IRDAI ने मोटर बीमा नियमों में बदलाव का प्रस्ताव, प्रीमियम घट सकते हैं और विकल्प बढ़ेंगे
IRDAI ने मोटर बीमा वितरण के लिए त्रि‑स्तरीय ढांचा, कमिशन सीमा और डिजिटल चैनल ‘बीमा सुगम’ को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम से प्रीमियम में कमी, डिस्ट्रीब्यूटर्स के मार्जिन पर दबाव और पारदर्शिता व मिस‑सेलिंग रोकथाम में सुधार की संभावना है, जबकि अंतिम असर नियमानुसार लागू होने पर निर्भर करेगा।

सौजन्य से:- ETV Bharat
IRDAI ने मोटर इंश्योरेंस से जुड़े नए कानूनों का दिया प्रस्ताव, कम हो सकते हैं प्रीमियम, मिलेंगे ज्यादा विकल्प
इंश्योरेंस रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (IRDAI) के नए प्रस्ताव लागू होते हैं, तो मोटर इंश्योरेंस खरीदने के तरीके में बड़ा बदलाव आ सकता है.
Published : September 25, 2026 at 12:07 PM IST
नई दिल्ली: इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (IRDAI) का कंसल्टेशन पेपर भारतीय इंश्योरेंस इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव लाने वाला है. जानकारों के मुताबिक, इसमें कोशिश के हिसाब से पेमेंट करने के तरीके को अपनाने और प्रोडक्ट-लेवल पर कमीशन की सीमा तय करने का प्रस्ताव है.
इंश्योरेंस रेगुलेटर ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में बड़े सुधारों का प्रस्ताव दिया है. इनमें एक आसान तीन-स्तरीय ढांचा शामिल है, जिसका मकसद पॉलिसीहोल्डर्स के लिए लागत कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और बड़े पैमाने पर गलत तरीके से पॉलिसी बेचने (mis-selling) के खिलाफ सुरक्षा को मजबूत करना है.
जानकारों के मुताबिक, इस कदम से ग्राहकों को निश्चित रूप से फायदा होगा, लेकिन इससे बैंकाश्योरेंस पार्टनर और NBFCs जैसे डिस्ट्रीब्यूटर्स के मार्जिन पर भी तुरंत दबाव पड़ेगा.
Deloitte India के पार्टनर देबाशीष बनर्जी ने कहा कि, "आखिरकार, इस प्रपोज़ल का मकसद डिजिटल अपनाने को बढ़ावा देना, पॉलिसी की स्थिरता में सुधार करना और ज़्यादा सस्टेनेबल, कंज्यूमर-फर्स्ट मार्केटप्लेस बनाना है. जैसा कि कहा जाता है, ‘ज़रूरत ही इनोवेशन की जननी है’, और ये बदलाव कंपनियों को इनोवेटिव होने के लिए मजबूर करेंगे."
'इंश्योरेंस वितरण के अर्थशास्त्र को पुनर्गठित करना' विषय पर IRDAI के परामर्श पत्र में नए वाहनों के मोटर बीमा के लिए तृतीय-पक्ष प्रीमियम पर पारिश्रमिक को शून्य और स्वयं की क्षति और संबंधित कवरों के लिए 5 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रस्ताव है.
इससे 'टेक्नोलॉजी, जागरूकता और उससे जुड़े खर्च' भी कमीशन की तय सीमा के दायरे में आ जाएंगे, और मौजूदा मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर (MISP) सिस्टम की जगह एक ज़्यादा व्यापक इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी (IDE) सिस्टम लागू हो जाएगा.
शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की पार्टनर शैलजा लाल ने कहा कि, "इन बदलावों का सीधा असर ऑटोमोबाइल डीलरों, OEM-लिंक्ड ब्रोकरों, इंश्योरेंस कंपनियों और दूसरे मोटर इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटरों पर काफी ज़्यादा पड़ेगा. नई गाड़ी की पॉलिसी से होने वाली शुरुआती कमाई को कम करके और डीलर-लिंक्ड व्यवस्थाओं को सख़्त करके, ये प्रस्ताव डिस्ट्रीब्यूशन मार्जिन को और कम कर सकते हैं."
इन प्रस्तावों का मकसद इंश्योरेंस की बिक्री को डीलर के साथ दूसरे तरह के रिश्तों से अलग करना है. डीलर सिर्फ़ इसलिए कैशलेस रिपेयर से मना नहीं कर पाएंगे, क्योंकि ग्राहक ने इंश्योरेंस कहीं और से खरीदा है.
साथ ही, IRDAI ग्राहकों को 'बीमा सुगम' जैसे वैकल्पिक डिजिटल चैनलों तक बेहतर पहुंच देने का प्रस्ताव कर रहा है, और डीलरों के लिए यह ज़रूरी होगा कि वे गाड़ी बेचते समय ग्राहकों को इस विकल्प के बारे में साफ़ तौर पर जानकारी दें.
लाल ने कहा कि, "इसलिए, ये सुधार पारंपरिक डीलर-लेड मॉडल को बदल सकते हैं, जिसमें इंश्योरेंस सेल्स, गाड़ी की फाइनेंसिंग और आफ्टर-सेल्स सर्विसिंग आपस में जुड़े हुए हैं. रेवेन्यू का दबाव डिस्ट्रीब्यूटर्स को रिन्यूअल, सर्विसिंग, टेक्नोलॉजी और दूसरी मंज़ूर वैल्यू-एडेड सर्विसेज़ पर ज़्यादा ज़ोर देने के लिए बढ़ावा दे सकता है."
जानकारों का कहना है कि इसका अंतिम असर IRDAI द्वारा अपनाए जाने वाले नियमों और उनके साथ लागू होने वाले ट्रांज़िशन फ्रेमवर्क पर निर्भर करेगा. कंसल्टेशन पेपर में सभी तरह के जनरल इंश्योरेंस कमीशन पर लिमिट लगाने का प्रस्ताव है. इसमें हेल्थ इंश्योरेंस के लिए पहली बार मिलने वाले कमीशन को 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच रखने और रिन्यूअल व पोर्टिंग पर मिलने वाले पेमेंट को 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक सीमित करने का सुझाव दिया गया है.
ड्राफ्ट पेपर में डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए पहले साल के कमीशन को अवधि के आधार पर 5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच सीमित किया गया है. यह पहले के उन बहुत ज़्यादा प्रभावी पेआउट से कम है, जो प्रमोशन पर होने वाले खर्च और रिवॉर्ड को मिलाकर 60 प्रतिशत तक पहुंच जाते थे.
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