है कि होटल की लापरवाही से हुए नुकसान की भरपाई उपभोक्ता आयोग के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है.
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न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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