ICU सुधार में नया कदम: कोर्ट ने बुनियादी ढाँचा 9 महीने, स्टाफिंग 6 महीने में पूरा करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को 2026 की ICU गाइडलाइंस लागू करने का निर्देश दिया, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिकतम नौ महीने और क्रिटिकल‑केयर स्टाफ़ की भर्ती को छह महीने में समाप्त करना है। यह आदेश सभी सरकारी तथा निजी संस्थाओं पर लागू होता है और 5 नवम्बर 2026 तक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा 16 नवम्बर 2026 को अगली सुनवाई निर्धारित करने की मांग करता है।

सौजन्य से:- Live Law Hindi
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को 2026 की ICU गाइडलाइंस लागू करने का निर्देश दिया, इंफ्रास्ट्रक्चर और भर्ती के लिए समय-सीमा तय की
Shahadat
25 Sept 2026 11:08 AM IST
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 'इंटेंसिव केयर सर्विसेज़ के ऑर्गनाइज़ेशन और डिलीवरी' के लिए 2026 की गाइडलाइंस लागू करने का निर्देश दिया। इसमें ICU इंफ्रास्ट्रक्चर की खास ज़रूरतों के लिए ज़्यादा से ज़्यादा नौ महीने और क्रिटिकल-केयर स्टाफ़ की भर्ती के लिए छह महीने का समय तय किया गया।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह निर्देश ऐसे मामले में दिए, जिसमें कोर्ट ICU और क्रिटिकल-केयर सर्विसेज़ के लिए एक जैसे स्टैंडर्ड्स न होने की स्थिति पर नज़र रख रहा है।
यह मामला 2016 का है, जब सुप्रीम कोर्ट ने ICU इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ़िंग और मरीज़ों की देखभाल के लिए एक जैसे स्टैंडर्ड्स की ज़रूरत पर विचार करना शुरू किया। 2024 में मूल अपील का निपटारा होने के बाद भी कोर्ट इस मुद्दे पर नज़र रखता रहा।
केंद्र सरकार, राज्यों, मेडिकल एक्सपर्ट्स और दूसरे संबंधित लोगों से बातचीत के बाद कोर्ट ने 20 मई, 2026 को तीन-स्तरीय ICU फ़्रेमवर्क को मंज़ूरी दी। इसमें लेवल I, लेवल II और लेवल III ICU के लिए कम से कम ज़रूरी चीज़ें तय की गईं। इस फ़्रेमवर्क में इंफ्रास्ट्रक्चर, उपकरण, मैनपावर, इन्फेक्शन कंट्रोल, इमरजेंसी सर्विसेज़ और मरीज़ों की देखभाल शामिल हैं।
ये तीन लेवल क्रिटिकल केयर की जटिलता और उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर व मैनपावर पर आधारित हैं।
21 सितंबर को जारी ताज़ा आदेश इन गाइडलाइंस को लागू करने की समय-सीमा से जुड़ा है।
लेवल I ICU इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए, कमेटी ने कुछ बड़ी ज़रूरतों के लिए 12 महीने तक का समय सुझाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस समय को घटाकर नौ महीने कर दिया।
कोर्ट ने कहा,
"जहां भी 12 महीने तक का समय तय किया गया, उसे पालन करने के मकसद से 9 महीने के समय से बदल दिया जाएगा।"
दूसरी ज़रूरतों के लिए समय-सीमा कम है। बेडसाइड यूटिलिटीज़, नॉन-इमरजेंसी उपकरण और लेबोरेटरी सर्विसेज़ तीन महीने के अंदर उपलब्ध करानी होंगी, जबकि इन्फेक्शन-कंट्रोल और सुरक्षा से जुड़ी ज़रूरतों को तुरंत पूरा करना होगा।
ICU स्टाफ़ की भर्ती के लिए छह महीने
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को ICU स्पेशलिस्ट, ट्रेंड MBBS डॉक्टर, नर्स और सहयोगी हेल्थकेयर स्टाफ़ की भर्ती तुरंत शुरू करने और छह महीने के अंदर इसे पूरा करने का निर्देश दिया। यह निर्देश सरकारी संस्थानों और सरकारी नियंत्रण से बाहर के संस्थानों, दोनों पर लागू होता है।
कोर्ट ने कहा,
"...भारत सरकार, संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ सरकारी नियंत्रण से बाहर के स्टेकहोल्डर्स/पक्षों/अस्पतालों को एक और आदेश (मैन्डमस) जारी किया जाता है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि ICU के कामकाज के लिए ज़रूरी पर्याप्त कर्मचारियों की भर्ती की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए और किसी भी हाल में छह महीने के भीतर पूरी कर ली जाए।"
कोर्ट ने उन अस्पतालों को भी निर्देश दिया, जो खुद को 'सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस' या स्पेशलिटी अस्पताल बताते हैं और जिन्हें लेवल III ICU बनाए रखने की ज़रूरत होती है। उन्हें अनिवार्य लेवल I ज़रूरतों के अलावा लेवल III की ज़रूरतों का भी पालन करना होगा।
कोर्ट ने गाइडलाइंस को लागू करने के लिए आदेश जारी किया और चेतावनी दी कि किसी भी तरह की ढिलाई या चूक पर सख़्त रुख अपनाया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा,
"ऊपर बताई गई समय-सीमा का संबंधित सरकारों, खासकर भारत सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और संबंधित सचिवों के साथ-साथ सरकारी नियंत्रण से बाहर के संस्थानों द्वारा सख्ती से पालन किया जाना चाहिए... अगर कोर्ट को इन गाइडलाइंस और तय समय-सीमा के पालन में कोई ढिलाई या चूक दिखती है तो कोर्ट नियमों का पालन न करने वाले पक्षों के खिलाफ सख़्त रुख अपना सकता है।"
केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 5 नवंबर, 2026 तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर, 2026 को होगी।
पहाड़ी और दूर-दराज के इलाकों के लिए अधिकारी अब तक पूरे किए गए काम और आगे के लिए ज़रूरी समय की जानकारी देकर अतिरिक्त समय की मांग कर सकते हैं।
Cause Title: ASIT BARAN MONDAL & ANR. VERSUS DR. RITA SINHA MBBS MS (OBST. GYNAE) & ORS.
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