सुप्रीम कोर्ट ने लॉ छात्रों की कम हाजिरी पर परीक्षा रोक को सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 3 नवंबर 2025 के निर्णय को चुनौती देती हुई कम हाजिरी के कारण लॉ छात्रों को परीक्षा से बाहर न करने के आदेश पर अपना रोक लागू रखा। यह फैसला सभी मान्यता प्राप्त लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों पर प्रभाव डालेगा और अब पक्षकारों को लिखित दलीलें प्रस्तुत करने का दो‑हफ्ते का समय दिया गया है।

सौजन्य से:- Hindustan
कम अटेंडेंस पर क्या इम्तिहान रुक सकता है? लॉ स्टूडेंट्स की हाजिरी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने लॉ छात्रों की कम हाजिरी पर परीक्षा रोकने से जुड़े दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर निर्णय सुरक्षित रखा। जानिए आखिर ये पूरा मामला क्या है?
कम हाजिरी के नाम पर क्या किसी कानून के छात्र को परीक्षा से बाहर किया जा सकता है? देश भर के हजारों लॉ स्टूडेंट्स इसी सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अब सबकी नजर अदालत के अगले कदम पर टिकी है। पीटीआई की खबर के मुताबिक जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता के साथ जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने सुनवाई की। बेंच के सामने कई अलग अलग याचिकाएं थीं। ये सभी दिल्ली हाईकोर्ट के 3 नवंबर 2025 के फैसले को चुनौती देती हैं। सभी पक्षों को लिखित दलीलें देने के लिए दो हफ्ते का समय मिला है। मामला सिर्फ एक कॉलेज का नहीं है। यह देश के सभी मान्यता प्राप्त लॉ कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने हाजिरी के नियमों पर कई बड़े निर्देश दिए थे। उन्हीं निर्देशों पर अब सुप्रीम कोर्ट को आखिरी बात कहनी है।
मई में लग चुकी है रोक
सुप्रीम कोर्ट इससे पहले 26 मई को हाईकोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 249 पर रोक लगा चुका है। इस पैराग्राफ में साफ लिखा था कि मान्यता प्राप्त लॉ संस्थानों के छात्रों को सिर्फ कम हाजिरी की वजह से परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा। उन्हें आगे की पढ़ाई या करियर में तरक्की से भी वंचित नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि यह रोक आगे के लिए लागू होगी। यानी पुराने मामलों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था
दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश दिया था कि वह तीन साल और पांच साल के एलएलबी कोर्स में अनिवार्य हाजिरी के नियम पर दोबारा विचार करे। अदालत का कहना था कि हाजिरी का नियम इतना सख्त न हो कि छात्रों को मानसिक तनाव झेलना पड़े। संस्थानों में छात्रों की शिकायतें सुनने का मजबूत इंतजाम होना भी जरूरी बताया गया। हाईकोर्ट ने बीसीआई से यह भी कहा कि वह मूट कोर्ट, सेमिनार, मॉडल पार्लियामेंट और डिबेट जैसी गतिविधियों को अकादमिक क्रेडिट देने पर सोचे। अदालत की कार्यवाही में हिस्सा लेने को भी इसी श्रेणी में रखने की बात थी। इसके पीछे सोच यह थी कि कानून की असली पढ़ाई सिर्फ कक्षा में बैठने से नहीं होती। एक और अहम बात थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि कोई भी लॉ कॉलेज या यूनिवर्सिटी बीसीआई की तय न्यूनतम हाजिरी से ज्यादा प्रतिशत की शर्त नहीं रख सकती। यह नियम लीगल एजुकेशन रूल्स के तहत तय है।
सुशांत रोहिल्ला की मौत से शुरू हुई थी कहानी
यह पूरा मामला 2016 में लॉ छात्र सुशांत रोहिल्ला की मौत से जुड़ा है। इस पर स्वतः संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू हुई थी। पहले यह मामला सुप्रीम कोर्ट ने शुरू किया और बाद में इसे दिल्ली हाईकोर्ट को भेज दिया गया। इसी सुनवाई में हाईकोर्ट ने सभी शिक्षण संस्थानों और यूनिवर्सिटियों को यूजीसी के नियमों के हिसाब से शिकायत निवारण समितियां बनाने को कहा। यूजीसी से भी कहा गया कि वह अपने नियमों पर चर्चा शुरू करे। छात्रों की शिकायतों के निपटारे और मानसिक सेहत से जुड़े बदलावों पर विचार करने की बात भी कही गई।
गौरतलब है कि अब असली सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट इन निर्देशों को कितना बरकरार रखता है। फैसले से तय होगा कि हाजिरी की शर्त कितनी सख्ती से लागू होगी। लाखों लॉ छात्रों के साथ कॉलेज प्रशासन और बार काउंसिल की नजर भी इसी फैसले पर है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
गुड़गांव के जेल लोक सुनवाई में दो कैदी मुक्त

बॉडी‑कैमरा अनिवार्यता पर दिल्ली हाई कोर्ट ने ठुकराई याचिका, कानून बनाने का आदेश नहीं

सुप्रीम कोर्ट के विभाजनित निर्णय पर केंद्र की याचिका: सीईसी नियुक्ति कानून में हित संघर्ष का दावा

सुप्रीम कोर्ट में शपथ ली जस्टिस सुनीता अग्रवाल, बनीं 13वीं महिला जज

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त चयन नियम पर विभाजित फैसले की पुनः समीक्षा को मंजूरी दी

राजपाल यादव को 2 करोड़ जमा करने का आदेश, सीजेआई ने फिल्मी टिप्पणी की

CEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में पुनः विचार की याचिका, विभाजित मत वाले फैसले को उलटने की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को 1.15 करोड़ जमा करने के बाद नई फ़िल्म बनाने की सलाह दी
ताज़ा ख़बरें
- मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति विधेयक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सम्भावना, सीजेआई ने कहा विचार करेंगे
- सीजेआई ने CEC नियुक्तियों के कानून में विभाजित निर्णय की पुनः सुनवाई के अनुरोध को स्वीकार किया
- राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में 1.15 करोड़ जमा किए, बाकी भुगतान का भरोसा दिया
- सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सुनीता अग्रवाल की नियुक्ति, महिला न्यायाधीशों की संख्या बढ़ी तीन
- सुप्रीम कोर्ट में तीन नए जज, महिला जजों की संख्या अब सिर्फ तीन
- सीजेआई बंटे हुए सीईसी नियुक्ति फैसले को वापस लेने की याचिका पर विचार करेंगे
- सीईसी चयन कानून के विभाजित फैसले को रद्द करने की याचिका, मुख्य न्यायाधीश ने कहा जांच करेंगे
- कोटद्वार में रास्ते के विवाद पर उच्च न्यायालय ने अंतरिम रोक को रद्द किया

