हाईकोर्ट ने बच्चे की कस्टडी का अधिकार फैमिली कोर्ट को देकर जिला आदेश निरस्त किया
जबलपुर में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कहा कि नाबालिग की कस्टडी का निर्णय फैमिली कोर्ट के पास है, इसलिए जिला न्यायालय के आदेश को रद्द कर मामला उस फोरम में भेजा गया। यह निर्णय मोहन राय द्वारा गार्डियन एंड वार्ड्स एक्ट की धारा 9 व 12 के तहत दायर अपील के बाद आया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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जबलपुर: बच्चे की कस्टडी पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, जिला अदालत का आदेश रद्द, फैमिली कोर्ट में होगी सुनवाई
Fri, 02 Oct 2026 08:33 AM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 08:33 AM IST
सार
नाबालिग बच्चे की कस्टडी से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने जिला अदालत का आदेश निरस्त कर दिया। कोर्ट ने प्रकरण को अब फैमिली कोर्ट भेज दिया है।
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विस्तार
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने बच्चे की कस्टडी से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा कि नाबालिग बच्चे की कस्टडी के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार फैमिली कोर्ट के पास है। जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने जिला न्यायालय द्वारा पारित आदेश को निरस्त करते हुए प्रकरण को सुनवाई के लिए फैमिली कोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।
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जबलपुर निवासी मोहन राय की ओर से हाईकोर्ट में दायर सिविल अपील में बताया गया कि उन्होंने गार्डियन एंड वार्ड्स एक्ट की धारा 9 के तहत नाबालिग बच्चे की कस्टडी के लिए जिला न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। इसके साथ ही एक्ट की धारा 12 के तहत 5 अगस्त 2025 को अंतरिम आवेदन भी दायर किया गया था। आवेदन पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने प्रतिवादी पत्नी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
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प्रतिवादी पत्नी की ओर से जवाब पेश किए जाने के बाद न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और 25 मार्च 2026 को मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। इसी बीच संबंधित न्यायाधीश का स्थानांतरण हो गया। इसके बाद प्रकरण को छठे जिला न्यायाधीश के समक्ष पेश करने और अंतरिम आवेदन पर नए सिरे से सुनवाई के निर्देश दिए गए। अंतरिम आवेदन की सुनवाई के लिए 12 मई 2026 की तारीख निर्धारित की गई थी।
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इससे पहले 17 अप्रैल 2026 को अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की स्वीकार्यता का मुद्दा उठाया था। इस पर संबंधित पक्षों की ओर से कोई आपत्ति प्रस्तुत नहीं की गई। इसके बाद आवेदक को 30 अप्रैल 2026 को जबलपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा जारी कार्य-वितरण आदेश प्राप्त हुआ। इसमें गार्डियन एंड वार्ड्स एक्ट से जुड़े प्रकरण छठे जिला न्यायाधीश को सौंपे जाने का उल्लेख था। इसके बावजूद निचली अदालत ने 4 अगस्त 2026 को आदेश पारित करते हुए आवेदक को उचित फोरम के समक्ष प्रकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि निचली अदालत का विवादित आदेश कार्य-वितरण आदेश और सिविल कोर्ट रूल्स, 1958 के लागू प्रावधानों की अनदेखी करते हुए पारित किया गया है। याचिका में मांग की गई थी कि विवादित आदेश को निरस्त कर अंतरिम आवेदन पर निर्णय के लिए प्रकरण संबंधित अदालत को वापस भेजा जाए। मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने जिला न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया और प्रकरण को उचित सुनवाई के लिए फैमिली कोर्ट भेजने के निर्देश दिए। इसी आदेश के साथ हाईकोर्ट ने सिविल अपील का निराकरण कर दिया।
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