सुप्रीम कोर्ट ने वन‑नेशन‑वन‑इलेक्शन विधेयकों की संसद समिति से मिलने से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने उन वरिष्ठ जजों को संसद की संयुक्त समिति के साथ चर्चा करने से रोका, जो एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव वाले संविधान संशोधन बिलों की जांच कर रही थी, यह कहते हुए कि भविष्य में इन बिलों की न्यायिक समीक्षा हो सकती है। इससे पहले, विपक्ष के सांसद कपिल सिब्बल ने इस प्रकार की बैठक को असंवैधानिक और शक्ति पृथक्करण के विरुद्ध बताया था। समिति को सूचित किया गया कि प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी गई है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
वन नेशन वन इलेक्शन मसले पर चर्चा के लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों ने संसदीय समिति से प्रस्तावित से मिलने से इनकार कर दिया है। विपक्ष ने इस प्रस्तावित बैठक पर विरोध जताया था।
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने उस संसदीय समिति से मिलने से इनकार कर दिया है जो एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव वाले संविधान संशोधन बिल की जांच कर रही है। कोर्ट का कहना है कि सीनियर जजों का इस मामले पर चर्चा करना ठीक नहीं होगा, क्योंकि प्रस्तावित संशोधन आगे चलकर न्यायिक समीक्षा का विषय बन सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल की ओर से समिति को भेजे गए एक संदेश में कहा गया कि संविधान (129वां संशोधन) बिल, 2024 और UT कानून (संशोधन बिल, 2024) की जांच करने वाली संयुक्त समिति ने 6 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश और अन्य जजों के साथ एक साथ चुनाव के मुद्दे पर अनौपचारिक चर्चा का प्रस्ताव रखा था, जिस पर सीनियर जजों के बीच बातचीत हुई।
न्यायिक समीक्षा का विषय बन सकता है
सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल के मैसेज में कहा गया, 'उनकी राय है कि चूंकि प्रस्तावित संशोधन आगे चलकर शीर्ष अदालत में न्यायिक समीक्षा का विषय बन सकता है, इसलिए प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा करना उचित या सही नहीं होगा। इसलिए प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी गई है।' सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद, बीजेपी सांसद पी.पी. चौधरी की अध्यक्षता वाली समिति ने अपने सदस्यों को सूचित किया कि तय बैठक रद्द कर दी गई है।
विपक्ष ने जताया था विरोध
इससे पहले दिन में निर्दलीय राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने प्रस्तावित दौरे पर आपत्ति जताते हुए इसे ‘असंवैधानिक’ और शक्तियों के पृथक्करण की अवधारणा के विपरीत बताया था।
सरकार जजों को बता रही है कि कानून कितना अच्छा है। यही वह कानून है, जिसके खिलाफ याचिका दायर की जाएगी और उच्चतम न्यायालय तय करेगा कि याचिका वैध है या नहीं तथा कानून को रद्द किया जाना चाहिए या बरकरार रखा जाना चाहिए।
कपिल सिब्बल, राज्यसभा सदस्य
कानून बनाना संसद का अधिकार
वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल ने कहा कि उन्होंने कभी किसी संसदीय समिति को ऐसे प्रस्तावित कानून पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के साथ बातचीत करते नहीं देखा, जिसे बाद में अदालत में न्यायिक निर्णय के लिए लाया जा सकता है। निर्दलीय राज्यसभा सदस्य ने कहा कि कानून बनाना संसद का अधिकार है और कानून की संवैधानिक वैधता की समीक्षा करना अदालत का दायित्व।
बता दें कि संयुक्त समिति संविधान (एक सौ उनतीसवां संशोधन) विधेयक, 2024 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार कर रही है। इन विधेयकों में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के लिए रूपरेखा प्रदान करने का प्रस्ताव है। दोनों विधेयक दिसंबर 2024 में लोकसभा में पेश किए गए थे और बाद में जांच के लिए संयुक्त समिति को भेजे गए थे।
लेखक के बारे मेंवरुण शैलेशवरुण शैलेश, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। वह अप्रैल 2025 में नवभारत टाइम्स से जुड़े और होमपेज टीम का हिस्सा बने। वह शिफ्ट और होमपेज की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ न्यूज की प्रभावी प्लानिंग, खबर लिखने और संपादन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। उन्हें प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल न्यूज टीम में काम करने का लंबा अनुभव है। इस दौरान डेस्क के साथ रिपोर्टिंग का अनुभव भी हासिल किया। सियासी गलियारे में होने वाली हलचलों, सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों, समाज में सांस्कृतिक बदलावों पर नजर रखते हैं। करंट अफेयर्स को लेकर सचेत रहने वाले वरुण शैलेश रोजाना खबरों को विभिन्न एंगल से प्रस्तुत करने को लेकर एक्टिव रहते हैं। वैश्विक राजनीति का देश की सियासत पर पड़ने वाले असर, जियोपॉलिटिकल सिचुएशन के लिहाज से खबरों के प्रजेंटेशन में महारत रखते हैं। वरुण शैलेश न्यूज को चैलेंज की तरह लेते हैं और खबरों की दुनिया को एन्जॉय करते हैं।
विशेषज्ञताः करंट अफेयर्स, ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक खबरों के साथ ग्लोबल पॉलिटकल सिचुएशन का देश की राजनीति पर पड़ने वाले असर के लिहाज से खबरों को प्रस्तुत करते हैं। सोशल जस्टिस, चाइल्ड प्रोटेक्शन से जुड़े इश्यूज पर पकड़।
पत्रकारिता का अनुभवः वरुण शैलेश ने वर्ष 2009 में इंडो एशियन न्यूज सर्विस (IANS)से करियर की शुरुआत की, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग और खबरों के संपादन में महारत हासिल की। इसके बाद हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) से जुड़े और सेंट्रल डेस्क पर पांच साल से ज्यादा समय तक रहे। इस दौरान, उन्होंने लोकसभा चुनाव 2014 के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली विधानसभा चुनावों से जुड़ी खबरों के संपादन की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद दैनिक जागरण के संपादकीय पेज और Op-ed पेज पर रहे। इस दौरान विभिन्न विषयों के नामचीन लेखकों, वरिष्ठ पत्रकारों के लेखों के संपादन के साथ साथ आइडिएशन, संपादन की जिम्मेदारी संभाली। 2018 में आजतक (डिजिटल) टीम का हिस्सा बने। आजतक में मुख्य न्यूज टीम का हिस्सा रहे। इस दौरान लोकसभा चुनाव 2019, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली विधानसभा चुनावों को कवर किया। दिल्ली में विभिन्न पॉलिटकल गतिवियों को कवर किया। आजतक में इंटरनेशनल-फीचर टीम को भी लीड किया। आजतक डिजिटल में इंटरनेशनल पेज को दूसरा सबसे अधिक नंबर लाने वाले सेक्शन के तौर पर स्थापित किया। दैनिक भास्कर (डिजिटल) में वुमन सेक्शन (फीचर) टीम को लीड किया। इस दौरान आइडिएशन, प्रभावी प्लानिंग की जिम्मेदारी संभालने के साथ साथ हेल्थ, क्राइम, फूड और सोशल इश्यूज पर जमकर लिखा।
वरुण शैलेश ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से सोशियोलॉजी (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया। फिर भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर की डिग्री भी हासिल की।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Indiaकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने वन नेशन वन इलेक्शन समिति के सीजेआई एवं अन्य जजों के साथ बैठक प्रस्ताव को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी प्रमाणपत्र विवाद पर सुनवाई का आदेश दिया, भर्ती में रोक नहीं

सप्लिट फैसले के बाद न्यायाधीश के बेटे के EC काउंसल पद को छुपाने को लेकर पुनः विचार की मांग

सुप्रीम कोर्ट पर सवाल, मई‑जून 2025 के OBC प्रमाणपत्रों की वैधता

सुप्रीम कोर्ट ने 'वन नेशन, वन इलेक्सन' समिति के साथ बैठक को अस्वीकार किया

अदालत ने पति के दुराचार को मान्यता देते हुए महिला को तलाक दिलाया

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एसबीआई का धोखाधड़ी नोटिस रद्द कर बैंक को कारण‑विवरण देने का निर्देश दिया, साथ ही सहकारी बैंकों की दोगुनी ऋण वसूली पर अंतरिम रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी सर्टिफिकेट विवाद पर सुनवाई स्वीकार की, बंगाल सरकार को नोटिस जारी
ताज़ा ख़बरें
- एमपी हाई कोर्ट ने वायरल कुंब्ह लड़की मोनालिसा को राहत दी, जन्म तिथि बदलने के आदेश को रद्द किया
- संधि‑विभाजन को लेकर विपक्ष की चिंता में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' समिति ने सुप्रीम कोर्ट यात्रा को स्थगित किया
- सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा के सर्किट हाउस विवाद में बंगाल सरकार को जवाब देने का आदेश दिया
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने सैमंथा रुथ प्रभु के नाम‑छवि की डीपफेक के विरुद्ध अंतरिम सुरक्षा आदेश दिया
- सुप्रीम कोर्ट के CJI के अनुसार, एआई सहायता दे सकता है पर न्यायाधीश का निर्णय अनिवार्य
- सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की विशेष याचिकाएँ खारिज, बाबा बैद्यनाथ मेडिकल कॉलेज की जमीन कार्यवाही जारी
- कपिल सिब्बल ने 'वन नेशन‑वन इलेक्शन' विधेयकों पर सुप्रीम कोर्ट दौरे को असंवैधानिक बताया
- मापन कानून संशोधन पर चर्चा: डिजिटल परिवर्तन और तीन मुख्य स्तंभ

