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मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति विधेयक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सम्भावना, सीजेआई ने कहा विचार करेंगे

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं कार्यकाल) अधिनियम 2023 को चुनौती देती याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो सकती है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बुधवार को कहा कि वे इस मुद्दे की जांच करेंगे और आवश्यक फैसला लेंगे। इस बीच क्यूरेटिव पिटीशन के साथ रिव्यू पिटीशन भी दायर की गई है, जिससे मामला पाँच जजों की बेंच तक पहुँचा है।

7 अक्टूबर 2026 को 11:06 am बजे
मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति विधेयक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सम्भावना, सीजेआई ने कहा विचार करेंगे

सौजन्य से:- ABP News

CEC नियुक्ति कानून पर फैसला लेगा सुप्रीम कोर्ट? CJI बोले- 'विचार करेंगे'

सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून से जुड़े मामले पर सुनवाई कर सकता है. सीजेआई ने कहा कि वे इस पर विचार करेंगे.

मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट जल्द फैसला ले सकता है. चीफ जस्टिस्ट ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने बुधवार (7 अक्टूबर) को कहा कि वे इस मामले पर विचार करेंगे. वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने चीफ जस्टिस के सामने पूरा मामला रखा. उन्होंने कहा कि हमने उस आदेश को वापस लेने के लिए आवेदन दाखिल किया है.

दरअसल अदालत में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम 2023, को चुनौती देने वाली याचिका दाखिल की गई थी. इस मामले पर जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने फैसला सुनाया था. लेकिन अब इस पर पिटीशन दाखिल हुई है. इसके जरिए कहा गया है कि 23 सितंबर के फैसले को वापस लिया जाए.

'लाइव लॉ' की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम इसकी जांच करेंगे और फैसला भी लेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन भी दायर की गई है. इसके जवाब में शंकरनारायणन ने हां में जवाब दिया और कहा कि इसे दूसरी पार्टी की ओर से दायर किया गया है. उन्होंने कहा कि क्यूरेटिव पिटीशन से पहले रिव्यू पिटीशन दायर होनी चाहिए.

जस्टिस दत्ता और जस्टिस शर्मा की अलग-अलग राय

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की बेंच ने 23 सितंबर को इस मामले पर अलग-अलग राय रखी थी कि क्या सीईसी कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच के पास भेजा जाना चाहिए. इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा था कि ऐसा अनिवार्य नहीं है. जबकि जस्टिस शर्मा ने इससे अलग बात कही. आखिरकार बेंच ने मामले को 5 जजों की बेंच के पास भेज दिया. अब मामले को सीजेआई के सामने रखा गया है.

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