बॉडी‑कैमरा अनिवार्यता पर दिल्ली हाई कोर्ट ने ठुकराई याचिका, कानून बनाने का आदेश नहीं
दिल्ली हाई कोर्ट ने विरोध प्रदर्शनों में दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स को बॉडी‑वर्न कैमरा पहनने की अनिवार्यता की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई नहीं करने का फैसला किया। न्यायाधीशों ने बताया कि वे विधायिका को कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकते, क्योंकि संबंधित प्रावधान पहले ही मौजूद हैं। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह याचिका का प्रतिनिधित्व करे और छह महीने के भीतर संचालन‑संबंधी SOP तैयार करे।

सौजन्य से:- Navbharat Times
दिल्ली हाई कोर्ट ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को 'बॉडी-वर्न कैमरे' (BWC) पहनने का अनिवार्य निर्देश देने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को विरोध प्रदर्शनों के दौरान अनिवार्य रूप से 'बॉडी-वर्न कैमरे' (BWC) पहनने का निर्देश देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है।
क्यों दें कानून बनाने का निर्देश?
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन साम्ब्रे और न्यायमूर्ति अरुण भारद्वाज की बेंच ने कहा कि हम उन्हें कानून बनाने का निर्देश क्यों दें? यह नहीं कहा जा सकता कि यह कोई अस्पष्ट मामला है जिस पर आप चाहते हैं कि हम विचार करें। जब भी विधायिका की कोई मंशा रही है, उसने वैधानिक प्रावधान शामिल करके उपाय किए हैं।
सिर्फ दिल्ली पुलिस के बारे में चिंतित नहीं
वकील चाहत राघव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि आपको क्यों लगता है कि किसी न्यायिक आदेश की आवश्यकता है? हम केवल दिल्ली पुलिस के बारे में चिंतित नहीं हैं, बल्कि हम पूरी पुलिस की कार्रवाई को लेकर चिंतित हैं। इसके दूरगामी परिणाम होंगे।
बेंच ने केंद्र को दिया निर्देश
बेंच ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह एक प्रैक्टिसिंग वकील चाहत राघव द्वारा दायर याचिका पर एक 'रिप्रेजेंटेशन' (अभ्यावेदन) के तौर पर विचार करे।कोर्ट ने कहा कि उपरोक्त को देखते हुए, प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे आज से छह महीने की अवधि के भीतर संचालन के मामले में SOP तैयार करें।
मामले में क्या है केंद्र का पक्ष
केंद्र के वकील, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और स्टैंडिंग काउंसिल आशीष दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों के लिए पहले से ही एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) मौजूद है, जिसमें वीडियोग्राफी के प्रावधान भी शामिल हैं।
लेखक के बारे मेंदीपांशुदीपांशु वर्तमान में 'नवभारत टाइम्स ऑनलाइन' में कंसल्टेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. भीम राव अंबेडकर कॉलेज से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन और आईआईएमसी (IIMC) दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। मीडिया इंडस्ट्री में एक साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपांशु ने अपने करियर की शुरुआत साल 2025 में 'NDTV इंडिया' से की थी।उन्हें डिजिटल न्यूज रूम की तेज रफ्तार और ब्रेकिंग न्यूज कल्चर की अच्छी समझ है। दीपांशु की मुख्य रुचि राजनीति और क्राइम खबरों में है। वह बिहार चुनाव 2025, बजट 2026 और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों को कवर कर चुके हैं। इसके अलावा वह यूटिलिटी, लोकल, जंगल न्यूज और गुड न्यूज जैसी खबरों पर भी लगातार काम करते हैं।सोशल मीडिया और गूगल ट्रेंड्स पर उनकी खास नजर रहती है। वह इंटरनेट पर वायरल हो रहे मुद्दों और पाठकों की पसंद को समझकर खबरों को बहुत सरल, सटीक और असरदार तरीके से पेश करते हैं।... और पढ़ें
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