राजपाल यादव को 2 करोड़ जमा करने का आदेश, सीजेआई ने फिल्मी टिप्पणी की
सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को 13 अक्टूबर तक शिकायतकर्ता को कुल दो करोड़ रुपये जमा करने को कहा, जबकि उन्होंने 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट कोर्ट में पेश किया और शेष 85 लाख रुपये संपत्ति खरीदार के माध्यम से जमा करवाने का आश्वासन दिया। न्यायालय ने उनके रवैये पर तीखा आरोप लगाया और सजा में वृद्धि की चेतावनी दी, और सीजेआई ने हल्के स्वर में उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ का संदर्भ देकर टिप्पणी की।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं: जमा करने होंगे दो करोड़, सीजेआई बोले- आपका पैसा भी अता पता लापता
Wed, 07 Oct 2026 01:15 PM IST
प्रशांत तिवारी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Wed, 07 Oct 2026 01:15 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को 13 अक्टूबर तक शिकायतकर्ता को 2 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। राजपाल 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट लेकर कोर्ट पहुंचे, जबकि बाकी 85 लाख रुपये संपत्ति की बिक्री से मिलने हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनके रवैये पर नाराजगी जताई।
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अभिनेता राजपाल यादव को निर्देश दिया है कि वह चेक बाउंस मामले में शिकायतकर्ता को देय रकम में से 2 करोड़ रुपये 13 अक्टूबर तक जमा करें। कोर्ट ने साफ कहा कि रकम जमा किए जाने के बाद ही वह हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राजपाल यादव की याचिका पर विचार करेगा। राजपाल यादव आज खुद कोर्ट में मौजूद थे और अपने साथ 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट लेकर पहुंचे थे। बाकी 85 लाख रुपये 13 अक्टूबर तक उनकी संपत्ति के खरीदार के जरिए जमा किए जाने हैं, जो राजपाल के साथ कोर्ट में मौजूद था।
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'बार-बार मोहलत देना मजबूरी नहीं'
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि उनकी सजा बढ़ाई भी जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि अब तक जो बार-बार मोहलत दी गई, उसका मकसद सिर्फ यही था कि शिकायतकर्ता को उसका पैसा मिल सके। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की, 'कानून का इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।' कोर्ट ने साफ किया कि रकम जमा कराने का आदेश इसलिए दिया गया है ताकि शिकायतकर्ता के पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। हालांकि, अदालत ने कहा कि राजपाल यादव का अब तक का आचरण उसे संतुष्ट नहीं करता।
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‘अता पता लापता’ फिल्म का जिक्र आया तो कोर्ट में छा गई हल्की मुस्कान
आदेश पारित करने के बाद पीठ और राजपाल यादव के बीच कुछ हल्की-फुल्की बातचीत भी हुई। राजपाल ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ से हुए आर्थिक नुकसान का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फिल्म की वजह से उन्हें करीब 200 से 250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और फिल्म के निर्माता भी घाटे में रहे। इसी दौरान सीजेआई ने मजाकिया अंदाज में फिल्म के नाम को राजपाल यादव के मौजूदा हालात से जोड़ दिया। उन्होंने कहा, 'आपकी फिल्म की तरह आपका पैसा भी अता पता लापता है, गायब।' अदालत की इस टिप्पणी पर माहौल कुछ हल्का हो गया।
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‘प्रणाम करता हूं’
इसके बाद राजपाल यादव ने पीठ का अभिवादन करते हुए कहा, 'प्रणाम करता हूं।' उन्होंने फिर बताया कि ‘अता पता लापता’ फिल्म में उन्हें करीब 200-250 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है।
सीजेआई ने भी हल्के-फुल्के अंदाज में उन्हें सलाह दी कि अब एक अच्छी फिल्म बनाइए और लोगों का मनोरंजन कीजिए। उन्होंने मजाक करते हुए यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाले वकील भी अच्छे अभिनेता हैं और उन्हें अपनी फिल्मों में कास्ट किया जा सकता है।
आरटीजीएस नहीं हुआ तो 1.15 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट लेकर पहुंचे राजपाल
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने कोर्ट को बताया कि भुगतान करने के लिए उन्होंने रजिस्ट्री से संपर्क किया था, लेकिन वहां आरटीजीएस के जरिए भुगतान की अनुमति नहीं थी। इसके बाद राजपाल यादव 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट लेकर कोर्ट पहुंचे। वकील ने बताया कि बाकी 85 लाख रुपये एक खरीदार के जरिए दिए जाएंगे। राजपाल यादव की संपत्ति खरीदने वाला व्यक्ति भी कोर्ट में मौजूद था और संपत्ति का लेन-देन पूरा होते ही यह रकम जमा कर दी जाएगी।
‘अता पता लापता’ से जुड़ा है 5 करोड़ रुपये की देनदारी का विवाद
राजपाल यादव ने खुद कोर्ट को बताया कि पूरा विवाद करीब 5 करोड़ रुपये की देनदारी से जुड़ा है, जिसका संबंध फिल्म ‘अता पता लापता’ से है। उनका कहना था कि फिल्म ने उन्हें इससे कहीं ज्यादा बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाया। मामला साल 2010 का है। आरोप है कि मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने ‘अता पता लापता’ फिल्म के लिए राजपाल यादव को कर्ज दिया था। इसके भुगतान के लिए बाद में 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक जारी किए गए, लेकिन ये सभी चेक बाउंस हो गए।
ये भी पढ़ें: चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून में नया मोड़: सीजेआई के सामने पहुंची रिकॉल अर्जी, मुख्य न्यायधीश बोले- देखेंगे
'फिल्म बनाने के लिए लोन नहीं लिया जाता, यह निवेश या पैकेज डील होती है'
दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए राजपाल यादव ने कहा कि फिल्मों के लिए आम तौर पर इस तरह कर्ज नहीं लिया जाता। उन्होंने कहा, “लोन फिल्म के लिए नहीं लिया जाता। लोन घर बनाने या जमीन खरीदने के लिए लिया जाता है, फिल्म बनाने के लिए नहीं। यह या तो पैकेज डील होती है या निवेश।” उन्होंने आगे कहा कि वह खुद करीब 100 फिल्मों में काम कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें एक फिल्म बनाने के लिए लोन लेने की जरूरत ही क्यों होगी। राजपाल यादव ने न्यायपालिका और देश के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि उन्हें भारत, सुप्रीम कोर्ट और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा और सम्मान है। उन्होंने कहा कि अदालत की ओर से जो भी फैसला आएगा और जहां से भी आएगा, उसे सभी स्वीकार करेंगे।
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