टावर ऑफ जस्टिस में स्थानांतरित होगी गुरुग्राम जिला अदालत: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने जनहित में गुरुग्राम जिला अदालत को टावर ऑफ जस्टिस में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। यह आदेश प्रशासनिक कार्यों में देरी और लापरवाही के खिलाफ दिया गया है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a4fba162d53a1b2f0043fb0","slug":"relocate-gurugram-district-court-to-tower-of-justice-high-court-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1072-1066564-2026-07-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"टावर ऑफ जस्टिस में स्थानांतरित करें गुरुग्राम जिला अदालत: हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टावर ऑफ जस्टिस में स्थानांतरित करें गुरुग्राम जिला अदालत: हाईकोर्ट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- सरकारी लापरवाही या प्रशासनिक चूक का खामियाजा न्यायपालिका और आम जनता क्यों भुगते
- हाईकोर्ट ने जनहित में दिया तत्काल स्थानांतरण का आदेश
चंडीगढ़। गुरुग्राम जिला अदालत के कामकाज पर मंडरा रहे संकट के बीच पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने अब अदालतों को नए न्यायिक परिसर ''टावर ऑफ जस्टिस'' में तत्काल स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सरकारी अधिकारियों की लापरवाही या प्रशासनिक चूक का खामियाजा न्यायपालिका और आम जनता को नहीं भुगतना चाहिए। न्यायिक कार्य किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होने चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में जिला अदालतों को नए परिसर में स्थानांतरित करना जनहित में अपरिहार्य है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि शिफ्टिंग की प्रक्रिया तत्काल पूरी की जाए और 21 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई तक अनुपालन का हलफनामा अदालत में दाखिल किया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि गुरुग्राम के पुराने जिला अदालत परिसर में आग लगने के बाद भवन का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था और उसे उपयोग के लिए अनुपयुक्त घोषित करना पड़ा। इसके बाद से अदालतों का संचालन अस्थायी रूप से एक गेस्ट हाउस से किया जा रहा है, जहां केवल अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई हो पा रही है।
अदालत ने माना कि इस स्थिति से न्यायिक व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है और आम लोगों को समय पर न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है। इससे पहले हाईकोर्ट ने गुरुग्राम के जिला व सत्र न्यायाधीश से नए न्यायिक परिसर की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि भवन में कई स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरा था, फर्नीचर पूरी तरह नहीं लगाया गया था और हाल की बारिश के दौरान बेसमेंट में सीवर का पानी भर गया था। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पर्यावरण मंजूरी और अग्निशमन विभाग की स्वीकृति भी लंबित थी।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान हरियाणा लोक निर्माण विभाग (भवन व सड़क) के अभियंता प्रमुख अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के बाद बताई गई सभी कमियों को दूर कर दिया गया है और भवन अब पूरी तरह तैयार है। पर्यावरण मंजूरी के लिए आवेदन किया जा चुका है तथा अग्निशमन विभाग का प्रमाणपत्र भी शीघ्र मिलने की संभावना है।
खंडपीठ ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में सभी औपचारिक मंजूरियां मिलने तक इंतजार किया जा सकता था, लेकिन गुरुग्राम जिला अदालत की वर्तमान स्थिति असाधारण है। न्यायिक कार्य पहले से ही गंभीर रूप से प्रभावित हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य राज्य सरकार की एजेंसी ने कराया है। यदि किसी स्तर पर वैधानिक मंजूरियां समय पर लेने में चूक हुई है तो उसके कारण न्यायालय के कामकाज को संकट में नहीं डाला जा सकता। गुरुग्राम के नए न्यायिक परिसर ''टावर ऑफ जस्टिस'' का निर्माण अक्तूबर 2020 तक पूरा होना था, लेकिन परियोजना लगातार विलंब का शिकार होती रही। इसी देरी को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की थी।
विज्ञापन
- हाईकोर्ट ने जनहित में दिया तत्काल स्थानांतरण का आदेश
चंडीगढ़। गुरुग्राम जिला अदालत के कामकाज पर मंडरा रहे संकट के बीच पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने अब अदालतों को नए न्यायिक परिसर ''टावर ऑफ जस्टिस'' में तत्काल स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सरकारी अधिकारियों की लापरवाही या प्रशासनिक चूक का खामियाजा न्यायपालिका और आम जनता को नहीं भुगतना चाहिए। न्यायिक कार्य किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होने चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में जिला अदालतों को नए परिसर में स्थानांतरित करना जनहित में अपरिहार्य है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि शिफ्टिंग की प्रक्रिया तत्काल पूरी की जाए और 21 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई तक अनुपालन का हलफनामा अदालत में दाखिल किया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि गुरुग्राम के पुराने जिला अदालत परिसर में आग लगने के बाद भवन का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था और उसे उपयोग के लिए अनुपयुक्त घोषित करना पड़ा। इसके बाद से अदालतों का संचालन अस्थायी रूप से एक गेस्ट हाउस से किया जा रहा है, जहां केवल अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई हो पा रही है।
विज्ञापन
अदालत ने माना कि इस स्थिति से न्यायिक व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है और आम लोगों को समय पर न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है। इससे पहले हाईकोर्ट ने गुरुग्राम के जिला व सत्र न्यायाधीश से नए न्यायिक परिसर की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि भवन में कई स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरा था, फर्नीचर पूरी तरह नहीं लगाया गया था और हाल की बारिश के दौरान बेसमेंट में सीवर का पानी भर गया था। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पर्यावरण मंजूरी और अग्निशमन विभाग की स्वीकृति भी लंबित थी।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान हरियाणा लोक निर्माण विभाग (भवन व सड़क) के अभियंता प्रमुख अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के बाद बताई गई सभी कमियों को दूर कर दिया गया है और भवन अब पूरी तरह तैयार है। पर्यावरण मंजूरी के लिए आवेदन किया जा चुका है तथा अग्निशमन विभाग का प्रमाणपत्र भी शीघ्र मिलने की संभावना है।
खंडपीठ ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में सभी औपचारिक मंजूरियां मिलने तक इंतजार किया जा सकता था, लेकिन गुरुग्राम जिला अदालत की वर्तमान स्थिति असाधारण है। न्यायिक कार्य पहले से ही गंभीर रूप से प्रभावित हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य राज्य सरकार की एजेंसी ने कराया है। यदि किसी स्तर पर वैधानिक मंजूरियां समय पर लेने में चूक हुई है तो उसके कारण न्यायालय के कामकाज को संकट में नहीं डाला जा सकता। गुरुग्राम के नए न्यायिक परिसर ''टावर ऑफ जस्टिस'' का निर्माण अक्तूबर 2020 तक पूरा होना था, लेकिन परियोजना लगातार विलंब का शिकार होती रही। इसी देरी को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की थी।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
किराएदार को बेदखली से नहीं बचता बैंकों का विलय: सुप्रीम कोर्ट

आयकर विभाग ने कमिंस इंडिया को राहत देने वाले आदेश के खिलाफ अपील दायर की

बैंकों का विलय नहीं बचाता किराएदार को, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

18 जुलाई को मोगा में लोक अदालत: नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट मामलों का त्वरित निपटारा

अररिया में चेक बाउंस मामलों के निपटारे को लोक अदालत

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर दान विवाद में एसआईटी जांच की मांग की सुनवाई से इनकार किया

तमिलनाडु सरकार को तमामदिन मनाने के खिलाफ हाई कोर्ट का नोटिस

मैनुअल स्कैवेंजिंग पर बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
ताज़ा ख़बरें
- भारत में विदेशी मध्यस्थ पुरस्कारों की सुरक्षा के लिए उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण आदेश
- एक बेटे की सेवा से दूसरे की जिम्मेदारी नहीं मिटती
- सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम एशियाई छात्रों के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा पर सीबीएसई से जवाब मांगा
- विशेष और राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजनों के लिए जिला न्यायालय ने तैयार की कार्ययोजना
- एपल को कानूनी झटका: ईयू अदालत ने कंपनी की याचिका खारिज की, आईमैसेज की आपत्तियां भी नामर्द
- फेशियल रिकग्निशन के प्रयोग की सावधानी: मतदाता डेटा सुरक्षा के लिए कानूनी व्यवस्था की मांग
- सुप्रीम कोर्ट के लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष लोक अदालत
- सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने एशियाई खेलों की घुड़सवारी टीम चयन मामले की सुनवाई से हटे

